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सोनिया गांधी ने लगाई मुहर, पर लालू यादव क्यों नहीं चाहते कन्हैया कुमार व तेजस्वी यादव हों आमने-सामने?

बिहार विधानसभा उपचुनाव के लिए कन्हैया कुमार के  
कांग्रेस स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल होने के बाद से ही तेजस्वी यादव से आमना-सामना होने की चर्चा तेज है.

बिहार विधानसभा उपचुनाव के लिए कन्हैया कुमार के कांग्रेस स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल होने के बाद से ही तेजस्वी यादव से आमना-सामना होने की चर्चा तेज है.

Congress-RJD Clash: सियासत के जानकारों की नजर में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव तेजस्वी यादव के सामने कन्हैया कुमार को एक बड़ी चुनौती मानते हैं. यही कारण है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सीपीआई महागठबंधन का हिस्सा थी, और पार्टी ने कन्हैया कुमार को बेगूसराय से अपना उम्मीदवार बनाया था, तो भी आरजेडी ने कन्हैया कुमार के खिलाफ तनवीर हसन को अपना उम्मीदवार उतार दिया.

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पटना. कांग्रेस के बिहार विधानसभा उपचुनाव के लिए अपने स्टार प्रचारकों की सूची अब तय हो गया है कि कन्हैया कुमार और तेजस्वी यादव एक दूसरे के सामने होंगे. यानी बिहार की जनता हो जल्द ही दो युवा नेताओं की टक्कर दिखने वाली है. कांग्रेस ने जिन चेहरों को स्टार प्रचारक के तौर पर चुनाव उतारा है उनमें सबसे ऊपर लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार हैं. साथ ही पूर्व सांसद व सिने स्टार शत्रुघ्न सिन्हा को भी स्टार प्रचारक बनाया गया है. इनके साथ ही तारिक अनवर, भक्त चरण दास, मदन मोहन झा, अजीत शर्मा निखिल कुमार, सांसद अखिलेश सिंह, डॉ अनिल शर्मा जैसे भी कई बड़े चेहरे हैं जो दोनों सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवारों के लिए बिहार में वोट मांगेंगे. हालांकि सबसे अधिक गहगमागहमी कन्हैया कुमार के नाम को लेकर है.

सियासत के जानकारों की मानें तो कन्हैया कुमार के मन में एक कसक रह गई कि 2020 के चुनाव में प्रचार के लिए बिहार जाने से उन्हें रोका गया. माना जाता है कि लालू प्रसाद यादव के पुत्र व राजद नेता तेजस्वी यादव के दबाव में कन्हैया कुमार का दौरा बिहार में नहीं करवाया गया. सीपीआई से कन्हैया कुमार की नाराजगी का एक बड़ा कारण इसे भी माना गया था. माना जा रहा है कि कन्हैया कुमार के सीपीआई छोड़ कांग्रेस जॉइन करने की एक बड़ी वजह यह भी रही.

कन्हैया को इस बात की टीस!
दरअसल. तेजस्वी यादव महागठबंधन का चेहरा हैं, साथ ही सीएम पद के दावेदार भी. ऐसे में कन्हैया कुमार के मेन स्ट्रीम में आ जाने के साथ ही तेजस्वी का तेज कम ना हो जाए, इसलिए भाकपा पर दबाव बनाया गया था. बता दें कि इससे पहले हुए लोकसभा चुनाव में बेगूसराय से सीपीआई के कन्हैया कुमार के खिलाफ राजद ने तनवीर हसन को उतार दिया था. राजद और सीपीआई के आपसी टकराव में भाजपा के गिरिराज सिंह ने बड़ी मार्जिन जीत हासिल की थी.

कन्हैया-तेजस्वी के तेज की परीक्षा
ऐसे में अब नए परिदृश्य में जब तेज तर्रार युवा नेता कन्हैया कुमार कांग्रेस में शामिल हो गए हैं और अब वह जब स्टार प्रचारकर भी बन गए हैं, तो ऐसे में राजद और कांग्रेस के बीच तनातनी की तस्वीर दिलचस्प मोड़ लेती दिख रही है. माना जा रहा है कि कांग्रेस कन्हैया कुमार को चुनाव प्रचार में जरूर भेजेगी और दो युवा नेताओं का आमना-सामना भी जल्द ही होने वाला है. जाहिर है ऐसे में तेजस्वी और कन्हैया के तेज की अग्निपरीक्षा होने वाली है.

सोनिया की मुहर और लालू की चिंता!
हालांकि, सियासत का एक दूसरा कोण यह भी है कि कन्हैया कुमार के चुनाव प्रचार में आने से भाजपा और जदयू के खिलाफ कांग्रेस की ताकत बढ़ेगी. बता दें कि बिहार में 30 अक्टूबर को उपचुनाव है और कांग्रेस ने तारापुर से राजेश कुमार मिश्रा को टिकट दिया है, वहीं कुशेश्वरस्थान पर अतिरेक कुमार पर पार्टी ने भरोसा जताया है. सबसे खास बात यह भी है इस पूरी कवायद में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की सहमति है और उन्होंने ही दोनों के नामों पर मुहर लगाई है.

कांग्रेस की बिहार में लंबी प्लानिंग
जाहिर है अब सोनिया गांधी के आदेश से ही उपचुनाव के जरिए अब तेजस्वी यादव और कन्हैया कुमार आमने-सामने होंगे. ऐसे में बिहार की राजनीति के लिए यह बड़ा बदलाव माना जा रहा है. इस चुनाव के परिणाम तीन नवंबर को घोषित कर दिए जाएंगे, लेकिन राजनीतिक के जानकार मानते हैं कि नतीजा चाहे जो भी हो अगर तेजस्वी और कन्हैया एक दूसरे के सामने आ गए तो यह बिहार कांग्रेस की राजनीति के लिए बड़ा शिफ्ट है और कांग्रेस अपनी लंबी प्लानिंग के तहत ही आगे बढ़ रही है.

कन्हैया-तेजस्वी के आमने-सामने का इंतजार
गौरतलब है कि राजद ने कुश्वेश्वरस्थान से गणेश भारती को तो तारापुर से अरुण कुमार साह को टिकट दिया है. वहीं, एनडीए की ओर से तारापुर से राजीव कुमार सिंह (जेडीयू) को टिकट दिया गया है. कुशेश्वरस्थान से अमन भूषण हजारी जेडीयू के कैंडिडेट हैं. बड़ी बात ये है कि कांग्रेस में एंट्री के साथ ही तेजस्वी यादव के सामने कन्हैया कुमार आएंगे. दोनों ही अपने प्रत्याशियों के समर्थन में वोट मांगेंगे खास बात यह भी है कि चुनाव में लालू यादव भी प्रचार करने आ सकते हैं.

तेजस्वी के लिए क्या कन्हैया चुनौती हैं?
राजद के सूत्रों से जो जानकारी मिली है उसके अनुसार लालू प्रसाद यादव का संभावित चुनावी दौरा
25 और 27 अक्टूबर को हो सकता है. राजद सुप्रीमो कुशेश्वरस्थान और तारापुर में इस दौरान चुनाव प्रचार कर सकते हैं. हालांकि, राजद के विधायक भाई विरेंद्र ने पहले जानकारी दी थी कि लालू यादव 20 अक्टूबर को पटना आने वाले हैं. खैर, लालू यादव जब भी चुनाव प्रचार के लिए आएं, वह तेजस्वी यादव और राजद के लिए फायदेमंद होने वाला है. हालांकि, कहा तो यह भी जा रहा है कि लालू भी नहीं चाहते थे कि तेजस्वी और कन्हैया का आमना-सामना हो.

लालू यादव कन्हैया कुमार को नहीं चाहते!
सियासत के जानकारों की नजर में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव तेजस्वी यादव के सामने कन्हैया कुमार को एक बड़ी चुनौती मानते हैं. यही कारण है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सीपीआई महागठबंधन का हिस्सा थी, और पार्टी ने कन्हैया कुमार को बेगूसराय से अपना उम्मीदवार बनाया था, तो भी आरजेडी ने कन्हैया कुमार के खिलाफ तनवीर हसन को अपना उम्मीदवार उतार दिया. लालू के इस कदम से साफ हो गया था कि वह किसी भी कीमत पर तेजस्वी के सामने एक युवा नेता को नहीं विकसित होने देखना चाहते हैं.

कन्हैया के आने से कांग्रेस को मिली नई ऊर्जा
लालू प्रसाद ऐसा इसलिए चाहते हैं क्योंकि कन्हैया कुमार न केवल एक युवा चेहरा हैं बल्कि जबरदस्त वक्ता भी हैं. लालू को इस बात का डर था कि तेजस्वी के सामने कन्हैया चुनौती बन सकते हैं. इसी कारण से उन्होंने कन्हैया के खिलाफ बेगूसराय में अपना उम्मीदवार उतारा था. बहरहाल अब स्थितियां बदली हैं और कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने के बाद देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी को एक नई ऊर्जा मिली है. साथ ही कांग्रेस ने भी दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं.

कांग्रेस और राजद की क्यों बढ़ी तल्खी?
कन्हैया कुमार के साथ प्लस पॉइंट यह भी है कि वह बिहार के रहने वाले हैं. ऐसे में बिहार कांग्रेस का मनोबल ऊंचा है और वह आरजेडी की अगुवाई में काम नहीं करना चाहती है. यही वजह है कि कन्हैया कुमार के कांग्रेस में एंट्री के बाद बिहार उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा करने का वक्त आया तो आरजेडी ने कांग्रेस से बिना विमर्श किए दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी, जबकि कुशेश्वरस्थान कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है और पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी इस सीट पर दूसरे नंबर पर आई थी.

उत्साह से क्यों भर गया बिहार कांग्रेस?
कांग्रेस ने राजद पर तल्ख अंदाज में यह आरोप भी लगाया था कि उम्मीदवारों के नाम की घोषणा के वक्त गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया गया. अब जब कन्हैया कुमार कांग्रेस का हिस्सा हैं और वह चुनाव प्रचार के लिए भी आ रहे हैं, तो राजद के सामने एक कठिन चुनौती सामने आ रही है. कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा ने पहले भी कहा था कि कहा था कि हर पार्टी को अपनी राह व नेता चुनने के साथ ही खुद को बढ़ाने का भी अधिकार है, ऐसे में तेजस्वी का आमना-सामना भी हो तो इससे राजद को चिंतित नहीं होना चाहिए.

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