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तेजाब कांड- शहाबुद्दीन के हाथों बेटों को गंवाने वाले चंदा बाबू ने कहा, "सीवान के लिए शहीद हुए मेरे बच्चे"

फाइल फोटो

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अपने बेटे को गंवाने वाले चंदा बाबू केस की शुरूआत से ही न्यायालय के फैसले पर विश्वास जताते आ रहे हैं. उन्होंने इससे पहले पिछले साल अगस्त में हाईकोर्ट के फैसले को भी न्याय की जीत बताया था.

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पटना हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी सीवान के बहुचर्चित तेजाब कांड में शहाबुद्दीन की सजा को बरकरार रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने तेजाब से नहलाकर चंदा बाबू के दो बेटों की हत्या करने के मामले में सीवान के डॉन और चार बार सांसद रह चुके मोहम्मद शहाबुद्दीन और उसके तीन सहयोगियों को हाई कोर्ट से मिली उम्र कैद की सजा बरकरार रखी.

सोमवार को इस मामले की सुनवाई होते ही चीफ जस्टिस रंजग गोगोई की पीठ ने महज कुछ मिनटों में ही शहाबुद्दीन की याचिका खारिज कर दी. जैसे ही वकील ने कुछ कहना चाहा पीठ ने पूछा. शहाबुद्दीन के खिलाफ गवाही देने जा रहे राजीवन रौशन को क्यों मार दिया? उसके मर्डर के पीछे कौन था? कोर्ट के इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार के मुखिया चंदा बाबू का फिर से न्यायालय पर भरोसा बढ़ गया होगा. अपने बेटे को गंवाने वाले चंदा बाबू केस की शुरूआत से ही न्यायालय के फैसले पर विश्वास जताते आ रहे हैं. उन्होंने इससे पहले पिछले साल अगस्त में हाईकोर्ट के फैसले को भी न्याय की जीत बताया.

फैसला आते ही चंदा बाबू ने कहा था कि सूबे में सरकार बदली है तो हमें राहत की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि इस केस में न्यायपालिका जिस तरह से फैसला सुना रही है और सबों को सहयोग मिल रहा है उससे मेरा भरोसा बढ़ रहा है. अपने दो बेटों को एक साथ गंवाने वाले चंदा बाबू ने कहा कि हमारे दोनों बच्चे सीवान की आजादी के लिये शहीद हुए थे और अब ऐसा लग रहा है कि मेरा सीवान सच में आजाद हो गया है.



कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने कहा कि बच्चों की याद में आज भी आंखों में आंसू हैं लेकिन दुख के साथ-साथ खुशी इस बात की है कि हमें देर से ही सही न्याय और जीत दोनों मिल रही है. चंदा ने न्यूज 18 से कहा कि अब किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि अब सीवान में दबंग की ताकत नहीं चलने वाली सीवान निर्भिक हो कर रहेगा.
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