भयावह था इमरजेंसी का दौर, मोरारजी को PM बनाना था गलत फैसला: राज्यपाल
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25 जून को 1975 में जिस दिन इमरजेंसी लगी थी उस दिन रात को 4 बजे मुझे फोन आया कि तुम घर छोड़ दो क्योंकि सब नेताओं की गिरफ्तारी हो गई है.

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न्यूज18 बिहार के साथ खास बातचीत में बिहार के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अपने इमरजेंसी के दौर की यादें शेयर की और साथ ही मौजूदा राजनीति हालात पर खुलकर चर्चा की...

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि 25 जून को 1975 में जिस दिन इमरजेंसी लगी थी उस दिन रात को 4 बजे मुझे फोन आया कि तुम घर छोड़ दो क्योंकि सब नेताओं की गिरफ्तारी हो गई है. मैंने इमरजेंसी का वो भयावह दौर भी देखा है, मैं कह सकता हूं कि जो लोग जेल गए उनके पीछे उनके परिवार वाले बर्बाद हो गए.

इमरजेंसी के बाद जो सरकार बनी उसके बारे में राज्यपाल का कहा है कि- जेपी चाहते थे कि इमरजेंसी के बाद जो सरकार बने उसकी बागडोर नौवजवान के हाथ में हो. पर ऐसा नहीं हुआ जिसका नतीजा पूरे देश ने भुगता. उस वक्त के जो लोग हैं जब देश आजाद हुआ तो राजनीति समाज सेवा का हिस्सा थी उसके बाद राजनीति करियर बनी, अब राजनीति कॉमर्स हो गई है.



राज्यपाल ने मौजूदा हालात पर कहा कि अगर भगत सिंह को पता होता कि इस देश की राजनीति आजादी के बाद मायावती और मुलायम जैसों के हाथ आने वाली है तो वो कहते कि मैं किसके लिए कुर्बानी दे रहा हूं. विशेष राज्य के दर्जे पर उन्होंने कहा कि मैं एक संवैधानिक पद पर हूं, आप इसका जवाब अमित शाह या प्रधानमंत्री जी से ले लीजिएगा. (ज्योति मिश्रा की रिपोर्ट)
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