Solar Eclipse 2020: साल का पहला सूर्यग्रहण शुरू, जानें क्या करें और क्या नहीं
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Solar Eclipse 2020: साल का पहला सूर्यग्रहण शुरू, जानें क्या करें और क्या नहीं
देश भर में कुछ देर बाद दिखने लगेगा सूर्यग्रहण का असर

भारत में सूर्यग्रहण 3 घंटे 48 मिनट तक रहेगा. भारत में यह 10:20 बजे से होगा जो पूर्ण ग्रहण काल का दृश्य 1 :49 बजे तक रहेगा और मध्यकाल 12:02 तक रहेगा.

  • Last Updated: June 21, 2020, 10:20 AM IST
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पटना. साल 2020 का पहला सूर्यग्रहण (Solar Eclipse) थोड़ी देर में शुरू होने वाला है. कहा जा रहा है कि यह पूर्ण सूर्यग्रहण है. धार्मिक दृष्टि से यह सूर्य ग्रहण काफी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह चंद्रग्रहण के ठीक 16 दिन बाद पड़ रहा है. सूर्यग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले से ही शुरू हो चुका है. आचार्य शैलेश तिवारी बताते हैं कि यह ग्रहण निश्चित तौर पर बहुत ही महत्वपूर्ण है. क्योंकि यह ग्रहण ना केवल सिर्फ  सूर्यग्रहण है, बल्कि 1 महीने में पड़ने वाले दो ग्रहण यानी कि 5 जून का जो चंद्रग्रहण हुआ है. इसके बाद 21 जून को सूर्य ग्रहण पड़ना एक महीने में दो ग्रहण पड़ना.

ये कहीं ना कहीं देश-विदेश में प्राकृतिक रूप से आपदाएं लाने वाला होता है. ये ग्रहण एक तरह से सीमा विवाद को पैदा करता है. इसका दुष्परिणाम है कि सीमा विवाद होता है. पूरे विश्व में जहां-जहां ग्रहण पड़ेगा सीमा विवाद का मसला रहेगा. चाहे वह एशिया का मसला हो, यूरोप, अरब कंट्री का मामला हो, चाहे आप देखें चाइना- भारत, चाइना- वियतनाम, भारत- नेपाल, भारत- पाकिस्तान, भारत - भूटान इस प्रकार का जो विवाद जो है यह ग्रहण का प्रकोप है.

सूर्यग्रहण अग्नि और भूकम्प का प्रतीक



जब चंद्रग्रहण होता है तो जल से संबंधित परेशानी आती है और जब सूर्यग्रहण होता है तो भूकंप और अग्नि से संबंधित परेशानी होती है तो देखा जा रहा है कि कही ज्वार भाटा, कहीं ज्वालामुखी. इस प्रकार की आपदाएं निश्चित तौर पर सूर्यग्रहण आने से पहले आने के बाद तक होता है. भारत में 3 घंटे 48 मिनट तक रहेगा. ग्रहण भारत में 10:20 बजे से होगा जो पूर्ण ग्रहण काल का दृश्य 1 :49 बजे तक रहेगा और मध्यकाल 12:02 तक रहेगा.
क्या करना है, क्या नहीं करना है 

इसमें सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी है गर्भवती महिलाओं को. गर्भवती महिलाओं को नाखून नहीं काटने हैं, कपड़ा नहीं काटना है, अन्न-जल नहीं लेना है. घर से बाहर निकलकर सूर्य नहीं देखना है. यात्रा नहीं करनी है. ग्रहण काल में आइसोलेशन पीरियड होना चाहिए.

साइंस के लिहाज से विशेष है ग्रहण

इसका पूरा-पूरा दुष्प्रभाव दुनिया को मिलेगा. जबकि इसका अच्छे प्रभाव होंगे. इसमें कुछ विज्ञान टेक्नोलॉजी संबंधित कुछ विशेष रिसर्च होंगे. जिससे मानव जाति पर पड़ने वाले प्रभाव का नाश होगा और आने वाले समय में मेडिकल साइंस में उपलब्धि मानी जाएगी.

ग्रहण काल में मन्त्रों का जप करें

इस काल में आपको बता ही दिया क्या हानि होगी. क्या करना है क्या नहीं करना है इसके बारे में बताता हूं. इस ग्रहण काल में ज्यादा से ज्यादा मंत्रों का जप करना है. आपको भगवान विष्णु के मंत्र 'ओम भगवते वासुदेवाय नमः' भगवान शिव का मंत्र 'ओम नमः शिवाय' का जप करना है. शत्रुहन्ता मंत्र का जप करना है. महालक्ष्मी का मंत्र का जप करना है.

स्नान कर दान करें

ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान का विशेष महत्व है. ग्रहण समाप्ति के बाद आपको अपने घर में ही स्नान करना है. नदियों का जल आपके बाल्टी में डालकर या गंगा जल डालकर स्नान करना है. स्नान करने के बाद आपको दान की विशेषता है. आपको दान करना है. ग्रहण काल में आप को भोजन नहीं करना है. ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और दान का विशेष महत्व होता है. खिचड़ी और खीर बनाकर कि गरीबों को दान कर सकते हैं. इसके साथ साथ ब्राह्मण को वस्त्र दान कर सकते हैं. चांडाल को अन्न दान कर सकते हैं और कंबल दान भी गरीबों को किया जाता है.

घर पर रहकर ही पूजा दान करें

ग्रहण काल के बाद देव पूजन का विशेष महत्व है या यज्ञ स्थान साधना का विशेष महत्व है. और जब ग्रहण सूतक काल लगेगा सारे मंदिर पट बंद हो जाएंगे. ग्रहण काल में भी मंदिर के पट बंद रहेंगे और ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिरों को गंगाजल से धोकर के और गौमूत्र छिड़काव करके इसके बाद मंदिरों को खोला जाएगा. उसके बाद पूजा की जाएगी. अभी का जो समय है वह पूरे दुनिया में महामारी फैली हुई है. घर में रहकर ही पूजा दान करें.

कोई नया व्यापार नहीं करना चाहिए

इस ग्रहण काल को पूरी तरह से साधना काल में परिवर्तित करें. अगर आप साधना काल में परिवर्तित करेंगे तो ग्रहण आपके अनुकूल होगा. अगर आप व्यर्थ चीजों में उपयोग करेंगे प्रतिकूल हो जाएगा. ग्रहण काल में नए व्यापार की शुरुआत नहीं करनी चाहिए. लेन-देन की बात नहीं करना चाहिए. शयन नहीं करना चाहिए, मैथुन नहीं करना चाहिए. इसके साथ-साथ ग्रहण काल में लड़ाइयां नहीं करनी चाहिए. आपसी रंजिश नहीं करना चाहिए. ग्रहण काल में नई यात्रा की शुरुआत भी नहीं करनी चाहिए. घर में रहकर देव साधना करना चाहिए.
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