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कब आएंगे तेजप्रताप के अच्छे दिन? अब RJD के बैनर-पोस्टर में भी नहीं मिल रही जगह

News18 Bihar
Updated: September 21, 2019, 9:39 AM IST
कब आएंगे तेजप्रताप के अच्छे दिन? अब RJD के बैनर-पोस्टर में भी नहीं मिल रही जगह
तेजप्रताप यादव को अब पार्टी के बैनर-पोस्टर में भी जगह नहीं मिल रही है. (फाइल)

राजनीति की रेस में तेजस्वी अपने भाई तेजप्रताप से बहुत आगे निकल गए हैं. लेकिन तेजप्रताप इस कदर पिछड़ जाएंगे या फिर उन्हें पार्टी से दूर कर दिया जाएगा, ये किसी ने नहीं सोचा था.

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  • Last Updated: September 21, 2019, 9:39 AM IST
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पटना. लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के लाल तेजप्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) के दिन वाकई अच्छे नहीं चल रहे हैं. कल तक वो राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की गतिविधियों से दूर रहा करते थे. लेकिन अब आलम ये है कि उन्हें बैनर और पोस्टरों में भी जगह नहीं मिल रही है. बिहार (Bihar) के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री पहले काम तो अब नाम के भी मोहताज हो गए हैं. एक तरफ उनके छोटे भाई और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) लगातार बैठक कर रहे हैं. तो दूसरी ओर तेजप्रताप को बैठक में शामिल करना तो दूर पार्टी के बैनरों-पोस्टरों में भी जगह नहीं मिल रही है. इसे महज संयोग नहीं माना जा सकता. राजनीति में इसे संयोग नहीं बल्कि सत्ता का संघर्ष कहते हैं. वैसे भी पहले से तेजस्वी को पार्टी और लालू का उत्तराधिकारी मान ही लिया गया है.

राजनीति की रेस में तेजप्रताप से बहुत आगे निकले तेजस्वी
राजनीति की रेस में तेजस्वी अपने भाई तेजप्रताप से बहुत आगे निकल गए हैं. लेकिन तेजप्रताप इस कदर पिछड़ जाएंगे या फिर उन्हें पार्टी से दूर कर दिया जाएगा, ये किसी ने नहीं सोचा था. शायद इसी को सियासत कहते हैं, जहां सत्ता के दो दावेदारों के बीच अगर संघर्ष होता है तो मजबूत दावेदार अपने प्रतिद्वंदी को कुचल कर आगे निकल जाता है.

बैनर-पोस्टर में भी नहीं मिल रही तेजप्रताप को जगह

आरजेडी के बड़े नेता भी अब मजबूत दावेदार या कह लीजिए जिसे लालू ने अपना उत्तराधिकारी माना है उसी के साथ चलने को राजी हैं. जाहिर है जब पार्टी ने अपना नेता तेजस्वी यादव को चुना है तो फिर तेजप्रताप के साथ खड़े होने को कौन तैयार होगा. ऐसे भी तेजप्रताप धीरे-धीरे पार्टी से दूर होते जा रहे हैं या कह लीजिए कि आउट ऑफ सीन होते जा रहे हैं. पार्टी का कोई कार्यक्रम हो, मिलन समारोह हो या फिर कोई बैठक. तेजप्रताप न तो इन कार्यक्रमों में शामिल होते हैं और अब इन बैनर-पोस्टरों में भी उनकी कोई तस्वीर नहीं लगती.

लोकसभा चुनाव के दौरान भी हाशिए पर रहे तेजप्रताप
इसी तरह के हालात लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान भी थे. उस वक्त भी तेजस्वी पूरे चुनाव में तेजप्रताप को खुद से दूर रखते थे. और तो और हेलीकॉप्टर पर तेजस्वी के साथ चुनाव प्रचार करने के लिए तेजप्रताप तरस जाते थे. राजनीतिक रूप से तेजप्रताप अब 'दयनीय' हो चले हैं लेकिन विरोधी उन्हें अब भी उकसाने में लगे हैं.
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विरोधी उठाना चाहते हैं फायदा
विपक्ष या बीजेपी के तेज प्रेम में बड़ी सियासत छिपी है. बीजेपी को लगता है कि अगर तेजप्रताप कमजोर होते हैं तो उनके विरोधी तेजस्वी मजबूत होंगे. और अगर तेजप्रताप की ताकत बढ़ती है तो फिर दोनों भाइयों में सत्ता के लिए टकरार चलती रहेगी. बीजेपी की जीत के लिए तेजप्रताप का मजबूत होना और सत्ता संघर्ष जारी रहना जरूरी है.

(अमित कुमार सिंह की रिपोर्ट)

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First published: September 21, 2019, 8:35 AM IST
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