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UP Elections: बिहार के 'सन ऑफ मल्लाह' ने यूपी में दिखाया दम! अखबारों में दिया फुल पेज का विज्ञापन

JDU के बाद अब मुकेश सहनी भी यूपी चुनाव में ताल ठोंकने को तैयार (File Photo)

UP Politics: यूपी के सीएम  योगी आदित्यनाथ की कोशिश है कि भाजपा समर्थक पार्टियों व जातियों में बिखराव न हो. माना जा रहा है कि आने वाले समय में मुकेश सहनी को मनाने की भी कोशिश की जा सकती है कि वह NDA के साथ होकर चुनाव लड़ें.

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    पटना/लखनऊ. विकासशील इंसान पार्टी (VIP) ने यूपी चुनाव में अपना दम दिखाने का निर्णय कर लिया है. इसी क्रम में पार्टी के मुखिया मुकेश सहनी (Mukesh Sahni) लखनऊ में कैम्प कर रहे हैं. बिहार की एनडीए सरकार (Bihar NDA Government) में शामिल वीआईपी का यूपी में अलग राह पर चलना सियासी नजर से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सहनी ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के लगभग सभी बड़े अखबारों में फुल पेज विज्ञापन भी दिया है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो उत्तर प्रदेश के सारे बड़े अखबारों में मुकेश सहनी की तस्वीर और उनकी पार्टी का विज्ञापन छपना इस बात का संदेश दे रहा है कि वो अब बिहार की तरह ही यूपी में भी पूरी तरह सक्रिय होंगे.

    हालांकि, सीधे तौर पर देखें तो मुकेश सहनी का यूं यूपी चुनाव में सक्रिय होने के बारे में यही कहा जाता है कि वह अपने समाज (निषाद जाति) को आरक्षण दिलवाने के लिए दिल्ली जाना चाहते हैं और उनके अनुसार दिल्ली का रास्ता यूपी-बिहार होकर जाता है. हालांकि, इसके पीछे वास्तविक सियासी गणित क्या है यह तो आने वाले समय में पता चलेगा, क्योंकि योगी आदित्यनाथ के सामने निषाद वोटरों को अपने साथ जोड़कर रखे रहना भी बड़ी चुनौती मानी जा रही है.

    बता दें कि मुकेश सहनी से पहले बिहार के सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने भी यूपी चुनाव में ताल ठोकने की घोषणा की है. यूपी चुनाव को लेकर जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में हम पहले भी एनडीए का हिस्सा रहे हैं. वहां हमारे, विधायक, सांसद और मंत्री रहे हैं. साल 2017 के चुनाव में भी हम पूरी तरह से तैयार थे, लेकिन पार्टी में सर्वसहमति के बाद हमने न लड़ने का निर्णय लिया, जिसका फायदा बीजेपी को मिला.

    त्यागी ने कहा कि मैंने योगी आदित्यनाथ से बात की है. उनसे कहा कि नीतीश कुमार की पिछड़े समाज में लोकप्रियता का इस्तेमाल यूपी में भी किया जा सकता है. केसी त्यागी ने कहा कि हमारी पार्टी ने अब विस्तार का फैसला किया है. अगर उत्तर प्रदेश में बीजेपी से बात नहीं बनती है तो हम अकेले चुनाव में जा सकते हैं. बिहार में एनडीए का हिस्सा रहते हुए हम पहले भी पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे राज्यों में बीजेपी से अलग चुनाव लड़ चुके हैं.

    गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा के चुनाव संभावित हैं. वहीं, जातीय समीकरण के लिहाज से मुकेश सहनी की निषाद (मल्लाह) जाति किसी भी दल के जीत हार के लिए बड़ी जिम्मेदार होती है. ऐसे ही सीएम नीतीश कुमार कुर्मी जाति से आते हैं, जिसका पूर्वांचल के इलाके में अच्छी-खासी आबादी है. जीत-हार का समीकरण बनाने और बिगाड़ने की क्षमता रखने वाली कुर्मी जाति का प्रभाव करीब 100 सीटों पर माना जाता है.

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