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बिहार: मैट्रिक परीक्षा में नया प्रयोग करने पर विवश हुई सरकार, बिना शिक्षक होगी परीक्षा!
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Rajnish Kumar | News18 Bihar
Updated: February 13, 2020, 8:48 AM IST
बिहार: मैट्रिक परीक्षा में नया प्रयोग करने पर विवश हुई सरकार, बिना शिक्षक होगी परीक्षा!
बिहार के शिक्षकों ने 17 फरवरी से हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

17 फरवरी से मैट्रिक की परीक्षा (Matriculation Examination) शुरू हो रही है और 17 फरवरी से ही राज्यभर के शिक्षक हड़ताल पर जाने का ऐलान कर चुके हैं. ऐसे में बिहार सरकार ने नया ि‍विकल्‍प तलाश कर लिया है.

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पटना. अब तक आपने परीक्षा में शिक्षकों को ही परीक्षक (Examiner) की ड्यूटी निभाते देखा और सुना होगा. लेकिन, इस बार आयोजित होने वाली मैट्रिक परीक्षा (Matriculation Examination) में शिक्षक नहीं, बल्कि ऐसे लोग वीक्षक बनेंगे जिन्हें देखकर कोई भी हैरान हो सकता है. जानकारी के अनुसार, परीक्षा के दौरान ऐसे लोग जांच की जिम्‍मेदारी संभालेंगे जिनका काम किसानों को बीच योजना पहुंचाना, अस्पताल में मरीजों का इलाज करना और मजदूरों को लाभ पहुंचाना है. सरकार ने इनलोगों को नई जिम्मेवारी देने का फैसला लिया है.

दरअसल, यह प्रयोग सरकार यूं ही नहीं कर रही है, बल्कि शिक्षकों ने सरकार को अनूठे प्रयोग करने के लिए विवश कर दिया है. दरअसल, 17 फरवरी से ही मैट्रिक की परीक्षा शुरू हो रही है और 17 फरवरी से ही राज्यभर के शिक्षक हड़ताल पर जाने का ऐलान कर चुके हैं. ऐसे में अब सरकार के लिए दसवीं का इम्तिहान लेना किसी इम्तिहान से कम नहीं है.

समान काम-समान वेतन की मांग
बता दें कि समान वेतन की मांग को लेकर भले ही राज्यभर के चार लाख नियोजित शिक्षक सुप्रीम कोर्ट में केस हार गए हैं, लेकिन राज्य सरकार से शिक्षकों की लड़ाई खत्म नहीं हुई है. आलम यह है कि परीक्षा की घड़ी आते ही शिक्षक गोलबंद होकर सरकार को चुनौती देने में जुट गए हैं. 17 फरवरी से राज्यभर में मैट्रिक की परीक्षा आयोजित होने वाली है और शिक्षक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.

शिक्षकों का विकल्प तलाश रही सरकार
बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति ने यही सोचकर 10 दिन पहले ही ऐलान कर दिया था कि 17 फरवरी से राज्य के चार लाख नियोजित और स्थायी शिक्षक हड़ताल पर जाएंगे और 76 हजार स्कूलों में तालाबंदी होगी तो सरकार शिक्षकों की चेतावनी के बाद मांगें मान लेगी, पर ऐसा नहीं हुआ. इसके विपरीत परीक्षा नजदीक आते ही सरकार ने शिक्षकों को मनाने के बजाय नए विकल्प की तलाश शुरू कर दी है.

बिहार के विभिन्न जिलों में जिला शिक्षा पदाधिकारी का कार्यालय विकल्प की तलाश कर मैट्रिक परीक्षा के संचालन की तैयारी में लगी है. 
शिक्षक संघ ने जताई नाराजगी
शिक्षा विभाग के निर्देश पर लखीसराय के जिलाधिकारी ने बतौर सभी संबंधित विभाग के पदाधिकारियों से पत्र लिखकर रोजगार सेवक, कृषि समन्वयक, कृषि सलाहकार और एएनएम की सूची तैयार करने का निर्देश जारी किया है. बहरहाल सरकार के इस अजूबे फैसले पर शिक्षक संघ के नेताओं ने न सिर्फ एतराज जताया है, बल्कि सरकार के इस फैसले को हास्यास्पद बताया है.

'बैकफुट पर नहीं आएंगे शिक्षक'
नियोजित शिक्षक नेता शिशिर पांडे और आनंद मिश्रा ने कहा कि अब सरकार शिक्षकों को अस्पताल में ड्यूटी लगा दे और विधायकों, सांसदों को भी वीक्षण कार्य का जिम्मा देकर सूबे के मुखिया खुद केंद्राधीक्षक की ड्यूटी निभाएं. इनका कहना है कि सरकार चाहे जेल भेज दे, लेकिन शिक्षक बैकफुट पर नहीं आएंगे और हर हाल में हड़ताल पर जाएंगे.

सरकार के लिए 'टफ टास्क'
बता दें कि शिक्षकों की गैरमौजूदगी में मैट्रिक परीक्षा का सफल संचालन कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है, जिसको लेकर रोज शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठकें भी चल रही हैं. हालांकि, शिक्षा विभाग ने शिक्षकों पर कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी है.

जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से भी जारी किए गए निर्देश.


वेतन कटौती की चेतावनी
बोर्ड ने सभी जिलाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि 17 फरवरी से स्कूल से अनुपस्थित रहनेवाले शिक्षकों पर न सिर्फ एफआईआर दर्ज करे, बल्कि हड़ताल की अवधि में उनकी वेतन कटौती भी करें. हालांकि, हैरानी की बात तो ये है कि इन सबके बाद भी न तो शिक्षकों को कार्रवाई का डर सता रहा है और न ही सरकार शिक्षकों को मनाने के लिए तैयार हो रही है. वहीं, शिक्षकों के हड़ताल पर जाने के सवाल पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक गिरिवर दयाल ने भी चुप्पी साध ली है.

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First published: February 13, 2020, 8:21 AM IST
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