बिहार विधानसभा चुनाव से पहले तेजप्रताप यादव ने फिर दिखाए बगावती तेवर, पार्टी में हड़कंप

डॉ. अभिषेक कुमार को पूर्वी-पश्चिमी चंपारण का चुनाव प्रभारी और संसदीय बोर्ड का सदस्य नियुक्त करने का पत्र दिखाते लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव.

आरजेडी (RJD) में जगदानन्द सिंह (Jagdanand Singh) और तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) में पावर गेम शुरू हो गया है. इसी पावर गेम में पहले तेज प्रताप ने अपना दम दिखाया तो जगदानन्द ने भी तेवर कड़े कर दिए.

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पटना. आरजेडी (RJD) में इन दिनों चाचा-भतीजे के बीच जंग जैसे हालात हो गए हैं. लालू प्रसाद यादव के अत्यंत करीबी और आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानन्द सिंह (Jagdanand Singh) और तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) के बीच रार ठन गई है. जगदानन्द सिंह जितना आरजेडी को अनुशासित करने में लगे हैं, तेज प्रताप उसी रफ्तार से अनुशासन की धज्जियां उड़ा रहे हैं. तेज प्रताप ने इस बार डंके की चोट पर अपने एक करीबी को संसदीय बोर्ड का सदस्य नियुक्त किया, तो अगले ही पल जगदानन्द ने तेज प्रताप के फैसले को ही रद्द कर दिया.

तेज प्रताप ने जगदानन्द को दी खुली चुनौती
तेज प्रताप यादव ने एक बार फिर जगदानन्द सिंह को खुली चुनौती दी है और डंके की चोट पर आरजेडी के संसदीय बोर्ड और संगठन में अपने करीबी को नियुक्त भी कर दिया है. डॉ. अभिषेक कुमार नाम के एक शख्स को तेज प्रताप ने अपने सरकारी आवास पर आरजेडी के लेटर हेड पर उसे पूर्वी-पश्चिमी चंपारण का चुनाव प्रभारी, साथ में संसदीय बोर्ड का सदस्य भी नियुक्त कर दिया है. और तो और इसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी है जो वायरल हो रही है.

यह नियुक्ति बिल्कुल फर्जी है
तेज प्रताप की इस 'मनमानी' को लेकर पार्टी के भीतर बहुत नाराजगी है, लेकिन कोई भी इस पर बोलने को तैयार नहीं है. हालांकि जगदानन्द सिंह ने भी तेज प्रताप की इस चुनौती को स्वीकार करते हुए इस नियुक्ति को ही रद्द कर दिया है. जगदानन्द सिंह ने कहा कि इस तरह की नियुक्ति का कोई मतलब नहीं, यह बिल्कुल फर्जी है.

जगदानन्द बोले, जांच नहीं अब मामले को अंजाम तक पहुंचाएंगे
जगदानन्द ने भी यह ठान लिया है कि वे तेजप्रताप की इन उटपटांग हरकतों को अब बर्दाश्त नहीं करेंगे. जैसे ही यह खबर तेजस्वी और पार्टी के बड़े नेताओं तक पहुंची, पार्टी में हड़कंप मच गया. सबसे ज्यादा हैरान और परेशान जगदानन्द सिंह ही हैं. जैसे ही News18 ने उनसे यह सवाल पूछा कि संसदीय बोर्ड का सदस्य तेज प्रताप यादव कैसे नियुक्त कर सकते हैं, इस पर जगदानन्द बाबू का कहना था कि ये सब नियुक्तियां फर्जी हैं और पार्टी इसे रद्द करती है. उन्होंने कहा कि अभी ना तो कोई नए संसदीय बोर्ड का गठन हुआ है और ना ही पार्टी ने किसी को चुनाव प्रभारी ही बनाया है. ऐसे में यह नियुक्ति ही अवैध है. जगदानन्द ने यह भी कहा कि हम पूरे मामले की जांच कराकर इसे अंजाम तक पहुंचाएंगे. हालांकि तेज प्रताप पर कार्रवाई के सवाल को जगदानन्द बार-बार टालते रहे.

पहले भी मनमानी करते रहे हैं तेज प्रताप
अभी 4 दिन पहले ही तेज प्रताप ने रैली के दौरान जगदानन्द सिंह को खुली चुनौती दी थी कि अगले 2-3 दिनों में वे संगठन का विस्तार करेंगे, क्योंकि वे किसी से डरते नहीं है. लोकसभा चुनाव में भी कुछ इसी तरह से तेज प्रताप यादव ने आरजेडी और नेताओं के खिलाफ खुलकर बगावत की थी. फिर एक बार जब चुनाव नजदीक है तो तेज प्रताप अपने पुराने तेवर में आ गए हैं. विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजद को इसकी वजह से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

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