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CM नीतीश की ड्रीम योजना में लाखों का घोटाला ! मंत्री के आदेश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

मामला बाढ़ अुमंडल के अथमलगोला प्रखंड के बहादपरपुर पंचायत का है. बहादुरपुर पंचायत में नियमों को ताक पर रखकर बिना जरूरत के एक ही वार्ड में एक से अधिक बोरिंग गाड़े गए.
मामला बाढ़ अुमंडल के अथमलगोला प्रखंड के बहादपरपुर पंचायत का है. बहादुरपुर पंचायत में नियमों को ताक पर रखकर बिना जरूरत के एक ही वार्ड में एक से अधिक बोरिंग गाड़े गए.

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पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने सता में आने के बाद भ्रष्टाचार से समझौता नहीं करने का प्रण किया था, लेकिन उनकी सात निश्चय योजना (Saat nishchay Yojna) ही भ्रष्टाचार से घिरी दिखाई दे रही है. सीएम नीतीश के इस ड्रीम प्रोजेक्ट से संबंधित एक बड़ा घोटाला पटना में आई बाढ़ के दौरान सामने आया. नल जल योजना (Nal Jal Yojna) से संबंधित इस घोटाले को लेकर साल 2018  में ही अथमलगोला थाना में केस दर्ज कर लिया गया था. सरकार के निर्देश पर मामले की जांच भी शुरू हुई, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया.


मंत्री ने दिए थे कार्रवाई के आदेश

आरोप है कि इस मामले से सत्तारूढ़ दल के लोग जुड़े हैं. हैरानी की बात तो यह भी है कि मामले को लेकर पंचायती राज मंत्री ने कार्रवाई के आदेश दिए थे, लेकिन उनका आदेश भी किसी काम का साबित नहीं हुआ.


क्‍या है मामला

मामला बाढ़ अुमंडल के अथमलगोला प्रखंड के बहादपरपुर पंचायत का है. बहादुरपुर पंचायत में नियमों को ताक पर रखकर बिना जरूरत के एक ही वार्ड में एक से अधिक बोरिंग गाड़े गए. चौंकाने वाली बात यह थी कि गाड़े गए बोरिंग की गहराई भी प्राक्कलन (Estimate) के अनुरूप नहीं रखी गई.






डीआरडीए औऱ लोक प्राधिकार भूमि सुधार उपसमाहर्ता ने भी इसकी जांच शुरू कर मामले को सही पाया, लेकिन जांच रिपोर्ट आज तक ठंडे  बस्ते में है. उधर पुलिसिया कारारवाई भी डेढ़ साल से लंबित है.



आरोप यह भी है कि वार्ड नंबर 5 के वार्ड सदस्य राजेश राम को झांसा देकर फर्जी आम सभा का आयोजन कर  बीडीओ, पंचायत सचिव और मुखिया ने 28 लाख रुपये से अधिक ले लिए. मामले को लेकर जब ग्रामीणों ने वार्ड सदस्य के साथ मिलकर पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत से शिकायत की तब केस दर्ज कर लिया गया.


ग्रामीणों की शिकायत है कि मामले में सत्तारूढ़ दल के बड़े नेता आरोपियों को बचाने में लगे हैं. लिहाजा पुलिस से लेकर पंचयाती राज विभाग ने भी मामले पर चुप्पी साध ली है. मामले को लेकर लोकायुक्त निगरानी में शिकायत करने वाले शिकायतकर्ता शशिशेखर सिंह और रामाकांत सिंह का आरोप है कि सतारुढ़ जदयू के नेताओं की शह के कारण ही आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.




मामले की गंभीरता को देखते हुए जब न्यूज 18 की टीम ने पटना के ग्रामीण एसपी कांतेश मिश्र से मामले को लेकर प्रतिक्रिया मांगी लेकिन उन्होंने कैमरे के सामने कोई भी प्रतिक्रिया देने से मना करदिया. हालांकि उन्होंने इस बात को जरूर माना कि यह मामला गंभीर है.




ग्रामीण एसपी  की मानें तो पुलिसिया कार्रवाई इसलिए लंबित है क्योंकि आलाधिकारियों द्वारा आज तक सुपरविजन ही नहीं किया गया.



उधर, पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत की मानें तो अन्य मामलों की तरह इस मामले में भी कार्रवाई की जाएगी. बहरहाल, मंत्री चाहे जो सफाई दें लेकिन स्थानीय ग्रामीण और मामले के शिकायतकर्ताओं की मानें तो मामले में सतारुढ़ दल के नेताओं का दबाव है लिहाजा मंत्री जी की बेबसी और खामोशी ने आरोपियों को अभी तक बचा रखा है.


आरोप है यह भी है कि एक दिग्गज नेता ने मंत्री जी को इस मामले मे कार्रवाई के लिए आगे बढ़ने पर फटकार लगाने के साथ ही धमकी भी दी थी और कार्रवाई न करने की हिदायत दी थी.








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