राम मंदिर भूमि पूजन मुहूर्त पर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने उठाए सवाल तो बिहार के ज्योतिषाचार्यों ने दिया जवाब
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राम मंदिर भूमि पूजन मुहूर्त पर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने उठाए सवाल तो बिहार के ज्योतिषाचार्यों ने दिया जवाब
राम मंदिर के मुहूर्त पर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने बताया अशुभ घड़ी (File Photo)

ज्योतिष शास्त्र केजानकार (Astrologers) कहते हैं कि ये गृहारंभ का दिन है. द्वितीया मूल, सिद्ध योग है और धनिष्ठा और सतभिषा नक्षत्र है. इसी क्षण में भूमि पूजन (Bhoomi Poojan) करेंगे तो इसका प्रभाव बहुत सही होगा.

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  • Last Updated: July 23, 2020, 11:38 AM IST
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पटना. अयोध्या में राम मंदिर (Ram Temple in Ayodhya) निर्माण को लेकर लगभग सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. यह लगभग तय माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पांच अगस्त को मंदिर के लिए भूमि पूजन करेंगे. हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने अभी भी इसकी पुष्टि नहीं की है. इस बीच श्री राम मंदिर के भूमि पूजन के मुहूर्त के समय को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती महाराज (Shankaracharya Swaroopanand Saraswati Maharaj) ने इसपर सवाल खड़े करते हुए  भूमिपूजन के तय समय को अशुभ घड़ी बताया है. उनका कहना है कि यह समय सही नहीं है. हालांकि बिहार के ज्योतिषाचार्यों ने उनके उठाए सवाल का जवाब दिया है और इस मुहूर्त के बारे में विस्तार से बताया है.

'शुभ मुहूर्त में होगा भूमि पूजन'

ज्योतिर्वेद विज्ञान संस्थान के संस्थापक श्री राजनाथ झा कहते हैं कि भाद्र कृष्ण द्वितीया बुधवार सिद्ध योग में भगवान रामलला के मंदिर के लिए भूमि पूजन का योग शुभ मुहूर्त में है. दरअसल धार्मिक मान्यता के अनुसार भादो को शुभ महीना नहीं माना जाता है, परन्तु मुहूर्त का विचार सौर मास (सूर्य की गति के अनुसार) के क्रम से किया जाता है. 16 जुलाई को कर्क राशि में सूर्य का प्रवेश हुआ. जब कर्क राशि में सूर्य का प्रवेश होता है तो सौर क्रम से यह श्रावण मास होता है. सौर मास के अनुसार ही सौर श्रावण के मध्य ये शिला पूजन का मुहूर्त सिद्ध योग में बना है, जो विशेष शुभ एवं कल्याणप्रद है.



'ग्रह-गोचर की स्थिति बिल्कुल सही'
राजनाथ झा कहते हैं कि दरअसल यह भगवान रामलला के गृह का जीर्णोद्धार है इसलिए यह भवन निर्माण के लिए शुभ मुहूर्त है. भाद्र कृष्ण द्वितीया बुधवार तदनुसार दिनांक 5 अगस्त 2020 को होने वाले श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिलान्यास का मुहूर्त ग्रह गोचर के हिसाब से इस तरह से बन रहा है. ज्योतिष शास्त्र में कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि तक को पूर्व पक्ष, यानी शुक्ल पक्ष में ही माना जाता है. अत: कृष्ण पक्ष के पंचमी तक कोई भी शुभ कार्य करने का मुहूर्त पांचांगों में निर्दिष्ट रहते हैं.

'पुण्य फल की प्राप्ति होगी'

पांच अगस्त को द्वितीया बुध, सिद्ध योग है ताकि 16 जुलाई के बाद सूर्य का संक्रमण कर्क राशि में हुआ है जो अगस्त महीने के 16 तारीख मासांत है, अत: इस अवधि को सौर क्रम से श्रावण ही माना जाता है. इसलिए पांच तारीख को होनेवाला श्रीराम जन्मस्थान पर भूमिपूजन का मुहूर्त शुभप्रद है. चूंकि सनातन वैदिक धर्म परंपरा में घर, मंदिर, तीर्थालय, देवालय, नल, तालाब, कूप आदि निर्माण करने की विशिष्ट पुण्यप्रद बातें धर्म शास्त्रकारों ने अपने-अपने ग्रंथों में उद्धृत किए हैं जो जलाशय, मंदिर, वाटिका, गृह बनाने से अनंत पुण्य फल की प्राप्ति होती है.

'विश्व के लिए कल्याणकारी होगा मंदिर निर्माण'

ज्योतिषाचार्य का कहना है कि यह इसलिए भी शुभ फलदायी है कि क्योंकि यहां तो भारत के आदर्श भगवान श्री राम के मंदिर का शिलान्यास एवं भूमि पूजन होने जा रहा है, जो समस्त भारतवर्ष ही नहीं अपितु संपूर्ण विश्व के लिए कल्याणकारी है. परन्तु हमारे शास्त्रकारों ने, आदर्श ऋषियों ने ये भी बताया है कि श्रेयांसि बहुविघ्नानि- अर्थात अगर आप कोई भी अच्छा कर्म करने के लिए प्रवृत्त होंगे तो बहुत ही विघ्न का सामना करना पड़ता है. अत: जहां अच्छा काम होता है वहां बाधाएं भी आती हैं परंतु धर्म एवं सत्य की ही सदा विजय होती है.

'भमि पूजन के लिए सर्वथा शुभ मुहूर्त'

ज्योतिष शास्त्र के बड़े जानकार नंदन संस्कृत विद्यालय, सरिसवपाही, मधुबनी के सहायक प्राध्यापक डॉ. काशीनाथ झा भी कहते हैं कि ये गृहारंभ का दिन है. द्वितीया मूल, सिद्ध योग है और धनिष्ठा और सतभिषा नक्षत्र है, इसी क्षण में शिलान्यास करेंगे तो इसका प्रभाव बहुत सही होगा. ये 9.30 बजे रात्रि तक हो सकता है. वे कहते हैं कि पंचमी तक संक्रांति से पहले है इसलिए यह दिन गृहारंभ यानि भूमि पूजन के लिए सर्वथा उचित है. वे कहते हैं कि फिलहाल तो देवालय बनने के कार्य का प्रारंब हो रहा है. इसके बाद इसमें प्रवेश की तिथि तय होगी, और यह भी शुभ घड़ी को देखकर ही तय किया जाएगा. वे कहते हैं कि इस मामले में भारत के सभी पांचांगों में कहीं भी गतिरोध नहीं है.
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