RSS 'जासूसी' मामला: बिहार की सियासत पर हो सकता है ये असर

आनन-फानन में पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस और सीएम नीतीश का जांच के लिए निर्देश दिया जाना इस बात को साबित करता है कि इस प्रकरण ने जेडीयू-बीजेपी गठबंधन के बीच नई खींचतान शुरू कर दी है.

News18 Bihar
Updated: July 22, 2019, 9:42 AM IST
RSS 'जासूसी' मामला: बिहार की सियासत पर हो सकता है ये असर
बिहार के सीएम नीतीश कुमार और गृहमंत्री अमित शाह
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Updated: July 22, 2019, 9:42 AM IST
बिहार में आरएसएस सहित 19 हिंदूवादी संगठनों और उनके सदस्यों से संबंधित सूचनाएं एकत्रित करने के लिए बिहार विशेष शाखा की चिट्ठी पर सियासी घमासान मचा हुआ है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह सीएम नीतीश के आदेश से जारी किया गया था, क्योंकि गृह विभाग उनके जिम्मे है. हालांकि, बुधवार की शाम विशेष शाखा के एडीजी जेएस गंगवार ने सफाई देते हुए कहा इस मामले में पुलिस मुख्यालय, गृह विभाग और सरकार की न तो कोई भूमिका है न कोई आदेश-निर्देश दिया गया था. इसके बाद देर शाम सीएम नीतीश कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लिया और डीजीपी, गृह सचिव, एडीजी (सीआईडी) को तलब किया. मुख्यमंत्री ने अफसरों से पूरे मामले की जानकारी ली. उनको समुचित कार्रवाई करने को कहा.

नीतीश के साथ कांग्रेस-RJD 
दरअसल आनन-फानन में पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस और सीएम नीतीश का जांच के लिए निर्देश दिया जाना इस बात को साबित करता है कि इस प्रकरण ने जेडीयू-बीजेपी गठबंधन के बीच नई खींचतान शुरू कर दी है. बीजेपी इस पर सरकार से जवाब मांग रही है और जेडीयू के नेता मुद्दे से पल्ला झाड़ रहे हैं. वहीं कांग्रेस और आरजेडी ने इस मसले पर नीतीश कुमार का साथ दिया है. जाहिर है नीतीश को कांग्रेस-आरजेडी के समर्थन को एक राजनीतिक संकेत माना जा रहा है.

कयासों का बाजार गर्म

हालांकि इसका बिहार की राजनीति पर दूरगामी असर क्या होगा, यह अभी भविष्य के गर्भ में है, लेकिन प्रदेश में इसको लेकर कयासों का बाजार गर्म है. सवाल ये कि क्या नीतीश कुमार कोई ऐसा कदम उठा सकते हैं जिससे बीजेपी-जेडीयू गठबंधन की सरकार पर कोई खतरा होगा या फिर ये महज राजनीतिक चर्चा का विषय भर है, जिसके चटखारे लिए जा रहे हैं.

आला अधिकारियों की सहमति के बिना संभव नहीं
राजनीतिक जानकारों की मानें तो सत्ता के इस खेल में जेडीयू-बीजेपी के बीच दूर-दूर, पास-पास वाली राजनीति जारी है. वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेल्लारी की मानें तो आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों की जानकारी जुटाना कोई छोटा निर्णय नहीं है. जरूर इसमें आला अधिकारियों और नेताओं की सहमति रही होगी तभी इतने बड़े स्तर पर सूचनाएं एकत्रित करने को कहा गया.
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राजनीति पर फिलहाल कोई असर नहीं
बकौल कन्हैया भेल्लारी हालांकि इसका बिहार की गठबंधन राजनीति पर फिलहाल असर नहीं पड़ने वाला है, लेकिन चुनाव आते-आते बहुत कुछ बदल भी सकता है. आरजेडी और कांग्रेस तो जैसे नीतीश कुमार के लिए बांह फैलाए हुए है, लेकिन जेडीयू की राजनीति को फिलहाल भाजपा का साथ ही सूट कर रही है.

खुद को बड़ा साबित करने की होड़
कन्हैया भेल्लारी कहते हैं कि सीएम नीतीश की दबाव की राजनीति भी हो सकता है. क्योंकि मोदी सरकार- 2 में नीतीश अपने को घायल समझ रहे हैं. उन्हें लगता है कि इतनी बड़ी जीत में उनका बड़ा योगदान है, जबकि भाजपा वालों के दिमाग में है कि यह पीएम मोदी का करिश्मा है.

नीतीश रखते हैं अंदर की तैयारी
वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि फिलहाल सरकार को तो कोई खतरा नहीं दिख रहा है, लेकिन यह भी तय है कि नीतीश कुमार अपने एजेंडे पर काम कर रहे हैं. पहले भी यह देखा गया है कि वह आने वाली राजनीति के लिए अंदर-अंदर अपनी तैयारी पूरी रखते हैं.

चुनाव से पहले दिख सकती है हलचल
बकौल अशोक कुमार शर्मा अभी सरकार इसलिए नहीं गिरेगी क्योंकि वर्तमान में  किसी भी राजनीतिक दल में सरकार बनाने की कूवत नहीं है. हालांकि इतना अनुमान लगाया जा सकता है कि 2020 में होने वाले विधानसभा चुनाव से चार-छह महीने पहले कुछ हलचल जरूर दिख सकती है.

दरअसल इसके पीछे ये वजह है कि नीतीश कुमार की खासियत कहिये या फिर कमी, उन्हें कोई डिक्टेट नहीं कर सकता है. ऐसे में नीतीश कुमार का आरजेडी के साथ दोबारा जाना मुश्किल है. वहीं नीतीश के लिए फिलहाल बीजेपी से अलग होना भी आत्मघाती कदम होगा.

अभी और आएंगे अग्निपरीक्षा के दौर
अशोक शर्मा कहते हैं कि इसके पीछे वजह ये है कि न तो नीतीश के पास और न ही बीजेपी के पास ऐसी स्थिति है कि वह एक दूसरे से अलग होकर सरकार बना सकें. हां, आने वाले समय में कई मौके आएंगे जब संसद में आने वाले समान नागरिक संहिता, धारा 370 और 35 ए जैसे मुद्दों पर दोनों ही दलों को अग्निपरीक्षा के दौर से गुजरना होगा.

ऐसे में बीजेपी और नीतीश की जेडीयू, दोनों ही सैद्धांतिक आधार पर अलग होने की भी तैयारी जारी रखे हुए है. आरएसएस और उससे जुड़े संस्थाओं की जानकारी जुटाना अल्पसंख्यकों के वोट पाने का एक बड़ा हथियार साबित हो सकता है, लेकिन यह आने वाले समय की राजनीति के लिए है न कि अभी के लिए.

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First published: July 18, 2019, 2:25 PM IST
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