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जातिगत जनगणना पर बोले भाजपा अध्यक्ष: 2011 वाली गलतियां नहीं दोहराएगी सरकार, राज्य स्वतंत्र

भाजपा के अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने जातिगत जनगणना नहीं करवाने के केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन किया है.

भाजपा के अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने जातिगत जनगणना नहीं करवाने के केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन किया है.

Caste Census Politics:भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि 2011 के जातीय जनगणना में चार लाख 28 हज़ार जातियों का जिक्र किया गया. बड़ी संख्या में लोगों ने इस बात की भी जानकारी नहीं दी कि वह ओबीसी हैं या नहीं. बड़ी संख्या में जाति की जगह लोगों ने गोत्र और टाइटल का जिक्र किया है.

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पटना. देश में जातीय जनगणना (Caste Census) कराने की मांग तेज है. कई दल के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से मुलाकात कर जातीय जनगणना की मांग रखी थी. महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने जातीय जनगणना कराये जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) गई है. बीजेपी की सहयोगी जेडीयू भी जातीय जनगणना की मांग कर रहा है. इस मुद्दे पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar0 बिहार के 10 दलों के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री से मुलाकात कर चुके हैं. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर जातीय जनगणना कराने से से फिलहाल इनकार कर दिया है और कोर्ट से कोई निर्देश नहीं देने की अपील की है. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि पिछड़े वर्गों की जातिगत जनगणना प्रशासनिक रूप से बहुत कठिन और जटिल है. इसके बाद एक बार फिर से बिहार की राजनीति गरमा गई है. विपक्षी दलों ने बीजेपी सरकार को पिछड़ा विरोधी बताया है, वहीं बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल (BJP President Dr Sanjay Jaiswal) ने जातीय जनगणना पर कहा कि केंद्र सरकार 2011 वाली गलती नहीं दोहराना चाहती है.

संजय जायसवाल ने कहा कि 2011 के जातीय जनगणना में चार लाख 28 हज़ार जातियों का जिक्र किया गया. बड़ी संख्या में लोगों ने इस बात की भी जानकारी नहीं दी कि वह ओबीसी हैं या नहीं. बड़ी संख्या में जाति की जगह लोगों ने गोत्र और टाइटल का जिक्र किया है. सरकार का मानना है कि जनगणना का काम चल रहा है और जनगणना के कंप्यूटर में 4 लाख 28 हजार कॉलम नहीं बनाए जा सकते हैं. इसलिए केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया है कि हम जातीय जनगणना नहीं करा सकते हैं.

संजय जायसवाल का कहना है कि केंद्र सरकार 2011 की गलतियां दोहराना उचित नहीं होगा.  1931 में भी जो जनगणना हुई उसमें सिर्फ 24 जातियों की जनगणना हुई थी.  यह कहना गलत है कि 1931 में जातीय जनगणना हुई थी.  केंद्र का निर्णय जनगणना के अनुरूप है, क्योंकि कंप्यूटर राय डाटा में 4 लाख 28 हज़ार खंड नहीं बनाए जा सकते हैं. कर्नाटक और उड़ीसा ने अपने जातीय गणना की है और कोई भी राज्य इसके लिए स्वतंत्र है.  कर्नाटक में गणना कराकर भी आज तक कुछ नहीं किया.

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