सोनिया गांधी ने शक्ति सिंह गोहिल को फिर सौंपी बिहार कांग्रेस की कमान, जानें क्या हैं चुनौतियां

News18 Bihar
Updated: September 5, 2019, 8:49 AM IST
सोनिया गांधी ने शक्ति सिंह गोहिल को फिर सौंपी बिहार कांग्रेस की कमान, जानें क्या हैं चुनौतियां
सोनिया गांधी ने शक्ति सिंह गोहिल को फिर से बिहार कांग्रेस का प्रभारी बनाया है. (फाइल फोटो)

बीते दो दशक से कांग्रेस बिहार में आरजेडी के भरोसे ही अपनी राजनीति करती रही है, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन की हार के बाद आरजेडी का कद कुछ कम हुआ है.

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पटना. कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने कांग्रेस (Congress) के वरीय नेता एवं बिहार के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल (shakti singh gohil) का इस्तीफा नामंजूर कर दिया और बिहार प्रभारी के रूप में फिर से अपना काम फिर शुरू कर देने का निर्देश दिया. उन्हें फिर से प्रदेश में ही रहने को कहा गया है और पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. बता दें कि गोहिल ने लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) में हार के बाद इसकी जिम्‍मेवारी लेते हुए इस्‍तीफा दे दिया था.

कांग्रेस नेताओं ने दी शुभकामनाएं
गोहिल को फिर से बिहार की कमान दिए जाने के बाद पार्टी नेताओं ने स्‍वागत किया है और सोनिया गांधी को बधाई दी है. कांग्रेस नेता प्रेमचंद्र मिश्रा, राजेश राठौर, जया झा, एचके वर्मा समेत कई नेताओं ने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनके अनुभवों का लाभ बिहार को मिलेगा. पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वे इस सप्ताह के अंत तक बिहार आ सकते हैं.

ढेरों चुनौतियां हैं राह में...

अगले साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर गोहिल के सामने कई कठिन चुनौतियां भी हैं. दरअसल बीते दो दशक से बिहार में कांग्रेस आरजेडी के भरोसे ही अपनी राजनीति करती रही है. अब जब लोकसभा चुनाव में महागठबंधन की हार के बाद आरजेडी का कद कम हुआ है, तब गोहिल के सामने कांग्रेस को एक बार फिर बिहार में कांग्रेस को आगे ले जाने की जिम्मेदारी मिली है.

संगठन में एकजुटता जरूरी
बीते वर्षों में ऐसा देखा गया है कि कांग्रेस का संगठन उत्तरोत्तर कमजोर होता गया है. गुटबाजी और खेमेबाजी ने पार्टी का बेड़ा गर्क कर दिया है. जिस तरीके से विपरीत हालात में भी कांग्रेस ने राजस्थान और मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने एकजुटता दिखाई और सत्ता में वापसी की, ऐसा बिहार में भी करने की जरूरत बताई जाती है.
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आरजेडी की बैशाखी को छोड़ने की बारी!
सदानंद सिंह जैसे बिहार कांग्रेस के कई नेताओं ने सूबे में कांग्रेस को अकेले लड़ाई लड़ने की बात बार-बार दोहराई है. इसी लाइन पर पार्टी के कई अन्य नेता भी सोचते हैं. जाहिर है पार्टी आरजेडी की छत्रछाया से बाहर निकलना चाहती है. हालांकि अब तक पार्टी में सिर्फ बात ही उठाई जाती है, लेकिन आरजेडी से अलग होने के संकेत नहीं हैं. जाहिर है कांग्रेस अपने बूते खड़ी होगी या नहीं यह भविष्य के गर्भ में ही है.

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First published: September 5, 2019, 8:20 AM IST
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