महागठबंधन और तेजस्वी यादव के फैसले पर बेगूसराय में टिकी गिरिराज सिंह की किस्मत !

अगर इस सीट पर कन्हैया कुमार को महागठबंधन और तेजस्वी का समर्थन मिल जाता है तो गिरिराज की मुश्किलें बढ़ सकती है. ऐसा इसलिए भी कि यह सीट और इलाका उनके लिए नया है साथ ही कन्हैया ने इस इलाके में पिछले एक साल का समय दिया है.

Amrendra Kumar | News18 Bihar
Updated: March 24, 2019, 1:18 PM IST
महागठबंधन और तेजस्वी यादव के फैसले पर बेगूसराय में टिकी गिरिराज सिंह की किस्मत !
गिरिराज सिंह
Amrendra Kumar
Amrendra Kumar | News18 Bihar
Updated: March 24, 2019, 1:18 PM IST
केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह की बीजेपी आलाकमान से नाराजगी काम नहीं आई और अब उन्हें बिहार की बेगूसराय सीट से ही लोकसभा का चुनाव लड़ना होगा. शनिवार को पटना में उम्मीदवारों के नाम ऐलान के साथ ही ये तय हो गया कि वहां मुकाबला अब कन्हैया बनाम गिरिराज ही होगा, ऐसे में बेगूसराय बिहार की हॉट सीट में शुमार हो गया है. वजह साफ है क्योंकि एक तरफ जहां बीजेपी के फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह मैदान में हैं, तो उनके मुकाबले में जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्‍यक्ष और युवा चेहरा कन्‍हैया कुमार.

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कन्हैया कुमार सीपीआई की तरफ से चुनावी मैदान में हैं और करीब एक साल से इस इलाके में अपनी जमीन तैयार कर रहे हैं. बीजेपी के एमपी भोला सिंह के निधन से खाली हुई इस सीट पर मुकाबला संघ बनाम वाम दल भी है क्योंकि इस सीट को लेनिनग्राद भी कहा जाता है. ऐसे में यहां अब इस बात का इंतजार हो रहा है कि महागठबंधन के खाते से कन्हैया को टिकट ने देने वाले तेजस्वी यादव बेगूसराय से अपना उम्मीदवार भी न उतारें. यानी कन्हैया कुमार को वो बाहर से सपोर्ट करें ताकि बेगूसराय सीट को बीजेपी और एनडीए के कब्जे से दूर रखा जाए.

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गिरिराज सिंह अपनी पुरानी सीट नवादा से ही लड़ने के लिए इच्छुक थे लेकिन भोला बाबू के निधन से रिक्त इस सीट से बीजेपी को जिस चेहरे की तलाश थी शायद वो गिरिराज सिंह ही थे. पार्टी ने बेगूसराय में सिंह की छवि और जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए उन पर दांव चला. गिरिराज सिंह की उम्मीदवारी का दूसरा पहलू ये भी है कि कन्हैया और गिरिराज सिंह दोनों ही एक ही जाति (भूमिहार) से आते हैं यानी मुकाबला भूमिहार बनाम भूमिहार ही हो.

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अब ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या कन्हैया कुमार का टिकट काटने वाला महागठबंधन इस सीट से गिरिराज सिंह की हार को तय करने के लिए कन्हैया को बाहर से समर्थन करेगा. अगर इस सीट पर कन्हैया कुमार को समर्थन मिल जाता है तो गिरिराज की मुश्किलें बढ़ सकती है. ऐसा इसलिए भी कि यह सीट और इलाका उनके लिए नया है साथ ही कन्हैया ने इस इलाके में पिछले एक साल का समय दिया है.
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तेजस्वी की बात करें तो वो बिहार में गठबंधन तो चाहते हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर दूसरी ओर वो गिरिराज सिंह जैसे नेता को जीतते भी नहीं देखना चाहते. कुल मिलाकर बेगूसराय सीट से एनडीए, बीजेपी और गिरिराज सिंह की किस्मत का फैसला बहुत हद तक वहां की जनता के साथ-साथ महागठबंधन और तेजस्वी यादव का स्टैंड क्लियर करेगा.

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First published: March 24, 2019, 11:49 AM IST
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