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तेजप्रताप यादव ने काटा रामचंद्र पूर्वे का पत्ता, विधानसभा में दिखाया विक्ट्री साइन

तेजप्रताप यादव को रामचंद्र पूर्वे का सबसे प्रबल विरोधी माना जाता है
(फाइल फोटो)
तेजप्रताप यादव को रामचंद्र पूर्वे का सबसे प्रबल विरोधी माना जाता है (फाइल फोटो)

रामचंद्र पूर्वे (Ramchandra Purvey) ने कहा कि हम खुश हैं क्योंकि हमने खुद लालू जी (Lalu Prasad) को इस दायित्व से मुक्त होने की इच्छा जताई थी. उन्होंने कहा कि हम ना तो किसी से नाराज हैं और ना ही दुखी हैं.

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पटना. आरजेडी (RJD) के नए प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर जगदानंद सिंह (Jagdanand Singh) की ताजपोशी लालू परिवार में तेजप्रताप यादव (Tejpratap Yadav) मोर्चे की जीत मानी जा रही है. इसका प्रमाण खुद तेजप्रताप यादव ने विधानसभा में विक्ट्री साइन दिखा कर दिया. दरअसल तेजप्रताप यादव नहीं चाहते थे कि इस बार पार्टी की कमान फिर से रामचंद्र पूर्वे (Ramchandra Purvey) को मिले, इसको लेकर उन्होंने अपने पिता लालू से भी बात की थी. पहले ये माना जा रहा था कि लालू परिवार का विश्वास फिर से रामचंद्र पूर्वे के प्रति ही होगा लेकिन अचानक से जगदानन्द सिंह की ताजपोशी का फैसला सामने आया.

पूर्व बोले- हमें चाचा कहते हैं तेजप्रताप

इस फैसले की खुशी जहां तेजप्रताप यादव के चेहरे पर दिख रही थी तो वहीं गम रामचंद्र पूर्वे के चेहरे पर. हालांकि पूर्वे ने कहा कि हम खुश हैं क्योंकि हमने खुद लालू जी को इस दायित्व से मुक्त होने की इच्छा जताई थी. उन्होंने कहा कि हम ना तो किसी से नाराज हैं और ना ही दुखी हैं. तेजप्रताप यादव मुझे अंकल कह कर बुलाते हैं. वो मेरे भतीजे हैं फिर उनसे किस बात की नाराजगी. रामचन्द्र पूर्वे ने कहा कि कहीं कोई कन्फ्यूजन नहीं है और हम आगे भी संगठन से जुड़े रहेंगे. हम जगदानन्द सिंह के साथ मिलकर तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाकर ही दम लेंगे.



तेजस्वी के करीबी हैं पूर्वे
दूसरी तरफ तेजप्रताप यादव की बात करें तो रामचंद्र पूर्वे को तेजस्वी यादव का सबसे करीबी माना जाता है. यही कारण है के तेजप्रताप नहीं चाहते थे कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद पर एक बार फिर से पूर्वे काबिज हों. तेजप्रताप यादव खुलकर पूर्वे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते रहे हैं. उन्होंने रामचंद्र पूर्वे पर लोकसभा चुनाव के पहले ही आरोप लगाया था कि वह पार्टी के अंदर मनमानी कर रहे हैं

लालू ने सुनाया था फैसला !

कहा ये भी जा रहा है कि लालू ने रिम्स से ही जगदानंद सिंह को कमान सौंपे जाने का फरमान जारी कर दिया था. लालू जानते थे कि इस वक्त उनकी पार्टी से सामने दोहरी चुनौती है. पार्टी को विधानसभा चुनाव में जीत दिलाने और संगठन को मजबूत करने के लिए जगदानंद सिंह जैसे ही किसी दमदार चेहरे की जरूरत है और अंतत: जगदा बाबू की ताजपोशी का रास्ता तय हो गया.

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