खुफिया एजेंसियों के 'रडार' पर आखिर क्यों है बिहार का सीमांचल इलाका ?

Neel kamal | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: September 16, 2017, 5:27 PM IST
खुफिया एजेंसियों के 'रडार' पर आखिर क्यों है बिहार का सीमांचल इलाका ?
आतंकी तौसीफ
Neel kamal | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: September 16, 2017, 5:27 PM IST
क्या बिहार की धरती को आतंकवादी पनाहगार के रूप में इस्तेमाल करने लगे हैं? क्या बिहार में बैठकर आतंकी चुपचाप किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए स्लीपर सेल तैयार कर रहे हैं?

गया में अलकायदा के आतंकी तौसीफ की गिरफ्तारी के बाद ये सवाल एक बार फिर से उठने लगा है. गया में अलकायदा का आतंकी ना सिर्फ शिक्षक बन कर छिपा था बल्कि इंटरनेट के जरिये लगातार किसी के संपर्क में भी था.

देश के विभिन्न जगहों पर हुए आतंकी घटनाओं का संबंध बिहार के सीमांचल से होने की खबर को लेकर यह इलाका जांच एजेंसियों के रडार पर है. हालाकि अहमदाबाद बलास्ट में संलिप्त अलकायदा का आतंकवादी संयोगवश गया में पकड़ा गया लेकिन अब सवाल उठता है कि नौ साल में बिहार में नाम बदल कर शिक्षक के रूप में रहने वाले तौफीक और उसके दूसरे साथी ने नौ साल में क्या किया ?

सवाल यह भी उठता है कि क्या बिहार आतंकियों के लिए पनाह स्थल बन चुका है, क्योंकि गया मामले के पहले की बात करे तो यासीन भटकल, इशरत जहां, आतंकवादी मदनी और हाल में हुए कानपुर के पास रेल दुर्घटना मामले में भी बिहार का आतंकी कनेक्शन सामने आया था.

बोधगया ब्लास्ट के साथ पटना के गांधी मैदान में सीरियल ब्लास्ट में जिस प्रकार स्लीपर सेल का इस्तेमाल किया गया यह बताने की जरूरत नहीं कि बिहार की धरती का आतंकवादी किस तरह से उपयोग कर रहे हैं.

गया में अलकायदा के आतंकी के पकड़े जाने के बाद बिहार पुलिस के साथ-साथ रेल पुलिस भी अलर्ट मोड में आ गयी है. राज्य के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर आलोक राज बताते हैं कि फिलहाल पुलिस तौसीफ के 9 सालों का रिकॉर्ड खंगाल रही है साथ ही आतंकी संगठनों के स्लीपर सेल पर भी नजर रख रही है ताकि तौसीफ की तरह फिर से कोई आतंकी बिहार में आसानी से पनाह न ले सके.

गौरतलब है कि 27 अक्टूबर 2013 में पटना जंक्शन पर ही पहला ब्लास्ट हुआ था लिहाजा रेल पुलिस ने बिना देरी किये ही रेल थानों को आवश्यक निर्देश जारी किया है.
First published: September 16, 2017
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