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Bihar Assembly By Election: जल्द आमने-सामने हो सकते हैं तेजस्वी-कन्हैया, महागठबंधन में जबरदस्त हलचल!

Bihar Assembly By Election: जल्द आमने-सामने हो सकते हैं तेजस्वी-कन्हैया, महागठबंधन में जबरदस्त हलचल!

क्या कन्हैया कुमार का तेजस्वी यादव के सामने खड़ा होना राजद को नागवार गुजरा?

क्या कन्हैया कुमार का तेजस्वी यादव के सामने खड़ा होना राजद को नागवार गुजरा?

Bihar Politics: कांग्रेस-राजद के बीच मतभेद का फिलहाल सबसे बड़ा कारण कन्हैया कुमार का टीम राहुल गांधी में शामिल होना बताया जा रहा है. सियासी जानकारों की नजर में तेजतर्रार कन्हैया कुमार के आने से पहले राहुल गांधी तेजस्वी यादव को ही बिहार का सबसे बड़ा नेता बताते आए हैं. लेकिन, अब कन्हैया की एंट्री के साथ ही बिहार कांग्रेस को एक बड़ा चेहरा मिल गया है जो तेजस्वी के सामने खड़ा हो सके.

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पटना. तारापुर और कुशेश्वरस्थान विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए मंगलवार को कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों का एलान कर दिया. इसका मतलब साफ है कि अब कांग्रेस और राजद एक साथ नहीं एक दूसरे के खिलाफ प्रचार में उतरेंगे. दोनों ही सीटों पर 30 अक्टूबर को मतदान किया जाएगा और तीन नवंबर को परिणाम घोषत कर दिए जाएंगे. हालांकि सबकी दिलचस्पी अब इस बात को जानने में है कि कांग्रेस में एंट्री के साथ उपचुनाव के जरिए अब तेजस्वी यादव और कन्हैया कुमार आमने-सामने हो सकते हैं? अगर ऐसा हुआ तो इसका आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति पर निश्चित रूप से काफी असर डालेगा.

यह सियासी चर्चा इसलिए भी है क्योंकि कांग्रेस-राजद के बीच मतभेद का फिलहाल सबसे बड़ा कारण कन्हैया कुमार का टीम राहुल गांधी में शामिल होना बताया जा रहा है. दरअसल तेजतर्रार कन्हैया कुमार के आने से पहले राहुल गांधी अक्सर तेजस्वी यादव को बिहार का सबसे बड़ा नेता बताते रहे हैं. पर अब कन्हैया कुमार की एंट्री के साथ ही बिहार कांग्रेस को वह चेहरा मिल गया है जो तेजस्वी यादव के मुकाबिल न सिर्फ खड़ा है बल्कि कई मायनों में बीस भी पड़ते हैं. यही वजह है कि राजद कन्हैया कुमार के कांग्रेस में आने का पक्षधर नहीं था.

तेजस्वी-कन्हैया की क्यों हो रही तुलना?
सियासी जानकार मानते हैं कि कन्हैया कुमार कहीं से भी कांग्रेस में एंट्री न पाएं. अब जब कन्हैया कांग्रेस में आ गए हैं तो राजद के कहीं से भी कन्हैया के साथ खड़े होना नहीं चाह रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि लोग कन्हैया कुमार और तेजस्वी यादव की तुलना करने लगेंगे. कन्हैया कुमार के भाषण देने का अंदाज तेजस्वी यादव से कहीं बेहतर है. वह युवा हैं और तेजस्वी के हमउम्र भी. साथ ही वाम व कांग्रेस की राजनीतिक धारा से आते हैं जिस राजनीति की विरोधी आरजेडी भी नहीं है.

एक साथ नहीं आते तेजस्वी-कन्हैया
सियासत के जानकार बताते हैं कि कन्हैया कुमार को लेकर तेजस्वी शुरू से ही असहज रहते रहे हैं. पिछले साल हुए विधासभा चुनाव में वामपंथी दल, कांग्रेस और राजद साथ मिलकर महागठबंधन के तहत चुनाव लडा था. इस चुनाव में तेजस्वी और कन्हैया अपनी-अपनी पार्टियों के स्टार प्रचारक थे. घटक दलों के प्रत्याशी की जीत के लिए दोनों नेताओं ने पूरा जोर लगाया तथा एक-दूसरे के प्रत्याशियों के लिए प्रचार करने भी उतरे, लेकिन कन्हैया और तेजस्वी ने एक साथ मंच साझा नहीं किया.

राजद ने कन्हैया को नहीं पहचाना!
इस स्थिति में कन्हैया के कांग्रेस में शमिल होने के बाद से ही राजद असहज नजर आ रही है. राजद के नेता और विधायक भाई विरेंद्र ने तो कन्हैया को पहचानने से इंकार कर दिया था. इधर राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने भी कहा कि अब जब कन्हैया कुमार कांग्रेस पार्टी में आ गए हैं, तो कांग्रेस आलाकमान को पार्टी की कमान कन्हैया को ही दे देनी चाहिए. जाहिर है कन्हैया को लेकर राजद में कोहराम मचा हुआ है. इस कोहराम पर कांग्रेस के बिहार अध्यक्ष मदन मोहन झा ने कहा कि राजद को कन्हैया के नाम पर दिक्कत थी तो पहले ही विरोध करना चाहिए था. अब तो वह कांग्रेस का हिस्सा हैं.

लालू भी नहीं चाहते थे कन्हैया की एंट्री
हालांकि, दूसरी ओर राजद की ओर से यह दलील भी दी जा रही है कि यह वही कन्हैया कुमार हैं, जिन्होंने 2029 के लोकसभा चुनाव में बेगूसराय में राजद को हराने के काम आए थे. बता दें कि लोकसभा चुनाव में कन्हैया सीपीआई के टिकट पर बेगूसराय क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतरे थे. उस समय राजद ने तनवीर को अपना प्रत्याशी बनाकर चुनावी मैदान में उतार दिया था. लालू यादव के इस फैसले से साफ हो गया था कि राजद किसी भी हाल में कन्हैया जैसे युवा नेता को तेजस्वी के सामने खड़ा होते नहीं देखना चाहते हैं.

कांग्रेस के लिए बिग बूस्ट साबित हो सकते हैं कन्हैया
अब जब कन्हैया कुमार कांग्रेस में शामिल हो गए हैं तो राजद के सख्त रुख के बाद भी कांग्रेस इस उपचुनाव में पीछे नहीं हटी और तारापुर व कुशेश्वरस्थान से अपने उम्मीदवार उतार दिए. अब जबकि यह तय है कि कांग्रेस प्रत्याशी के प्रचार के लिए कन्हैया बिहार आएंगे और उन्हें राजनीति में अपना कद बढ़ाने का मौका मिलेगा. कहा जा रहा है कि राजद यही नहीं चाहती थी. अब जब राजद के सामने कांग्रेस खड़ी हो ही गई है तो सभी को इसी बात का इंतजार है कि तेजस्वी के सामने कन्हैया कुमार कब खड़े होते हैं?

Tags: Assembly by election, Bihar politics, Congress, Kanhaiya kumar, Mahagathbandhan, Rahul gandhi, RJD, RJD leader Tejaswi Yadav

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