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...तो क्या पाला बदलने में माहिर मुकेश सहनी इस बार BJP के सियासी चक्रव्यूह में फंस गए?

एमएलसी चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करते हुए मुकेश सहनी.
एमएलसी चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करते हुए मुकेश सहनी.

मुकेश सहनी (Mukesh Sahni) अब तक के अपने छोटे सियासी करियर में कई बार पाला बदल चुके हैं. सहनी ने जहां 2015 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को समर्थन दिया था, वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में वह महागठबंधन का हिस्‍सा थे.

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पटना. विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के अध्यक्ष और बिहार में पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री मुकेश सहनी (Mukesh Sahni) ने सोमवार को एमएलसी सीट के लिये पर्चा दाखिल किया. भाजपा के नेता विनोद नारायण झा (Vinod Narayan Jha) के विधानसभा सदस्य चुने जाने के बाद यह सीट खाली हई थी. बीजेपी कोटे की खाली यह सीट वीआईपी की झोली में तब गई, जब पार्टी ने बीजेपी के ऑफर को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.

दरअसल, इस सीट का कार्यकाल 21 जुलाई 2022 में खत्म हो जाएगा, लिहाजा मुकेश सहनी इस सीट से चुने जाने के बजाय 6 साल के कार्यकाल की सीट लताश रहे थे. ऐसा माना जा रहा है कि वह राज्यपाल कोटे से मनोनयन वाली 12 सीटो में से एक सीट पर अपनी हिस्सेदारी चाहते थे, लेकिन बीजेपी उन्हें राज्यपाल कोटे से विधानपरिषद में भजने को राजी नहीं हुई.

मुकेश सहनी बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह के मनाने पर तैयार हो गए. अब मुकेश सहनी डेढ साल के लिये विधानपरिषद के सदस्य होंगे और डेढ साल बाद दोबारा सदन में पहुंचने के लिये बीजेपी के दरवाजे खटखटाने होंगे. अब सियासी गलियारे में यही चर्चा है कि भाजपा की सियासी फांस में मुकेश सहनी फंस चुके हैं.




बीजेपी ने कम कार्यकाल वाली सीट क्यों दी?
मुकेश सहनी अब तक के अपने छोटे सियासी करियर में कई बार पाला बदल चुके हैं. मुकेश सहनी ने जहां 2015 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को समर्थन दिया था, वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में वह महागठंबधन का हिस्‍सा बन गए थे. सीटों के तालमेल में हुए मतभेद के बाद 2020 चुनाव के पहले उनकी एनडीए में वापसी हो गई. माना जा रहा है कि मुकेश सहनी के इसी सियासी खेल व पैंतरे को बीजेपी भांप गई है. भविष्य में मुकेश सहनी कोई और मुश्किल पैदा न करें इससे बचने के लिए बीजेपी मुकेश सहनी के लिये चक्रव्यूह तैयार कर लिया.

बीजेपी की पृष्ठभूमि से हैं वीआईपी के विधायक
ऐसा माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में मुकेश सहनी को बीजेपी कोटे से मिली 11 सीटों पर भी ज्यादातर उम्मीदवारों की पृष्‍ठभूमि बीजेपी की थी. वीआईपी की टिकट पर जीतने वाले उम्मीदवार भी बीजेपी के काफी करीबी हैं. ऐसे में मुकेश सहनी और उनके दल के विधायकों को चारों तरफ से घेरने के लिये पूरी सियासी व्यूहरचना की गई है.

मुकेश सहनी की पॉलिटिक्‍स में एंट्री
मायानगरी में फिल्म सुटिंग के सेट तैयार करने वाले मुकेश सहनी का अब तक का सफर भी फिल्मी कहानी से कम रोचक नहीं है. कम उम्र में ही मुकेश सहनी घर छोड़कर देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पहुंचे और अपनी चमक बढ़ाई. इसके बाद बिहार की राजनीति में कदम रखना शुरू कर दिया. मुकेश ने 2010 में सहनी समाज कल्याण संस्थान की स्थापना की और साथ ही दरभंगा और पटना में एक-एक दफ्तर खोल लिया.

अखबारों में एक विज्ञापन आया और छा गए सहनी
इस फाउंडेशन के जरिए वो धीरे-धीरे बिहार में पांव पसारना शुरू किया और फिल्मों के जैसे ही 2012 आई एक फिल्म के नाम से प्रेरित होकर सन ऑफ मल्लाह के रूप में खुद को प्रोजेक्ट किया. 2013 में बिहार के अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन छपे. उस विज्ञापन में मुकेश सहनी की तस्वीर लगी हुई थी और इस विज्ञापन के सहारे ही सहनी की बिहार में बड़े फलक पर एंट्री हुई.
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