Bihar Politics: CM नीतीश को चुनौती दे रहे तेजस्वी में पप्पू यादव जैसा दम क्यों नहीं दिख रहा?

क्या विपक्ष के नेता के तौर पर फेल हो गए हैं तेजस्वी यादव?

क्या विपक्ष के नेता के तौर पर फेल हो गए हैं तेजस्वी यादव?

Bihar News: पप्पू यादव जैसे नेता आज बिहारी जनमानस की आवाज बनकर उभरे हैं, ऐसे में तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी पर सवाल उठ रहे हैं कि जो बिहार का मुख्यमंत्री बनने की आकांक्षा रखते हैं वे लोगों की मुसीबत के समय उनके साथ क्यों नहीं हैं?

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पटना. कोरोना वायरस का संक्रमण बिहार के गांव-गांव में फैल चुका है. लगातार हो रही मौतों से त्राहिमाम की स्थिति है. राज्य सरकार कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए अपने स्तर पर लगी हुई है. पटना हाईकोर्ट लगातार बिहार सरकार द्वारा किए जा रहे उपायों को नाकाफी बताते हुए कठघरे में खड़ा कर रहा है. वहीं, इस महामारी के बीच एक बार फिर से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार को गद्दी छोड़ने तक की चुनौती दे दी है. तेजस्वी यादव ने कहा कि हम विपक्ष की भूमिका को पूरी जिम्मेदारी के साथ निभा रहे हैं. नीतीश जी से अब राज्य नहीं संभल रहा है तो सत्ता छोड़ें. इसके बाद हम आपको बताते हैं कि इस समय सरकार कैसे चलाई जाती है. तेजस्वी के इस हमले के बाद बिहार के सियासी गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि तेजस्वी विपक्ष में क्या अपनी भूमिका निभा पा रहे हैं?

दरअसल, तेजस्वी यादव का ट्रैक रिकॉर्ड तो यही कहता है कि जब भी कोई ऐसी आपदा आती है जो मीडिया की सुर्खियां बनती है, उस वक्त वह अक्सर गायब ही रहते हैं. ऐसे बहुत से मौके रहे जब तेजस्वी की भूमिका जनता के बीच दिखनी चाहिए थी, लेकिन वह नहीं दिखे. एक बार फिर जब पूरा बिहार कोरोना के कहर को झेल रहा है, विपक्ष सीन से लगभग गायब ही दिख रहा है. हां, रूटीन से उनका सोशल मीडिया एक्टिव रहता है और अपनी मौजूदगी वे वहां दर्ज करवाते रहते हैं. लेकिन, इस कोरोना संकट के बीच उनकी गौरमौजूदगी लोगों को काफी खल रही है.

जब 33 दिनों तक गायब रहे तेजस्वी

तेजस्वी न सिर्फ राजद के नेता हैं, बल्कि कांग्रेस और वमदलों के एक मजबूत गठबंधन का नेतृत्व भी कर रहे हैं. कोरोना त्रासदी के बीच तेजस्वी का इस तरह से गायब रहना महागठबंधन के नेताओं को भी काफी खल रहा है. लोग इसकी तुलना मई 2019 के उस प्रकरण से करने लगे हैं, जब लोकसभा चुनाव में करारी हार झेलने के बाद तेजस्वी 33 दिन गायब रहे थे. तब पार्टी ने उनका यह कहते हुए बचाव किया था कि वे इलाज करवाने दिल्ली में थे.
तेजस्वी की यह बात लोगों को नागवार गुजरी

जुलाई, 2019 में जब बिहार बिहार प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा था और 12 जिलों में बाढ़ का जबरदस्त प्रकोप था. सरकारी आंकड़ों के अनुसार 26 लाख से अधिक लोग प्रभावित थे और बाढ़ के कारण सरकारी आंकड़ों में 77 लोगों की मौत हो चुकी थी. गैर सरकारी आंकड़ों में यह संख्या काफी अधिक थी. लोग पलायन को मजबूर थे, लेकिन विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अब भी गायब थे. लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद तेजस्वी का गायब होना लोगों को काफी नागवार गुजरा था.

पटना फ्लड के समय भी गायब रहे थे तेजस्वी



इसके दो महीने बाद सितंबर 2019 में हुई भारी बारिश के चलते पटना में जल जमाव हो गया था. राजधानी का बड़ा हिस्सा एक सप्ताह से अधिक समय तक डूबा रहा. जन अधिकार पार्टी के संयोजक पप्पू यादव जहां पटना की सड़कों पर डूब-डूबकर लोगों को सहायता पहुंचा रहे थे उस समय तेजस्वी बिहार से बाहर थे. सवाल तब भी उठे थे और तेजस्वी कठघरे में खड़े किए गए थे. हालांकि इस मौके पर भी राजद और महागठबंधन के नेताओं ने उनका बचाव किया था.

चमकी से 144 बच्चों की मौत, लापता रहे तेजस्वी

वर्ष 2019 में ही जून से सितंबर के बीच उत्तर बिहार के कई जिलों में चमकी बुखार से बच्चों की मौत हुई थी. इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही भी सामने आई थी. 144 से अधिक बच्चे असमय काल केगाल में समा गए थे. बिहार के 16 जिलों में इस बीमारी ने अपने पांव पसार लिए थे. नीतीश सरकार पर सवाल खड़े किए जा रहे थे. हाईकोर्ट बिहार सरकार से जवाब मांग रहा था, लेकिन विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव इस मौके पर भी मौजूद नहीं थे.

किसान आंदोलन में भी नहीं दिखा तेजस्वी का दम

इसी तरह बीते वर्ष शुरू हुए किसान आंदोलन के दौरान भी तेजस्वी यादव के लापता होने की चर्चा रही. लोग पूछते रहे कि आखिर बिहार में किसान आंदोलन को पंजाब और हरियाणा की तरह ताकत क्यों नहीं मिल रही? तेजस्वी कहां हैं? तब राजद की ओर से जवाब आया कि वे दिल्ली में हैं और किसान आंदोलन को सपोर्ट कर रहे हैं. हालांकि तब भी सवाल उठे कि वे दिल्ली में थे तो टिकारी या फिर सिंधु बॉर्डर पर किसान आंदोलनकारियों के साथ कभी नजर क्यों नहीं आए? हालांकि काफी फजीहत के बाद वे बिहार आए और किसान आंदोलन के समर्थन में सड़कों पर उतरे भी. पर न जाने क्या वजह रही कि वे जल्दी ही फिर गायब हो गए. हालांकि सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता बनी रही.

पप्पू यादव ने दिखाया कई नेताओं को आईना

कोरोना त्रासदी के बीच आज जब पप्पू यादव जैसे बुरे अतीत वाले नेता ने भी यह दिखा दिया कि वे जनसेवा के लिए किस स्तर तक मौजूद रहते हैं. कोरोना वार्ड में बेखौफ घूमना और स्वास्थ्य व्यवस्था की नाकामियों को जाहिर करना, लोगों के दर्द को साझा करना और सहायता के लिए हर स्तर पर तैयार रहना. शक्तिशाली नेताओं से टकरा जाने का उनका जज्बा ही है जो वह आज बिहारी जनमानस की आवज बनकर उभरे हैं. जाहिर है ऐसे में उस  तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी पर सवाल उठ रहे हैं कि जो बिहार का मुख्यमंत्री बनने की आकांक्षा रखते हैं और जनता की सेवा करने का मौका चाहते हैं, वे लोगों की मुसीबत के समय उनके बीच क्यों नहीं हैं?

सवाल दर सवाल  से घिरते जा रहे तेजस्वी

बहरहाल तेजस्वी यादव ने अपनी इस गैरमौजूदगी पर सफाई दी है कि वे अपने पिता लालू प्रसाद यादव के इलाज के सिलसिले में दिल्ली में हैं और जल्द ही बिहार लौटेंगे. लेकिन, उनकी यह दलील लोगों के गले नहीं उतर रही है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या तेजस्वी यादव की नजर में बिहार की ये समस्याएं कोई मायने नहीं रखती हैं? पूरे लोकसभा-विधानसभा चुनाव के दौरान आक्रामक अंदाज में सरकार को घेरने वाले तेजस्वी को क्या विपत्ति की इस घड़ी में बिहार के लोगों के बीच नहीं रहना चाहिए? या फिर क्या विपक्ष के नेता के तौर पर वे फेल साबित हो चुके हैं? हालांकि बिहार में अब कोरोना के मामले घटने लगे हैं ऐसे में अगर तेजस्वी वापस भी आते हैं, तो भी कोरोना के चरम के समय उनका सीन से गायब रहना सवाल बना रहेगा.

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