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तांडव पर टकराव! केसी त्यागी बोले- क्या राजनेता तय करेंगे फिल्मों का निर्देशन?

जेडीयू महासचिव केसी त्यागी ने तांडव फिल्म पर जारी विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.
जेडीयू महासचिव केसी त्यागी ने तांडव फिल्म पर जारी विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.

Tandav web series controversy: त्यागी ने अपने बयान में कहा कि पहले ऐसे विवादों पर शिकायतें नहीं होती थीं. दौर बदल गया है. तांडव फिल्म के जिन दृश्यों पर विवाद है, उस पर जिम्मेदारी तो सेंसर बोर्ड की बनती है

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 18, 2021, 7:32 PM IST
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(नीरज कुमार)

नई दिल्ली. अमेजॉन प्राइम वीडियो की वेब सीरीज तांडव को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है. उत्तर प्रदेश में धर्मनगरी अयोध्या, मथुरा और काशी के साथ प्रयागराज में साधु-संतों समेत कई अन्य संगठनों ने भी इस फ़िल्म का खुला विरोध करते हुए इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. सूचना प्रसारण मंत्रालय ने 'तांडव' वेब सीरीज को लेकर अमेजन से सफाई मांगी है. इसी बीच, जेडीयू महासचिव केसी त्यागी ने तांडव फिल्म पर जारी विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.

त्यागी ने अपने बयान में कहा, 'क्या राजनेता फिल्मों का निर्देशन तय करेंगे? पहले ऐसे विवादों पर शिकायतें नहीं होती थीं. दौर बदल गया है. तांडव फिल्म के जिन दृश्यों पर विवाद है, उस पर जिम्मेदारी तो सेंसर बोर्ड की बनती है और अगर यह सेंसर बोर्ड के दायरे से बाहर है तो फिल्म निर्माताओं और संवाद लेखकों को बदली परिस्थितियों में देखना चाहिए कि क्या ये समय काल परिस्थिति के हिसाब से उपयुक्त है.'



उन्होंने कहा, 'कला और फिल्मों के बारे में मेरे जो अनुभव है, उसके मुताबिक किसी भी समय में विवादों को लेकर पहले शिकायतें नहीं होती थीं. दीवार फिल्म में अमिताभ बच्चन भगवान के मूर्ति के पास जाने से इनकार करते हैं और भगवान को इशारा करते हुए कहते हैं कि न्याय उनके बस की बात नहीं है. इसलिए आस्था नहीं है और हिंदू धर्म के लोग भी इसको बुरा नहीं मानते थे.'
जेडीयू महासचिव ने कहा, 'ऐसा ही उर्दू के सबसे बड़े शायर गालिब साहब के साथ भी है. गालिब साहब का एक प्रसिद्ध शेर मौलवी को संबोधित करते हुए है जिसमें मस्जिद में शराब पीने का जिक्र है या उस जगह की बात की गई है जहां खुदा ना हो. यह इस्लामिक मान्यता के खिलाफ संवाद है लेकिन उस जमाने में जब सलीम साहब और गालिब साहब ने यह चीजें लिखी थी वह आज जैसा दौर नहीं था आज का दौर बदला हुआ है.'

उन्होंने आगे कहा, 'उमराव जान का शेर याद आता है. आप तो दिल की धड़कने से भी डर जाते हो और उस पर जिद है कि जख्म जिगर देखोगे. अब तो जरा जरा सी बात पर हम लोग टकराव करने लगते हैं. एक दौर वो था एक दौर यह है. क्या फिल्मों का निर्देशन और लेखन राजनीतिज्ञ तय करेंगे. क्या कला पर पहरे होंगे. क्या लेखन पर पहरे होंगे. क्या फिल्मों पर पहरे होंगे.'

त्यागी ने कहा, 'जो वेब सीरीज बन रही हैं, अगर कोई सेंसर बोर्ड जैसा प्रबंध नहीं है तो ऐसी संस्था होनी चाहिए जो संवादों और निर्देशन की आक्रामकता को रोकने का काम करें.'
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