जब तक समाज में रहेगा भेदभाव तब तक एससी-एसटी के लिए आरक्षण जारी रहेगाः सुशील मोदी

भाजपा के सहयोग से बनी वीपी सिंह की सरकार में संसद में चित्र लगाने के साथ आम्बेडकर को भारत रत्न से सम्मानित किया गया. (फाइल फोटो)

भाजपा के सहयोग से बनी वीपी सिंह की सरकार में संसद में चित्र लगाने के साथ आम्बेडकर को भारत रत्न से सम्मानित किया गया. (फाइल फोटो)

बाबा साहेब भीम राव आम्बेडकर (Baba Saheb Bhim Rao Ambedkar) की 64 वीं पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह आरक्षण महात्मा गांधी और आम्बेडकर की देन हैं.

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पटना. बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) ने रविवार को कहा कि जब तक समाज में भेदभाव रहेगा लोकसभा, विधानसभा व सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (Sc-St) के लिए आरक्षण (Reservation) जारी रहेगा. मोदी ने एससी-एसटी के आरक्षण को 2030 तक बढ़ाए जाने पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि जब तक समाज में भेदभाव, छुआछूत आदि रहेगी तब तक लोकसभा, विधानसभा व सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था जारी रहनी चाहिए.

पटना के ए.एन. सिन्हा इंस्टीट्यूट में ‘आम्बेडकर के लोग’ की ओर से बाबा साहेब भीम राव आम्बेडकर की 64 वीं पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह आरक्षण महात्मा गांधी और आम्बेडकर की देन हैं. बिहार विधानसभा में 38 सीटें आरक्षित है, जहां एससी,एसटी के लोग जीत कर आते हैं, मगर विधान परिषद और राज्यसभा में आरक्षण की व्यवस्था नहीं रहने से वहां इनकी संख्या नगण्य हैं.

आम्बेडकर को भारत रत्न से सम्मानित किया गया

मोदी ने कहा कि भाजपा एससी-एसटी के आरक्षण में क्रीमी लेयर लाने के उच्चतम न्यायालय के फैसले के विरोध में है. केन्द्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में अपील कर उसे लागू करने से इनकार कर दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आम्बेडकर की उपेक्षा की, मगर 1989 में भाजपा के सहयोग से बनी वीपी सिंह की सरकार में संसद में चित्र लगाने के साथ आम्बेडकर को भारत रत्न से सम्मानित किया गया.
वंशवादी राजनीति को मजबूत किया गया

वहीं, शनिवार को सुशील कुमार मोदी ने तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए ट्वीटर पर कहा था कि राजद के 15 साल के राज में दलितों के सामूहिक संहार, फिरौती के लिए 17000 लोगों का अपहरण और पंचायत से संसद तक के लिए हुए कुल नौ चुनावों में 641 हत्याएं हुईं, लेकिन तब उन्हें गांधीजी के सिद्धांत की याद नहीं आयी. लालू- राबड़ी राज में गांधी ही नहीं, जेपी, लोहिया, कर्पूरी ठाकुर तक अनेक महापुरुषों के आदर्शों को रौंद कर सम्पत्ति बनायी गई और वंशवादी राजनीति को मजबूत किया गया.

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