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बिहार की सियासतः RJD और ओवैसी के खिलाफ BJP ने चला शाहनवाज का राष्ट्रवादी दांव

BJP नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने आज बिहार विधान परिषद के लिए किया नामांकन.
BJP नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने आज बिहार विधान परिषद के लिए किया नामांकन.

Bihar Politics: बिहार के सीमांचल इलाके में कमजोर होती JDU-RJD और AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी के बढ़ते प्रभाव के बीच शाहनवाज हुसैन (Syed Shahnawaz Hussain) जैसे सौम्य और युवा नेता के आने से बिहार में BJP की राजनीति बदलने का अनुमान.

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पटना. बिहार विधान परिषद के चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन (Syed Shahnawaz Hussain) को अपना चेहरा बनाकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राष्ट्रवादी दांव चला है. एक तरफ पार्टी ने जहां राष्ट्रीय जनता दल के परंपरागत वोटबैंक को लक्ष्य बनाया, तो वहीं दूसरी ओर बिहार की राजनीति में तेजी से सक्रिय हो रहे एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM Asaduddin Owaisi) की विचारधारा भी पार्टी के निशाने पर है. आरजेडी और जेडीयू से अलग हुए मुसलमान वोटरों को साधने के लिए बीजेपी ने 'शाहनवाज मास्टरस्ट्रोक' का इस्तेमाल किया है.

कश्मीर में हाल में हुए डीडीसी चुनावों में शाहनवाज हुसैन ने जिस तरह बीजेपी को सफलता दिलाई है, पार्टी ने बिहार की राजनीति में उन्हें लॉन्च कर इसका इनाम दिया है. कश्मीर घाटी में बीजेपी का खाता खुलवाकर शाहनवाज हुसैन ने वह काम किया है, जो भगवा पार्टी पहले कभी नहीं कर पाई थी. यही वजह है कि बिहार में भी बीजेपी ने अब शाहनवाज को अपना चेहरा बनाकर प्रदेश के मुस्लिम तबके तक बड़ा मैसेज पहुंचाने का प्रयास किया है. अब माना जा रहा है कि नीतीश कुमार के प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार (Nitish Kumar Cabinet Expansion) में भी शाहनवाज हुसैन का नाम शामिल किया जा सकता है. इससे पार्टी एक साथ कई सवालों का जवाब दे सकती है. विधानसभा चुनावों में किसी मुसलमान को टिकट ने देने का आरोपों का यह बड़ा जवाब हो सकता है.

शाहनवाज होंगे ओवैसी का जवाब
बीजेपी ने शाहनवाज हुसैन को बिहार की राजनीति में उतारकर मुसलमान वोटरों को साधने का बड़ा दांव खेला है. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने पिछले कुछ वर्षों में सीमांचल में जिस तेजी से अपना प्रभाव बढ़ाया है, उसके मद्देनजर शाहनवाज की बिहार बीजेपी में इंट्री मौजू है. AIMIM ने पहले 2019 के उपचुनाव में किशनगंज सीट पर जीत हासिल की, फिर 2020 के विधानसभा चुनाव में इस इलाके में 5 सीटें जीतकर बढ़ते प्रभाव का संकेत दे दिया. ऐसे में सीमांचल से आने वाले शाहनवाज हुसैन को बिहार की राजनीति में लाकर बीजेपी संभवतः ओवैसी को रोकने का प्रयास कर रही है.
शाहनवाज हुसैन पहले भी किशनगंज से लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं. इस इलाके में उनकी लोकप्रियता बनी हुई है. सीमांचल के इलाके में ऐसे मुसलमानों की बड़ी संख्या है जो पीएम नरेंद्र मोदी के काम से प्रभावित रहे हैं. इसके उलट, ओवैसी सीमांचल में अपने कट्टरपंथ और आक्रामक अंदाज से प्रभाव बनाने में सफल रहे हैं. मगर मुसलमानों का एक बड़ा तबका है जो कट्टरपंथ और आक्रमकता से अलग है. शाहनवाज शुरू से राष्ट्रवादी और बीजेपी का सौम्य चेहरा रहे हैं. शाहनवाज ऐसे सभी मुसलमानों को साधने में सफल हो सकते हैं.



आरजेडी और जेडीयू से  मुसलमानों का टूटा है भ्रम
पिछले कई चुनाव के नतीजे को देखें तो मुसलमानों का गढ़ माने जाने वाले सीमांचल में आरजेडी और जेडीयू की पकड़ कमजोर हुई है. इसी का नतीजा रहा है कि सीमांचल में ओवैसी का प्रभाव बढ़ा. बीजेपी ने शाहनवाज हुसैन को मैदान में उतारकर उन सभी मुसलमान वोटरों को अपने पाले में लाने की कोशिश की है, जो आरजेडी, कांग्रेस और जेडीयू से दूर हुए हैं.

सीमांचल में मुसलमानों की कई बिरादरी के बीच अलगाव भी राजनीति का बड़ा हिस्सा रही है. एक तरफ जहां कई इलाकों में पिछड़ा मुसलमान पसमांदा और अन्य जातियों का प्रभाव है, वहीं कई जिलों में मुसलमानों की उच्च जातियां सैयद, शेख, पठानों की भी बड़ी संख्या है. शाहनवाज हुसैन मुसलमानों के इसी सवर्ण चेहरे की अगुआई करते हैं. वे इन सवर्ण वोटरों को साधने में शहनवाज सफल हो सकते हैं.
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