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महागठबंधन में दरार! कोऑर्डिनेशन कमिटी की डिमांड पर शांत हुए सहनी आरजेडी के लिए हो गए ‘VIP’

वोट और पद के लिए बिहार में जोड़-तोड़ शुरू (प्रतीकात्मक फोटो)

इस बार मांझी-कुशवाहा के दिल्ली दौरे से विकासशील इनसान पार्टी (VIP) के अध्यक्ष मुकेश सहनी क्यों नदारद रहे. सहनी भी लगातार महागठबंधन में समन्वय की बात उठाते रहे हैं. लेकिन मुकेश सहनी का अब आरजेडी के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर दिख रहा है.

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पटना. लॉकडाउन (Lockdown) से पहले तक दिल्ली (Delhi) में बिहार (Bihar) के विपक्षी महागठबंधन (Grand Alliance) के नेताओं का जमावड़ा लगा रहता था. जीतनराम मांझी (Jitan Ram Manjhi), उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) और मुकेश सहनी (Mukesh Sahani) की तिकड़ी दिल्ली आकर कांग्रेस आलाकमान के सामने महागठबंधन में कोऑर्डिनेशन कमिटी बनाने की गुहार लगा रही थी. शरद यादव (Sharad Yadav) के साथ भी इनकी मुलाकात पटना (Patna) से लेकर दिल्ली तक हुई थी. लेकिन राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की तरफ से दिखाई गई उदासीनता ने इनके सभी मंसूबों पर पानी फेर दिया था. अब लॉकडाउन खत्म होने के बाद एक बार फिर से बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर पटना से दिल्ली तक हलचल शुरू हुई तो मांझी और कुशवाहा एक बार फिर दिल्ली पहुंचे. इस बार दिल्ली पहुंचने पर कांग्रेस आलाकमान के साथ उनकी बात भी हुई. इस मुलाकात के बाद वर्चुअल मीटिंग में आरजेडी समेत घटक दलों के सभी बड़े नेता शामिल हुए. लेकिन, सबके जेहन में एक सवाल बना हुआ था कि इस बार मांझी-कुशवाहा के दिल्ली दौरे से विकासशील इनसान पार्टी (VIP) के अध्यक्ष मुकेश सहनी क्यों नदारद रहे. सहनी भी लगातार महागठबंधन में समन्वय की बात उठाते रहे हैं. लेकिन मुकेश सहनी का अब आरजेडी के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर दिख रहा है.

सूत्रों के मुताबिक, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी की तेजस्वी यादव के साथ सेटिंग हो चुकी है. तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी के बीच पिछले दिनों हुई मुलाकातों के बाद साथ-साथ चुनाव लड़ने पर सहमति हो चुकी है. आरजेडी की तरफ से मिले आश्वासन के बाद ही मुकेश सहनी के तेवर अब नरम दिख रहे हैं. न वे कभी कोऑर्डिनेशन कमिटी बनाने की बात कर रहे हैं और न ही उनकी तरफ से कोई अल्टीमेटम दिया जा रहा है.

आरजेडी की नदी में सन ऑफ मल्लाह की नाव

सूत्रों के मुताबिक, महागठबंधन के सबसे बड़े घटक दल आरजेडी की तरफ से ‘सन ऑफ मल्लाह’ के नाम से मशहूर मुकेश सहनी को विधानसभा चुनाव में उचित प्रतिनिधित्व का भरोसा मिला है. सूत्रों का दावा है कि मुकेश सहनी ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आस्था जताते हुए उन्हें मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार में स्वीकार करने पर सहमति दी है, तो बदले में आरजेडी ने भी मुकेश सहनी को सरकार बनने पर उचित भागीदारी और ‘बेहतर पद’ देने का भरोसा दिया है.

तेजस्वी की तेज नजर सहनी पर

तेजस्वी यादव की नजर में मुकेश सहनी की उपयोगिता ज्यादा दिख रही है. उन्हें लगता है कि सहनी के जरिए निषाद समाज के साथ-साथ अतिपिछड़े वर्ग के वोट बैंक में सेंधमारी की जा सकती है. लिहाजा तेजस्वी ने सहनी को साधने की भरपूर कोशिश की है.

फिलहाल, मुकेश सहनी की पार्टी की तरफ से बिहार के अलग-अलग जिलों में 51 विधानसभा सीटों पर अपनी तैयारी की जा रही है. सहनी जल्द ही अपनी पार्टी की तरफ से ‘मिशन 51’ का ऐलान भी कर सकते हैं. नॉर्थ बिहार में वीआईपी का ज्यादा प्रभाव है. उनकी पार्टी की तरफ से दरभंगा, मुजफ्फरपुर, समस्तपुर, वैशाली और बेगूसराय की सीटों को चिन्हित कर उसपर काम किया जा रहा है. इसके अलवा मुंगेर और कटिहार में भी सहनी की तैयारी चल रही है.

वीआईपी और आरजेडी संग-संग

वीआईपी के सूत्रों का दावा है कि आरजेडी के साथ हमारी बातचीत हो चुकी है और हमें पेट भरने लायक मिलेगा. इसके अलावा डिप्टी सीएम का भी पद हमें दिया जाएगा. न्यूज 18 से बात करते हुए वीआईपी अध्यक्ष मुकेश सहनी कहते हैं, ‘आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव महागठबंधन के सबसे बड़े नेता हैं और आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी है - इसमें कोई दो राय नहीं है. लालू जी जिसे चाहेंगे वह सीएम और डिप्टी सीएम होगा.’ मुकेश सहनी की बातों से साफ है कि उनकी पार्टी का आरजेडी के साथ बेहतर तालमेल हो गया है. लेकिन सीटों के बंटवारे का महागठबंधन का फॉर्मूला अबतक साफ नहीं हो पाया है.

आरएलएसपी को कांग्रेस पर भरोसा

दूसरी तरफ, उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) अभी भी कांग्रेस के साथ मिलकर आरजेडी को साधने की कोशिश कर रही है. कुशवाहा को कांग्रेस पर ही ज्यादा भरोसा है. गौरतलब है कि उनकी पार्टी की तरफ से अबतक मुकेश सहनी की तरह खुलकर तेजस्वी यादव के नाम पर मुहर नहीं लगाई गई है. न्यूज 18 से बात करते हुए आरएलएसपी के प्रधान महासचिव माधव आनंद कहते हैं, ‘कौन कितनी सीट पर लड़े वह मायने नहीं रखता. लेकिन, नीतीश कुमार के कुशासन से मुक्ति के लिए हम हर त्याग करने के लिए तैयार हैं.’ सीटों के बंटवारे पर उन्होंने कहा, ‘इसमें कोई समस्या नहीं होगी.’ उधर, मांझी की नैया किस किनारे लगेगी, इस पर अभी भी संशय बरकरार है. यही वजह है कि मुकेश सहनी ने उपेंद्र कुशवाहा और जीतनराम मांझी से अलग अंदर खाने आरजेडी के साथ समन्वय पर ज्यादा जोर दिया है. लिहाजा, दिल्ली दरबार में हाजिरी लगाने से वे कतरा रहे हैं.

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