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पटना: इस मोहल्ले के लोग दरिया में मनाएंगे दिवाली! जानें क्या है मजबूरी

News18 Bihar
Updated: October 19, 2019, 12:04 PM IST
पटना: इस मोहल्ले के लोग दरिया में मनाएंगे दिवाली! जानें क्या है मजबूरी
पटना के गोलारोड की कई कॉलोनियों में अब भी हजारों की संख्या में लोग जलजमाव से परेशान हैं.

स्थानीय लोग कहते हैं कि इससे बेहतर तो कालापानी की सजा होती है जिसमें कम से कम सजा का कार्यकाल निर्धारित होता है, लेकिन यहां तो सजा काटते ही जा रहे हैं. मुसीबत कब कम होगी ये भी कोई नहीं जानता.

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पटना. राजधानी के गोला रोड (Gola Road) वासी पिछले 23 दिनों से जेल से भी बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं क्योंकि यहां जमा पानी ने जिंदगी की रफ्तार पर पूरी तरह से ब्रेक लगा रखी है. गोला रोड के बैंक कॉलोनी (Bank colony) के रोड नंबर 11,12 और 15 में अब भी पानी कम नहीं हुआ है. मकान से लेकर दुकान तक, मंदिर से लेकर मैदान तक, हर कुछ पानी में डूबा है और सिस्टम तमाशबीन बना है. पानी कम होने के इंतजार में थक चुके लोग आखिर कब तक घरों में कैद रहते? यही वजह है कि हर घर के आगे बांस की चचरी का पुल बना लिया और उसी के सहारे घर की दहलीज लांघ पा रहे हैं.

सड़ांध पानी से यहां के हर वर्ग के लोग परेशान हैं तो सिस्टम बेपरवाह बना है. जीवन बचानेवाला पानी मानों यहां के लोगों का शत्रु बन गया हो. अब सिर्फ बीमारियों का डर नहीं सता रहा है बल्कि घर के बाहर सांप-बिच्छुओं ने भी डेरा जमा लिया है. पानी ने स्कूली बच्चों का तो स्कूल से नाता ही तोड़ दिया है, वहीं दफ्तर जानेवाले लोगों को एक्स्ट्रा कपड़े लेकर घर से बाहर निकलना पड़ रहा है.

पटना के गोला रोड में जलजमाव के बीच लोगों ने बांस का पुल वनवा लिया है.


रोड नम्बर 11 में सबसे बुरी स्थिति तो एक बुजुर्ग दंपति की है जिनके बच्चे दूसरे प्रदेश में रहते हैं और मां-बाप घरों में कैद हैं. कमला शर्मा और कौशल किशोर वीडियो कॉलिंग कर अपने बच्चों को रोज तसल्ली देते हैं कि बेटा ठीक हूं, लेकिन पानी कम नहीं हो रहा. दोनों बीमार हैं और दरिया से बाहर निकल नहीं पा रहे लेकिन दरियादिल पड़ोसी की मदद से दवा और राशन मिल जा रहा है.

यही हाल आशा देवी का भी है. ये आईजीआईएमएस में ओटी इंचार्ज हैं और इन्हें 3 फ़ीट पानी में घुसकर रोज दफ्तर जाना पड़ रहा है. उमाशंकर प्रसाद और प्रतीक शर्मा तो सरकार और नेता से इतने नाराज हैं कि नाम सुनते ही नफरत करने लगते हैं.

लोगों की माने तो इससे बेहतर तो कालापानी की सजा होती है जिसमें कम से कम सजा का कार्यकाल निर्धारित होता है, लेकिन यहां तो सजा काटते ही जा रहे हैं. मुसीबत कब कम होगी ये भी कोई नहीं जानता.

दरिया के बीच में रहकर भी लोगों को प्यासे रहना पड़ रहा है और पानी की कीमत अदाकर बाहरी बोतल खरीदनी पड़ रही है. दरअसल पानी निकालने वाला मोटर भी डूब चुका है.
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आज भी इन कॉलोनी में 3 फिट पानी बह रहा है और लोग घरों में कैद हैं. प्रतीक कुमार बताते हैं कि दुर्गापूजा फीका होने के बाद सोचा था कि दिवाली में खुशी के दिए जलेंगे लेकिन अब दीवाली भी दरिया में ही मायूसी से मनेगी.

भारी बारिश के 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पटना के गोलारोड के कई इलाकों में अब भी बारिश का पानी जमा है.


डेंगू और चिकनगुनिया का प्रकोप पूरे राज्य में जारी है और सरकारी इंतजामात के दावे भी किये जा रहे हैं लेकिन यहां आज तक ना तो ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव हुआ है ना ही कोई हाल जानने पहुंचे हैं.

लोगों को तकलीफ इस बात की है कि सत्ताधारी पार्टी के सांसद और विधायक हैं बावजूद डूबती बस्ती का हाल जानने कोई नहीं पहुंचे. सांसद रामकृपाल यादव और विधायक आशा देवी को बड़ी उम्मीद से लोगों ने वोट किया था लेकिन अब हर कोई पछता रहा है.

रिपोर्ट- रजनीश कुमार

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First published: October 19, 2019, 11:47 AM IST
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