जेल में बंद लालू को सुशील कुमार मोदी ने दी 'गंगाजल' और 'अपहरण' देखने की सलाह
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जेल में बंद लालू को सुशील कुमार मोदी ने दी 'गंगाजल' और 'अपहरण' देखने की सलाह
सुशील मोदी ने लालू को दी ये दो फिल्में देखने की सलाह (फाइल फोटो)

सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) ने ट्वीट (Tweet) करते हुए लिखा कि लालू-राबड़ी राज में जहां जातीय नरसंहार और नक्सली उग्रवाद के चलते खेती-किसानी चौपट हुई. वहीं हत्या, लूट और उद्यमियों-व्यवसायियों से फिरौती वसूलने के लिए अपहरण की बढ़ती घटनाओं के चलते व्यापार ठप पड़ गया था.

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पटना. लॉकडाउन (Lockdown) के साथ-साथ बिहार की सियासत भी अपने चरम पर है. लगातार नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कर रहे हैं. इसके सबसे मुख्य पात्र हैं पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) और बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi). सुशील मोदी ने एक बार फिर से लालू यादव पर हमला किया है. लालू यादव के सवाल पूछे जाने पर सुशील मोदी ने कहा कि उन्हें यदि अपना राजकाल याद नहीं है तो कम से कम प्रकाश झा की दो फिल्में गंगाजल और अपहरण को देखना चाहिए. उनको याद आ जाएगा कि उनके समय बिहार में किस तरह से सत्ता चलती थी.

अपहरण राज चलता था बिहार में

सुशील मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि लालू-राबड़ी राज में जहां जातीय नरसंहार और नक्सली उग्रवाद के चलते खेती-किसानी चौपट हुई. वहीं हत्या, लूट और उद्यमियों-व्यवसायियों से फिरौती वसूलने के लिए अपहरण की बढ़ती घटनाओं के चलते व्यापार ठप पड़ गया था.



लालू यादव देखें गंगाजल और अपहरण, कुछ याद आ जायेगा
ग्रामीण और शहरी, दोनों अर्थव्यवस्था को ध्वस्त कर लालू प्रसाद ने हर वर्ग के लोगों की रोजी-रोटी छीनी और उनको पलायन के लिए मजबूर कर दिया. लालू प्रसाद को अपने राजपाट की भयावहता याद न हो, तो " गंगा जल" और "अपहरण" फिल्म फिर से देख लें.

बिहार के शिक्षा को चरवाहा विद्यालय में तब्दील कर दिया

बिहार के उप मुख्यमंत्री ने ट्वीट में लिखा है कि राजद काल के बिहार में न अच्छी सड़क थी, न पर्याप्त बिजली, विकास ठप था. स्कूली शिक्षा चरवाहा विद्यालय के स्तर पर आ गई थी और राजनीतिक पसंद के लोगों को कुलपति बनाकर  विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता नष्ट कर दी गई थी.

लालू यादव को जेल से माफी मांगनी चाहिए

जिस लालू प्रसाद के कारण लाखों मजदूरों, छात्रों और रोजगार देने वाले उद्यमियों को बिहार छोड़ना पड़ा, वे खुद बिहारियों की मुसीबत और शर्मिंदगी के सियासी गुनहगार हैं. जिन्हें अपने किये के लिए माफी मांगनी चाहिए, वे जेल से ट्वीट कर सवाल पूछ रहे हैं.

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