बिहार: मोदी मंत्रिपरिषद में 'भागीदारी' के सवाल का 2020 चुनाव में क्या होगा असर ?
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बिहार: मोदी मंत्रिपरिषद में 'भागीदारी' के सवाल का 2020 चुनाव में क्या होगा असर ?
फाइल फोटो

बीजेपी नेता कह रहे हैं कि पिछली बार बिहार से 9 में से 5 सवर्ण मंत्री थे. इसबार तो घटकर यह संख्या महज चार रह गई है. आने वाले समय में महादलित और अतिपिछड़े कोटे से मंत्री बनाए जाएंगे.

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बिहार में 2020 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इस चुनाव को देखते हुए सभी पार्टियों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है. माना जा रहा है कि टीम मोदी में शामिल होने वाले बिहार के मंत्रियों की सूची बनी है. हालांकि जातीय समीकरणों के लिहाज से देखें तो स्पष्ट दिखता है कि बिहार के मामले में सवर्णों को साधने की कोशिश की गई है. हालांकि एक दलित और एक पिछड़े समुदाय को भी मंत्री पद दिया गया है, लेकिन सवाल उठ रहा है कि इस तरह की भागीदारी का आने वाले चुनाव पर क्या असर पड़ेगा?

मोदी सरकार में शपथ लेने वाले 6 मंत्रियों में से चार सवर्ण समाज के हैं और वो भी अलग-अलग बिरादरी के हैं. कैबिनेट मंत्री का दर्जा पाने वाले रविशंकर प्रसाद सिन्हा जहां कायस्थ जाति से हैं, वहीं गिरिराज सिंह भूमिहार जाति से हैं. कैबिनेट राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार की कुर्सी पाने वाले आरके सिंह जहां राजपूत बिरादरी से आते हैं, वहीं सरकार में दोबारा राज्य मंत्री बनने वाले अश्विनी चौबे भी ब्राह्मण बिरादरी से हैं.

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एलजेपी सुप्रीमो रामविलास पासवान जहां दलित बिरादरी से आते हैं, वहीं पहली बार केंद्र में मंत्री बनने वाले नित्यानंद राय भी यादव बिरादरी से आते हैं. मोदी कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या अभी और बढ़ सकती है. BJP के नेताओं का कहना है कि दरअसल एनडीए समूह के तौर पर है और जेडीयू से नाम आने वाला था जो गैर यादव पिछड़ी जातियों या अति पिछड़ी जातियों से होते, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है.
हालांकि बीजेपी नेता कह रहे हैं कि पिछली बार बिहार से 9 में से 5 सवर्ण मंत्री थे. इसबार तो घटकर यह संख्या महज चार रह गई है. आने वाले समय में महादलित और अतिपिछड़े कोटे से मंत्री बनाए जाएंगे. हालांकि बीजेपी के नेता ऑफ द रिकॉर्ड यह बात भी कहते हैं कि जैसा जातिगत समीकरण बिहार में बना है इसके तहत 2020 के चुनाव में जाना मुश्किल भरा हो सकता है.

हालांकि बीजेपी नेताओं को भीसारी उम्मीदें इस बात पर टिकी हैं कि जेडीयू से चल रही खींचतान जल्द खत्म हो और  कैबिनेट के अगले विस्तार में उन जातियों के सांसदों को मौका मिले जिन्होंने 40 में से 39 सीटें जितवाने में बड़ी भूमिका निभाई.

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