News 18 'E एजेंडा बिहार': फिल्म उद्योग में नेक्सस पर बात होनी चाहिए- शेखर सुमन

न्यूज 18 के कार्यक्रम में शेखर सुमन, मनोज तिवारी और अक्षरा सिंह
न्यूज 18 के कार्यक्रम में शेखर सुमन, मनोज तिवारी और अक्षरा सिंह

मनोज तिवारी (Manoj Tiwari) ने कहा कि बॉलीवुड में नेपोटिज्म और गुटबंदी दोनों चल रही है. इस नेक्सस के खिलाफ आवाज उठी है तो उसे हम दबने नहीं देंगे.

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पटना. बिहार विधानसभा के चुनाव (Bihar Assembly Elections) की तैयारियां शुरू हैं. जाहिर है सभी राजनीतिक दलों ने  अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. इस कड़ी में देश के सबसे बड़े न्यूज़ नेटवर्क न्यूज़ 18 की ओर से भी चुनावी चर्चा के तहत एजेंडा बिहार कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. पहली बार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हो रहे इस कार्यक्रम में बिहार के सत्ता और विपक्ष के नेता अपनी राय रख रहे हैं. हालांकि हमने इसमें एक अन्य समसामयिक विषय पर भी चर्चा की जिसने हर देशवासी को झकझोर दिया है. बिहारी माटी के सपूत सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या का मामला ऐसा ही मुद्दा है जिसने भारतीय फिल्म जगत में नेक्सस और नेपोटिज्म पर नई बहस छेड़ दी है. इसी सिलसिले में बिहार से ताल्लुक रखने वाले सिने कलाकारों, जो राजनीति से भी जुड़े हुए हैं उनसे चर्चा की गई. इसमें न्यूज 18 के साथ प्रसिद्ध अभिनेता व नेता शेखर सुमन और मनोज तिवारी के साथ फिल्म अभिनेत्री अक्षरा सिंह भी जुड़ीं.

शेखर सुमन ने कहा के बॉलीवुड के नेक्सस के लोग बदलते रहते हैं. मेरा बेटा अध्ययन सुमन भी बॉलीवुड के इस नेक्सस और गुटबंदी का शिकार हुआ. इस बात को मैं, मेरे बेटे और मेरी पत्नी ने भी उठाई लेकिन हमें ट्रोल करने की कोशिश की जा रही है. शेखर सुमन ने कहा कि एक पिता ने बेटे को खोया है, उस बेटे ने जिसने 16 की उम्र में अपनी मां को खोया पर वे विचलित नहीं हुए. वो पूरे बिहार के लिए गर्व थे. सुशांत की मौत से सबक लेने की जरूरत है. जीवन का दूसरा नाम संघर्ष है. नेपोटिज्म शब्द का चलन ही गलत है. फिल्म उद्योग में नेक्सस पर बात होनी चाहिए. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सुशांत की मौत के खिलाफ उठी आवाज दबनी और धीमी नहीं होनी चाहिए.

इसी प्लेटफॉर्म से मनोज तिवारी ने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत ने छोटे मौकों को भुनाया और सुपर स्टार बनें. मेरे साथ-साथ बीजेपी के कई सांसद इस बात को उठा रहे हैं ताकि बिहार के इस चमकते सितारे को न्याय मिल सके और लोग तह तक जाकर सच्चाई जान सकें. उन्होंने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत के साथ हुई घटना ने इस देश से कई सवाल पूछे हैं. 10वीं में मां को खोने पर भी सुशांत विचलित नहीं हुए थे. सुशांत सिंह आत्महत्या की हो उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए.



मनोज तिवारी ने कहा कि बॉलीवुड में नेपोटिज्म और गुटबंदी दोनों चल रही है. इस नेक्सस के खिलाफ आवाज उठी है तो उसे हम दबने नहीं देंगे. इसके खिलाफ आवाज हर क्षेत्र से जुड़े लोग उठा रहे हैं. मनोज वाजपेयी और शेखर सुमन जैसे लोगों को नेक्सस के कारण ही वो प्रसिद्धि या सम्मान नहीं मिल सकी है.इस मौके पर अक्षरा सिंह ने कहा कि मैं भी भोजपुरी फिल्म में इस नेक्सस का शिकार हुई हूं. लोग चाटुकारिता करनेवालों को ही काम दिलवाते हैं. भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री भी इससे अछूता नहीं है.
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