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Patna Sahib Lok sabha Result 2019, पटना साहिब लोकसभा रिजल्ट 2019: बीजेपी से की थी बगावत, जनता ने शत्रुघ्‍न सिन्‍हा को किया 'खामोश'

फाइल फोटो

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शत्रुघ्न सिन्हा 2009 और 2014 के चुनाव में जीत हासिल कर यहां से दो बार सांसद रहे. लेकिन क्षेत्र में उनकी मौजूदगी बहुत कम दिखी.

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Patna Sahib Lok Sabha Chunav Results 2019: ऐन चुनाव के वक्त कांग्रेस में शामिल होकर पटना साहिब सीट से शत्रुघ्न सिन्हा की तीसरी बार की दावेदारी को जनता ने खारिज कर दिया. यहां से बीजेपी उम्मीदवार रविशंकर प्रसाद ने 'बिहारी बाबू' को 2,84,657 वोटों के बड़े अंतर से पराजित कर दिया.

इन वजहों से पटना साहिब सीट हारे शत्रुघ्न सिन्हा

 -पटना साहिब सीट कायस्थ बहुल सीट है. यहां कायस्थों की आबादी 5 लाख से अधिक है. शत्रुघ्न सिन्हा और रविशंकर प्रसाद दोनों ही कायस्थ जाति से आते हैं. कायस्थ बीजेपी के वोटर्स रहे हैं. ऐसे में उन्होंने अपने स्वजातीय बीजेपी उम्मीदवार रविशंकर प्रसाद को तवज्जो दी.



-रविशंकर प्रसाद को कायस्थ वोटर्स के साथ ही बीजेपी समर्थक सवर्ण वोटर्स और जेडीयू के समर्पित पिछड़े और अतिपिछड़े वोटर्स का साथ मिला. इस सीट पर सवर्णों के 12.21 फीसदी वोट के साथ बनिया समुदाय के 9.41 फीसदी और कुर्मी के 7.95 फीसदी वोटर्स ने रविशंकर प्रसाद के पक्ष में काम किया.
-पटना साहिब सीट के अंतर्गत 6 विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें से 5 सीटों पर बीजेपी के विधायक हैं. सिर्फ फतुहा विधानसभा सीट आरजेडी के पास है. रविशंकर प्रसाद के पक्ष में इस समीकरण ने काम किया. बीजेपी समर्थित इलाकों में कार्यकर्ता वोटर्स को बूथ तक खींचकर लाने में कामयाब रहे.

-शत्रुघ्न सिन्हा 2009 और 2014 के चुनाव में जीत हासिल कर यहां से दो बार सांसद रहे. लेकिन क्षेत्र में उनकी मौजूदगी बहुत कम दिखी. 2014 के चुनाव में भी उनके खिलाफ वोटर्स में नाराजगी थी लेकिन मोदी लहर में वो अपनी सीट बचा ले गए. इस बार बीजेपी का साथ छोड़ने का खामियाजा भुगतना पड़ा.

-रविशंकर प्रसाद को अपनी साफसुथरी-बेदाग छवि वाले नेता होने का लाभ मिला. 2014 के चुनाव में बीजेपी और जेडीयू अलग होकर लड़ी थी. इस बार जेडीयू के साथ आने से भी बीजेपी उम्मीदवार रविशंकर प्रसाद को लाभ मिला.

-रविशंकर प्रसाद ने प्रधानमंत्री मोदी के कामकाज के आधार पर चुनाव लड़ा. लोकसभा चुनाव पीएम कैंडिडेट के फेस पर भी लड़ा जाता है. विपक्ष में बिखराव और विकल्पहीनता का फायदा भी स्थानीय स्तर पर मिला.

-पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे रविशंकर प्रसाद ने टिकट का ऐलान होते ही पटना साहिब में कैंप कर गए. उन्होंने घर-घर जाकर चुनाव प्रचार किया. अग्रेसिव इलेक्शन कैंपेन का भी फायदा मिला.

-दो बार के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का स्टारडम पहले जैसा नहीं रहा है. बीजेपी में रहते हुए पीएम मोदी की नीतियों की लगातार आलोचना किए जाने से उनकी छवि ऐसे असंतुष्ट नेता की बन गई, जो स्वार्थ के लिए अपना स्टैंड बदल रहा हो. नकारात्मकता ने शत्रुघ्न सिन्हा का नुकसान किया.

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