मीडिया पर बैन के खिलाफ RLSP का काला दिवस, धरने पर बैठे उपेंद्र कुशवाहा
Patna News in Hindi

मीडिया पर बैन के खिलाफ RLSP का काला दिवस, धरने पर बैठे उपेंद्र कुशवाहा
सरकार की नाकामियों के विरोध और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आरएलएसपी काला दिवस मना रही है.

आरएलएसपी (RLSP) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) समेत पार्टी के सभी नेता एक दिन के धरने पर हैं. पार्टी नेताओं ने मुंह पर पट्टी बांधकर सुबह दस से बारह बजे यानी दो घंटे तक अपना विरोध जताने का फैसला किया है.

  • Share this:
पटना. कैद है मीडिया, जनता है विवश, बैठें धरना पर मनाएं काला दिवस. जी हां, बिहार (Bihar) में विपक्षी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी यानी आरएलएसपी का नया नारा यही है. इसी नारे को आगे कर आरएलएसपी (RLSP) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) समेत पार्टी के सभी नेता एक दिन के धरने पर हैं. पार्टी नेताओं ने मुंह पर पट्टी बांधकर सुबह दस से बारह बजे यानी दो घंटे तक अपना विरोध जताने का फैसला किया है. पार्टी का विरोध बिहार सरकार (Bihar Government) की तरफ से मीडिया को क्वारंटाइन सेंटर में जाने पर रोक लगाए जाने को लेकर है. पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार की नाकामियों के विरोध और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आरएलएसपी काला दिवस मना रही है.

कोरोना संकट में विफल रही बिहार सरकार
आरएलएसपी के प्रधान महासचिव माधव आनंद ने न्यूज 18 से बात करते हुए कहा, ‘इस कोरोना संकट की घड़ी में बिहार सरकार पूरी तरह विफल रही है. विफलता के कारण लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया को लेकर बैन लगाने का काम बिहार सरकार ने किया है. सरकार से कहना चाहता हूं कि मीडिया ही आपके अच्छे कामों को उजागर करता है और आपकी नाकामियों को भी उजागर करने का काम करता है. आज बिहार में क्वारंटीन सेंटर की जो हालात है, उसे मीडिया के बंधु जान जोखिम में डालकर सरकार के सामने ला रहे हैं तो उस पर प्रतिबंध लगाने का काम किया जा रहा है.’

नाकामियों को लेकर मनाया जा रहा काला दिवस
उन्होंने कहा कि आज हमलोग बिहार सरकार की नाकामियों को लेकर काला दिवस मना रहे हैं. बिहार सरकार अपने अहंकार को छोड़कर हमारी पांच सूत्री मांगों को माने, नहीं तो हमलोगों का आंदोलन लगातार जारी रहेगा. आरएलएसपी ने मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध को अविलंब वापस लेने की मांग की है. अपने धरने के दौरान आरएलएसपी ने बिहार सरकार के सामने पांच सूत्री मांगे भी रखी हैं, जो इस प्रकार हैं.



प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए हो कार्रवाई
पांच सूत्री मांगों में पहली मांग बिहार से बाहर फंसे उन मजदूरों की घर वापसी के लिए त्वरित कार्रवाई की जाए, जो घर आना चाहते हैं. जो बाहर ही दूसरे राज्यों में रहना चाहते हैं, उनके खाते में उतनी रकम डाल दी जाए जितनी रकम उनके आने और क्वारंटीन सेंटर में रखे जाने पर खर्च होता है. सरकारी आंकड़े के हिसाब से यह खर्च दस हजार रूपए का आता है, लिहाजा हर व्यक्ति के खाते में दस हजार रूपए डाला जाए. दूसरी मांग में बिहार में रह रहे वैसे लोग, जिनके खाते में अबतक मात्र एक हजार रूपए दिया गया है, उन्हें दूसरी किस्त की राशि भी जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाए.

रोजगार के लिए बने ठोस योजना
इसके अलावा राज्य में रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए ठोस योजना बनाई जाए. साथ ही किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए ठोस, पर्याप्त और त्वरित कार्रवाई की जाए. क्वारंटीन सेंटर से खबर संग्रहित करने से मीडिया कर्मियों को प्रतिबंधित करने के लोकतंत्र विरोधी आदेश को अविलंब वापस लिया जाए.

पहले भी रख चुके हैं उपवास
हालांकि इसके पहले भी पार्टी की तरफ से एक दिन का उपवास भी रखा जा चुका है और पार्टी नेताओं की तरफ से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला दहन भी किया जा चुका है. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी अपने तरीके से बिहार सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है उसी कड़ी में अब उपवास के बाद अब काला दिवस मना रही है.

 

ये भी पढ़ें:

Lockdown डायरीःदिल्ली में काम न मिला तो रिक्शा खरीद बंगाल को निकल पड़ा परिवार
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading