शाजिया कैसर ने यूनिक आइडिया से खड़ा किया कारोबार, मिला सम्मान और कइयों को दे रही हैं रोजगार
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शाजिया कैसर ने यूनिक आइडिया से खड़ा किया कारोबार, मिला सम्मान और कइयों को दे रही हैं रोजगार
शाजिया कैसर ने खोला Shoe Laundry का बिजनेस, बिहार में हो गई मशहूर

शाजिया बताती हैं कि एक समय उनका पढ़ा-लिखा परिवार उनके इस कारोबार के खिलाफ था क्योंकि उन्हें लगता था कि वह मोची का काम कर रही हैं. अपने परिवार के विरोध के बावजूद उन्होंने अपना कारोबार शुरू किया.

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पटना. कहते हैं कुछ लीक से हटकर करेंगे तभी नाम होगा. बिहार के भागलपुर की शाजिया कैसर ने कुछ ऐसा ही सोचा और कुछ खास, कुछ नया करने का ठान लिया. करीब साढ़े पांच साल पहले एक ऐसा बिजनेस शुरू किया, जो पारंपरिक रूप से हमारे यहां होता रहा है, लेकिन कभी महिलाओं को इस क्षेत्र में नहीं देखा गया था. शाजिया ने हिम्मत की और  मोचियों से जुड़े इस कारोबार को उन्होंने शिद्दत से अपना लिया और शू लॉंड्री (Shoe Laundry) का बिजनेस शुरू कर दिया.

जैसे कपड़ों की लॉन्ड्री होती है, वैसा ही जूतोंं की. मोचियों की तरह ही शाजिया की शू लॉन्ड्री में जूतों की मरम्‍मत, साफ सफाई और पॉलिस का काम होता है. Shoe Laundry नाम भी अपने आप में एक खास बन जाता है. जाहिर है उनका ये अनोखा और यूनिक आइडिया ही उनकी सफलता की कहानी है.

शाजिया बताती हैं कि एक समय उनका पढ़ा-लिखा परिवार उनके इस कारोबार के खिलाफ था क्योंकि उन्हें लगता था कि वह मोची का काम कर रही हैं. अपने परिवार के विरोध के बावजूद उन्होंने अपना कारोबार शुरू किया और रिवाइवल नाम से शू-लॉन्ड्री स्टोर पटना में खोला. अच्छा रिस्पांस मिला और देखते हुए कारोबार फैलने लगा.



आर्टिकल से मिला आइडिया



गौरतलब है कि 37 साल की शाजिया कैसर ने फिजियोथेरेपी में ग्रेजुएशन और हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट में मास्टर्स किया है. वह वर्ल्ड हेल्थ ऑर्ग्नाइजेशन और यूनिसेफ में काम कर चुकी हैं. उन्होंने एक मैगजीन में शू लॉन्ड्री पर एक आर्टिकल पढ़ा और उन्हें ये आइडिया काफी पसंद आया. उन्होंने बिहार में शू लॉन्ड्री खोलने का प्लान किया.

यूनिक सर्विस की थी दरकार
शाजिया बताती हैं कि जॉब के दौरान वह अपने बिजनेस का रिसर्च वर्क करती रहीं. इस दौरान वह भूटान, पुणे, मुंबई, चेन्नई भी गईं और वहां उन्होंने शू लॉन्ड्री की ट्रेनिंग ली. वह हर एक शहर में ऐसे आइडिया या सर्विस को ढूंढ रही थी, लेकिन उन्हें ऐसा कोई नहीं मिला, जो ये सर्विस दे रहा हो.

आइडिया के खिलाफ था परिवार
शाजिया बताती हैं कि उन्होंने शुरुआत में डस्टबिन से जूतों को लेकर ठीक किया. वह पहले फेंके हुए जूतों को ठीक करके बेचती थी जो उनके परिवार को पसंद नहीं आया. दरअसल उन्हें लगता था कि वह मोची का काम कर रही हैं. उन्होंने बाद में शू लॉन्ड्री खोली तो भी उनकी फैमिली उनके खिलाफ हो गई. लेकिन, तब भी उन्होंने अपने आइडिया को नहीं छोड़ा.

अपने शू लॉंड्री में शाजिया कैसर


पटना में खोली पहली शू लॉंड्री
साल 2014 में खोला पहला स्टोर इस बार उनके पति ने उनका साथ दिया और उन्होंने अपना पहला शू-लॉन्ड्री आउटलेट पटना के अल्पना मार्केट में खोला. साल 2014 में उन्होंने अपना स्टार्टअप रिवाईवल शू-लॉन्ड्री शुरू किया. वह जूतों की रिपेयरिंग, सफाई और ठीक करने काम करती हैं. वह यह काम न सिर्फ जूतों बल्कि लेदर आइटम के लिए भी करती हैं.

वर्ष 2016 के बेस्ट स्टार्टअप के लिए सम्मानित की गई थीं शाजिया कैसर


पहले हुआ नुकसान, फिर मिला सम्मान
ये अब रिवाइवल सर्विस के नाम से फेमस है. बता दें कि उन्होंने अपनी शुरुआती सेविंग 1 लाख रुपए से अपने बिजनेस की शुरुआत की. शुरू के 2 सालों में सिर्फ नुकसान हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.  उन्हें अपने लिए कर्मचारी ढूंढने में दिक्कतें आईं. उन्होंने 50 लोगों को अप्रोच किया, लेकिन सिर्फ 3 ही उनके साथ काम करने के लिए तैयार हुए क्योंकि कोई भी ये जॉब स्टेटस नहीं चाहता था.

अब वह अपनी वर्कशॉप पर महिलाओं को ट्रेनिंग देने लगी. उन्हें नौकरी पर रखने लगी. चुना उन्हें वर्ष 2016 में बिहार में बेस्ट स्टार्टअप के लिए भी चुना गया था.
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