'संपूर्ण क्रांति' ने बदल दी थी समाज के प्रवाह की दिशा! आइये हम भी JP को जानें

लोकनायक जयप्रकाश नारायण  (फाइल फोटो)
लोकनायक जयप्रकाश नारायण (फाइल फोटो)

पांच जून, 1974 की विशाल सभा में जयप्रकाश नारायण (Jai Prakash Narayan) ने पहली बार ‘सम्पूर्ण क्रांति’ के दो शब्दों का उच्चारण किया. जेपी ने कहा कि सम्पूर्ण क्रांति में सात क्रांतियां शामिल हैं - राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक व आध्यात्मिक क्रांति. इन सातों क्रांतियों को मिलाकर सम्पूर्ण क्रांति होती है.

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''सम्पूर्ण क्रांति से मेरा तात्पर्य समाज के सबसे अधिक दबे-कुचले व्यक्ति को सत्ता के शिखर पर देखना है.''  5 जून 1974 को जयप्रकाश नारायण (Jai Prakash Narayan) ने संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया था. नारा गूंजा था- 'जात-पात तोड़ दो, तिलक-दहेज छोड़ दो. समाज के प्रवाह को नयी दिशा में मोड़ दो.' इसी संपूर्ण क्रांति के रास्ते बिहार की राजनीति जब आगे बढ़ी तो सूबे ने सामाजिक बदलाव की कहानी भी बुनी. पिछड़ा उभार हुआ और सत्ता-समाज में उपेक्षित तबके की भागीदारी बढ़ने लगी. आज राज्य की सत्ता के शीर्ष पर इसी पिछड़ा उभार के परिणाम से निकले नेता नायक बनकर उभरे हैं.

जयप्रकाश नारायण (Jai Prakash Narayan) को लोग जेपी (JP) भी कहकर पुकारते थे और इनके कई अनुयियों में से कइयों को 'जेपी का चेला' भी कहा जाता था. जेपी के इसी आंदोलन से ऐसे कई नेता निकले जो सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे. कुछ नेता वो थे जिन्होंने सीधे-सीधे जेपी के पीछे आंदोलन का झंडा उठाया, तो कुछ नाम ऐसे भी रहे जो आंदोलन के बाद लगे आपातकाल के कारण चर्चा में आए.

जेपी के नाम से बनी इनकी पहचान
दरअसल जेपी भी यही चाहते थे कि सर्वाधिक दबे-कुचले लोगों को सत्ता के शिखर पर पहुंचे. लालू यादव, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान, रविशंकर प्रसाद और सुशील कुमार मोदी, आज के सारे नेता जेपी के उसी छात्र युवा संघर्ष वाहिनी का हिस्सा थे.
सिताब दियारा में हुआ था जन्म


11 अक्टूबर 1902 को जब बिहार के सारण जिले के सिताबदियारा गांव में जय प्रकाश नारायण का जन्म हुआ था.  1948 मे जेपी और राम मनोहर लोहिया ने कांग्रेस के समाजवादी दल का नेतृत्व किया और बाद में गांधीवादी दल के साथ मिल कर समाजवादी सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना की. 19 अप्रैल, 1954 में गया, बिहार मे उन्होंने विनोबा भावे के सर्वोदय आंदोलन के लिए जीवन समर्पित करने की घोषणा की.

राजनीति छोड़ने का लिया निर्णय
1957 में उन्होंने राजनीति छोड़ने का निर्णय लिया. 1960 के दशक के अंतिम भाग में वे राजनीति में फिर सक्रिय रहे. 1974 में किसानों के बिहार आंदोलन में उन्होंने तत्कालीन राज्य सरकार से इस्तीफे की मांग की. वे इंदिरा गांधी की प्रशासनिक नीतियों के विरुद्ध थे.

संपूर्ण क्रांति का किया आह्वान
पांच जून, 1974 की विशाल सभा में जयप्रकाश नारायण ने पहली बार ‘सम्पूर्ण क्रांति’ के दो शब्दों का उच्चारण किया.  क्रान्ति शब्द नया नहीं था, लेकिन ‘सम्पूर्ण क्रांति’ नया था. जेपी ने कहा कि सम्पूर्ण क्रांति में सात क्रांतियां शामिल हैं - राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक व आध्यात्मिक क्रांति. इन सातों क्रांतियों को मिलाकर सम्पूर्ण क्रांति होती है.

5 जून 1974 को पटना के गांधी मैदान में लोगों को संबोधित करते हुए जयप्रकाश नारायण. (फाइल फोटो)


बंदी बनाए गए जेपी
गिरते स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने बिहार में सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन किया. उनके नेतृत्व में पीपुल्स फ्रंट ने गुजरात राज्य का चुनाव जीता. 1975 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की जिसके अंतर्गत जेपी सहित 600 से भी अधिक विरोधी नेताओं को बंदी बनाया गया और प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई. जेल मे जेपी की तबीयत और भी खराब हुई. 7 माह बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया. 1977 में जेपी के प्रयासों से एकजुट विरोधी पक्ष ने इंदिरा गांधी को चुनाव में हरा दिया.

मरणोपरांत मिला भारत रत्न
जयप्रकाश नारायण का निधन उनके निवास स्थान पटना में 8 अक्टूबर 1979 को हृदय की बीमारी और डायबिटीज के कारण हुआ. उनके सम्मान में तत्कालीन प्रधानमंत्री चरण सिंह ने 7 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की थी, 1956 में जेपी की समाजसेवा के लिए मैगससे अवार्ड से सम्मानित किया गया था. 1999 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया.

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