कांग्रेस का सदाकत आश्रम बना रणक्षेत्र, विधायक दल के नेता के मुद्दे पर आपस में भिड़े समर्थक

नेताओं के समर्थक इस तरह एक-दूसरे से उलझते दिखे.
नेताओं के समर्थक इस तरह एक-दूसरे से उलझते दिखे.

अंतर्कलह और सहयोगियों के हमले से परेशान कांग्रेस के लिए विधायक दल का नेता चुनना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है. 70 उम्मीदवारों में केवल 19 ही चुनाव जीत पाए हैं और अब इनमें भी नेता कौन होगा यह अभी तक तय नहीं हो पा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 13, 2020, 8:57 PM IST
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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) के बाद भी कांग्रेस (Congress) की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रहीं. सदाकत आश्रम (Sadaqat Ashram) में एक ओर विधायक दल की बैठक चल रही थी, तो दूसरी ओर विधायक के समर्थक आपस में हाथापाई और गाली गलौज कर रहे थे. बैठक की खबर मिलते ही सुबह से विक्रम विधानसभा से विधायक सिद्धार्थ सिंह के समर्थक सदाकत आश्रम में डेरा डाले हुए थे और पार्टी के बड़े नेताओं से सिद्धार्थ को विधायक दल का नेता चुनने की मांग कर रहे थे. वहीं दूसरी ओर विधायक विजय शंकर दुबे के समर्थक भी सदाकत आश्रम में उन्हें विधायक दल का नेता चुने जाने के लिए लगातार नारेबाजी कर रहे थे. लेकिन इसी बीच दोनों के समर्थक आपस में भिड़ गए और जमकर हाथापाई हुई. बाद में बड़े नेताओं को बीच-बचाव करना पड़ा, तब जाकर मामला शांत हुआ.

भूपेश बघेल को सौंपी गई जिम्मेवारी

अंतर्कलह और सहयोगियों के हमले से परेशान कांग्रेस के लिए विधायक दल का नेता चुनना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है. 70 उम्मीदवारों में केवल 19 उम्मीदवार ही चुनाव जीत कर आए हैं और अब इनमें भी नेता कौन होगा यह अभी तक तय नहीं हो पा रहा है. नेता चुनने की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अविनाश पांडे को दी गई है. दोनों बड़े नेताओं ने अपने पार्टी के सभी विधायकों के साथ पहले विधायक दल की बैठक की और उसके बाद वन टु वन नेताओं से उनकी राय भी जानी.




सोनिया को किया गया अधिकृत

हालांकि यहां भी कांग्रेसी विधायकों की गुटबाजी साफ तौर पर देखने को मिली. दो से तीन ग्रुप में बटें विधायक अपने-अपने गुट के विधायक को विधायक दल का नेता बनाना चाहते हैं. इन सब के बाबजूद विधायक दल की बैठक में सबों ने विधायक दल का नेता चुनने के लिए सोनिया गांधी को अधिकृत कर दिया, लेकिन छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल से हुई वन टु वन बातचीत में कई विधायकों ने अपनी दावेदारी भी पेश कर दी.

एकजुट रखने की कवायद

विधायक दल का नेता चुनना और विधायकों को एकजुट रखना कांग्रेस के लिए बड़ी मुश्किल की घड़ी दिखाई दे रही है. इसीलिए आलाकमान ने पार्टी के बड़े नेताओं को बिहार भेज विधायकों को एकजुट रखने को कहा है. आज सदाकत आश्रम में जो कुछ हुआ उससे यह तो साफ है कि कांग्रेस के अंदर खाने में सब कुछ ठीक नहीं है. यह विवाद आने वाले दिनों में और भी बढ़ सकता है कांग्रेस आलाकमान को इसके लिए विशेष पहल करनी होगी क्योंकि विरोधियों की नजर कांग्रेस के विधायकों पर पहले से है.
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