तेजस्वी यादव को मिल गया लालू यादव का आशीर्वाद! मिलने लगे संकेत...

21 अगस्त को वापसी करने के बाद तेजस्वी (Tejaswi Yadav) ने कई बार ये संकेत दिए हैं कि उन्हें लालू यादव (Lalu Yadav) का आशीर्वाद प्राप्त हो गया है और उनकी राजनीति की अगली लाइन क्या रहने वाली है.

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: September 5, 2019, 11:38 AM IST
तेजस्वी यादव को मिल गया लालू यादव का आशीर्वाद! मिलने लगे संकेत...
ऐसे संकेत सामने आ रहे हैं कि लालू यादव की अनुपस्थिति में RJD का नेतृत्व संभाल रहे तेजस्वी यादव को लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद एक बार फिर आरजेडी के नेतृत्व का जिम्मा मिल गया है.
Vijay jha | News18 Bihar
Updated: September 5, 2019, 11:38 AM IST
पटना. क्या तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) के नेतृत्व में ही राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janta Dal) का भविष्य है? ये सवाल इसलिए उठ रहा है कि लालू यादव (Lalu Yadav) के छोटे बेटे और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव दोबारा राजनीतिक रूप से सक्रिय हो गए हैं. वह पार्टी को संगठित करने के साथ वोट बैंक बढ़ाने (Vote Bank) के लिए कई तरह की कवायद में लगे हैं और आरजेडी कार्यकर्ताओं (RJD Workers) में जोश भरने की पुरजोर कोशिश में लग गए हैं. जाहिर है राजनीतिक गलियारों में यही कहा जा रहा है कि उनके नेतृत्व पर एक बार फिर लालू यादव ने सहमति दे दी है. 21 अगस्त को वापसी करने के बाद तेजस्वी ने कई बार ये संकेत दिए हैं कि उन्हें लालू यादव का आशीर्वाद प्राप्त हो गया है.

आते ही RSS पर बोला हमला
21 अगस्त को पटना लौटते ही सबसे पहला हमला उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत पर किया और आरोप लगाया कि आरएसएस देश में आरक्षण खत्म करने की साजिश कर रही है. गौरतलब है कि आरक्षण वही मुद्दा है जिसने 2015 के चुनाव में बड़ा असर डाला था और इसी आधार पर आरजेडी की सत्ता में वापसी हुई थी. यानी तेजस्वी पिता लालू की लाइन पर ही आगे बढ़ेंगे.

21 अगस्त को दूध मंडी के लिए धरना पर बैठे

तेजस्वी जिस दिन पटना लौटे उसी दिन अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत प्रशासन ने पटना जंक्शन के सामने दूध बाजार को ध्वस्त कर दिया. नेता प्रतिपक्ष इसके विरोध में धरने पर बैठ गए. लगभग आधे घंटे तक तेज वर्षा होती रही, लेकिन वह धरना से नहीं हटे. रात करीब 11 बजे तेजप्रताप भी वहां पहुंच गए. जाहिर है इस बहाने उन्होंने यादवों को संदेश देने की कोशिश की कि तेजस्वी ही उनके नेता हैं.

Tejaswi Yadav Sit on dharna
पटना जंक्शन पर दूध मंडी को टूटने से बचाने के लिए धरने पर बैठे तेजस्वी यादव. (फाइल फोटो)


तेज प्रताप भी आए तेजस्वी के साथ
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इस बात के संकेत इससे भी मिलते हैं कि 21 अगस्त की देर रात तक जब तेजस्वी यादव पटना जंक्शन पर दूधवालों के समर्थन में धरना देते रहे. इसमें उनको बड़े भाई तेजप्रताप यादव का भी साथ मिला. इसके बाद तेजप्रताप ने 600 नए सदस्य बनाने के लिए पार्टी से सदस्यता रसीद ली है और इसके लिए 3000 रुपये भी जमा करवाए. जाहिर है तेजप्रताप ने अपने पुराने तेवर छोड़ दिए हैं और तेजस्वी का साथ देने को तैयार हैं.

तेजस्वी ने शुरू किया सदस्यता अभियान
इसके बाद 23 अगस्त को तेजस्वी यादव ने अपने निर्वाचन क्षेत्र राघोपुर का दौरा किया. इस क्षेत्र के लिए उन्होंने सदस्यता अभियान की शुरुआत की और कहा कि 50 लाख लोगों को पार्टी का सदस्य बनाने का टारगेट है. उन्होंने यह भी बताया कि पर्ची से सदस्य बनाने के साथ ही पार्टी ऑनलाइन सदस्यता अभियान भी चला रही है और युवाओं को जोड़ने पर जोर दे रही है.

Tejaswi Yadav
तेजस्वी यादव एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं और आरजेडी की कमान संभालने को तैयार हैं.


25 को विधायकों संग की बैठक
25 अगस्त को उन्होंने सभी विधायकों और जिलाध्यक्षों की बैठक बुलाई. बैठक में उन्होंने सदस्यता अभियान के लक्ष्य की समीक्षा की और नए टारगेट सेट किए. बड़ी बात ये रही कि इसका नेतृत्व भी उन्होंने खुद किया.

महागठबंधन की बैठक में सभी दल हुए शामिल
लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद पहली बार बिहार महागठबंधन की बैठक पटना में 27 अगस्त को हुई. पूर्व मुख्‍यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर आयोजित इस बैठक में बिहार महागठबंधन में शामिल सभी दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे. खास बात ये रही की तेजस्वी को अनुभवहीन बताने वाले जीतन राम मांझी भी साथ आ गए.  इसमें कई ज्‍वलंत मुद्दों पर विमर्श हुआ और साथ-साथ चलने की बात हुई. जाहिर है तेजस्वी की वापसी के बाद महागठबंधन दलों का फिर एक मंच पर आना ही तेजस्वी की उपलब्धि मानी जा रही है.

Mahagathbandhan
पूर्व सीएम राबड़ी देवी के आवास पर बैठक करते हुए महागठबंधन के नेता


अतिपिछड़ों को साधने की कवायद
बीते 3 सितंबर को तेजस्वी यादव ने ऐलान किया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में अतिपिछड़ों को वाजिब हक दिया जाएगा. तेजस्वी ने राजद अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ की बैठक में अतिपिछड़ों को गोलबंद होने का आह्वान करते हुए कहा कि संगठन में पंचायत से लेकर प्रदेशस्तर तक अतिपिछड़ों को 60 फीसदी भागीदारी दी जाएगी. बता दें कि मुस्लिम और यादव गठजोड़ के बीच अतिपिछड़ों को साथ लेकर ही लालू ने अपनी राजनीति परवान चढ़ाई थी.

इसके साथ ही तेजस्वी यादव पार्टी की लगातार बैठक ले रहे हैं. समीक्षा कर रहे हैं और आगे की रणनीति भी बना रहे हैं. जाहिर है तेजस्वी एक बार फिर खुद को सीएम नीतीश कुमार का विकल्प के तौर पर स्थापित करने की कोशिश में लग गए हैं.

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First published: September 5, 2019, 10:57 AM IST
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