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Surya Grahan 2021: शनिवार के दिन सूर्य ग्रहण, जानें समय व धार्मिक महत्व, क्या बिहार-झारखंड में भी लगेगा?

Surya Grahan 2021: शनिवार के दिन सूर्य ग्रहण, जानें समय व धार्मिक महत्व, क्या बिहार-झारखंड में भी लगेगा?

चार दिसंबर यानी शनिवार को लगेगा वर्ष 2021 का अंतिम सूर्य ग्रहण. चार घंटे आठ मिनट का होगा ग्रहण काल. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

चार दिसंबर यानी शनिवार को लगेगा वर्ष 2021 का अंतिम सूर्य ग्रहण. चार घंटे आठ मिनट का होगा ग्रहण काल. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Solar Eclipse 2021: आगामी चार दिसंबर को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण बहुत ही खास माना जा रहा है क्योंकि इसी दिन शनि अमावस्या भी है. ज्योतिष की दृष्टि से सूर्यग्रहण और शनि अमावस्या का एक ही दिन पड़ना अद्भुत संयोग है, क्योंकि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, शनि देव को सूर्य का पुत्र कहा जाता है. यदि सूर्य और शनि दोनों ग्रह एक साथ प्रसन्न हों तो बहुत ही उत्तम रहेगा. इसलिए शनि और सूर्य दोनों के लिए दान करना आवश्यक है.

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    पटना. आने वाले शनिवार यानी 4 दिसंबर 2021 को इस वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. बताया जा रहा है कि सूर्य ग्रहण की अवधि चार घंटे की होगी. भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण सुबह 10.59 बजे शुरू होगा. यह ग्रहण दोपहर 03.07 बजे तक रहेगा. इस ग्रहण का परमग्रास एक मिनट 54 सेकेंट समय का होगा. इसका अर्थ यह हुआ कि लगभग दो मिनट तक सूर्य का सर्वाधिक हिस्‍सा चांद की छाया से ढंका रहेगा. यह सूर्य ग्रहण अफ्रीका महादेश, दक्षिण अमेरिका और आस्‍ट्रेलिया में दिखाई देगा.

    यह सूर्य ग्रहण बहुत ही खास माना जा रहा है क्योंकि इसी दिन शनि अमावस्या भी है. ज्योतिष की दृष्टि से सूर्यग्रहण और शनि अमावस्या का एक ही दिन पड़ना अद्भुत संयोग है, क्योंकि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, शनि देव को सूर्य का पुत्र कहा जाता है. यदि सूर्य और शनि दोनों ग्रह एक साथ प्रसन्न हों तो बहुत ही उत्तम रहेगा. इसलिए शनि और सूर्य दोनों के लिए दान करना आवश्यक है.

    शनि के प्रभाव से पीड़ित लोगों के लिए यह अमावस्या बहुत महत्वपूर्ण है. इसी के साथ मान्यता है कि इस दिन दान करने से पितरों को संतुष्टि मिलती है और हमारी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
    ज्योतिष के अनुसार, सूर्य ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर भी प्रभाव पड़ता है. इस बार सूर्य ग्रहण और शनि अमावस्या एक साथ है, इसलिए यदि ग्रहण और शनि अमावस्या के दौरान कुछ उपाय किए जाएं तो दोनों ही ग्रहों को अनुकूल किया जा सकता है.

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से आठ घंटे पहले ही शुरू हो जाता है. वेदों और पुराणों के अनुसार सूतक चार प्रकार के होते हैं. जिनमें से एक ग्रहण का सूतक भी है. कहा जाता है कि ग्रहण का सूतक गंभीर परिणाम देता है. सूर्य और चंद्रमा के ग्रहण के कारण परिवर्तनशील राशियों को छोड़कर सभी पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है. इसलिए सभी को इस समय सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए विशेष दान और पूजा करनी चाहिए.

    यह ग्रहण वृश्चिक राशि में होगा. ग्रहण के समय वृश्चिक राशि में सूर्य, केतु, चंद्रमा एवं बुध ग्रह साथ में रहेगा तथा इस पर राहु की दृष्टि बनी रहेगी. ग्रहण काल में अशुभ ग्रहों की शांति हेतु सनातनी परंपरा रही है. ग्रहण काल में सूर्य के वैदिक मंत्र व आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करना उचित माना जाता है. ज्योतिष आचार्य की मानें तो चार दिसंबर को लगने वाला सूर्यग्रहण के दिन शनि अमावस्या भी है.

    ज्योतिष की दृष्टि से सूर्यग्रहण और शनि अमावस्या का एक हीं दिन पड़ना अद्भुत संयोग है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शनि देव को सूर्य का पुत्र कहा जाता है. अगर सूर्य और शनि दोनों ग्रह एक साथ प्रसन्न हों तो लोगों को उत्तम फल मिलता है. ग्रहण के समय जरूरतमंदों और ब्राह्मण को दान करने से पितरों को संतुष्टि मिलती है और सभी मनोकामना पूर्ण होती है.

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