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खाक से फलक तक : 18 साल की उम्र में घर से भागे, मजदूरी की, और अब हैं बिहार के मंत्री

बिहार चुनाव में मुकेश सहनी ने महागठबंधन से नाता तोड़कर एनडीए का दामन थाम लिया था. (फोटो साभारः Mukesh Sahni Twitter)
बिहार चुनाव में मुकेश सहनी ने महागठबंधन से नाता तोड़कर एनडीए का दामन थाम लिया था. (फोटो साभारः Mukesh Sahni Twitter)

फिल्मी दुनिया से आने वाले मुकेश सहनी की कहानी भी बिल्कुल फिल्मों की तरह है. वो 18 साल की उम्र में घर (दरभंगा) से मुंबई भागे थे. फिर मायानगरी में जो कुछ भी हुआ वह किसी फिल्म की पटकथा की तरह ही नाटकीय है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 30, 2020, 12:16 PM IST
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ये कहानी है एक मजदूर के मंत्री बनने की. जिंदगी इत्तेफाक है. कल भी थी, आज भी है. न जाने कितने किस्से मशहूर हैं. कोई घर से भाग गया और कुछ साल बाद कामयाब इंसान बन गया. दुनिया में लाखों लोग मेहनत करते हैं. लेकिन कामयाबी चंद लोगों को ही मिलती है. वक्त के इसी मरहले पर मेहनत को किस्मत की दरकार होती है. कोई गैरराजनीति आदमी दो साल पहले राजनीतिक पार्टी बनाए और इतने कम समय में ही बिहार सरकार का मंत्री बन जाए तो इसे क्या कहेंगे? मेहनत की दरख्त पर किस्मत की बेल शायद ही ऐसी परवान चढ़ती है. फिल्मी दुनिया से आने वाले मुकेश सहनी की कहानी भी बिल्कुल फिल्मों की तरह है. वो 18 साल की उम्र में घर (दरभंगा) से मुंबई भागे थे. फिर मायानगरी में जो कुछ भी हुआ वह किसी फिल्म की पटकथा की तरह ही नाटकीय है.

मुकेश पहुंचे मायानगरी
दरभंगा के गौरा बौराम में रहने वाले मुकेश सहनी तब स्कूल में पढ़ते थे. तकरीबन 18 साल की उमर थी. मुकेश सहनी के एक जिगरी दोस्त को घर से भाग कर कुछ करने की सूझी. उसने मुकेश सहनी को अपने दिल की बात बताई. उन्होंने घर से भगाने के बारे में पहले से कुछ सोचा नहीं था. लेकिन यार के इसरार पर मुकेश भी घर से भागने को राजी हो गए. घर से भाग कर दरभंगा रेलवे स्टेशन पहुंचे. जो पहली ट्रेन आई वह पवन एक्सप्रेस थी, जो मुंबई जा रही थी. घर के लोगों कहीं खबर न लग जाए इसलिए पहली ट्रेन में बैठने का फैसला हुआ. मुकेश सहनी अपने दोस्त के साथ ट्रेन में सवार हुए और जा पहुंचे मुंबई. उनके गांव के कुछ लोग पहले से मुंबई में छोटे-मोटे काम कर रहे थे. कुछ दिन गांव के लोगों के पास रहे. उनकी मदद से पास ही एक दुकान में काम मिल गया. दुकान का नाम था नॉवल्टी स्टोर. पगार तय हुई 900 रुपये महीना. रोटी का इंतजाम हुआ तो मुकेश मेहनत से काम करने लगे. नॉवल्टी स्टोर के बिल्कुल बगल में एक फोटो फ्रेम की दुकान थी.

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