क्या मुलायम परिवार का इतिहास दोहराएगा लालू का कुनबा?

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: August 26, 2019, 8:35 PM IST
क्या मुलायम परिवार का इतिहास दोहराएगा लालू का कुनबा?
क्या मुलायम परिवार का इतिहास दोहराने की ओर है लालू का कुनबा

यूपीए सरकार (UPA Government) में लालू प्रसाद यादव(Lalu Prasad Yadav) के जलवे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राजधानी (Rajdhani Express) जैसी सुपर फास्ट ट्रेनें (Superfast Trains) भी लालू के आने का इंतजार किया करती थीं. जब लालू प्रसाद यादव स्टेशन पहुंच जाते थे तभी ट्रेन रवाना होती थी.

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एक समय था जब लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की गिनती देश के दिग्गज नेताओं (Senior Leaders) में की जाती थी. बिहार (Bihar) से लेकर केंद्र की राजनीति (Centre Politics) तक लालू प्रसाद यादव की धमक का अहसास समय-समय पर होता रहता था. यूपीए सरकार (UPA Government) में लालू प्रसाद यादव के जलवे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राजधानी (Rajdhani Express)  जैसी सुपर फास्ट ट्रेनें भी लालू के आने का इंतजार किया करती थीं. जब लालू प्रसाद यादव स्टेशन पहुंच जाते थे तभी ट्रेन रवाना होती थी. कमोबेश यही हाल एयर इंडिया या दूसरी एविएशन कंपनियों के साथ भी था. समय का चक्र बदला लालू प्रसाद यादव चारा घोटाला (Fodder Scam) में सजायाफ्ता हो गए. नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव से बिहार की गद्दी ही नहीं छीनी राजनीति में भी हाशिए पर खड़ा कर दिया. बिहार में सत्ता जाने के बाद लालू केंद्र की राजनीति में भी हाशिए पर चले गए. अब मीडिया रिपोर्ट्स (MEDIA REPORTS) से पता चल रहा है कि उनके छोटे बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ही उनको पार्टी की मुख्यधारा से बेदखल कर देना चाहते हैं.

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बिहार से लेकर केंद्र की राजनीति तक लालू प्रसाद यादव की धमक का अहसास समय-समय पर होता रहता था.


मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो आरजेडी के कुछ नेताओं ने तेजस्वी यादव को पार्टी की कमान देने का मन बना लिया है. हालांकि, इस कदम का आरेजेडी के ही कुछ नेता विरोध कर रहे हैं. यानी तेजस्वी को पार्टी की कमान देने को लेकर आरजेडी दो फाड़ हो गई है. पार्टी के कुछ सीनियर नेता तेजस्वी को कमान देने के खिलाफ हैं. ऐसे में विपक्षी पार्टियां ने भी कहना शुरू कर दिया है कि ज्यादा संभावना है कि यूपी में जिस तरह से मुलायम सिंह यादव के साथ हुआ वही हाल बिहार में लालू प्रसाद यादव के साथ होने वाला है?

तेजस्वी को लेकर पार्टी दो फाड़!

बता दें कि चारा घोटाले में सजायाफ्ता हो जाने के कारण लालू प्रसाद ने सक्रिय राजनीति से लंबे समय से दूरी बना रखी है. लालू प्रसाद यादव राजनीति से क्या दूर हुए उनको गंभीर बीमारियों ने भी जकड़ लिया. ऐसे में पार्टी के ही कुछ बड़े नेताओं ने कहना शुरू कर दिया है कि अब कोई उम्मीद नहीं बची है कि लालू प्रसाद यादव अपने पुराने दिनों में फिर से लौट पाएं. इसलिए बेहतर है कि पार्टी को तेजस्वी यादव के हाथ में पूरी तरह सौंप दिया जाए.

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लालू प्रसाद सक्रिय राजनीति से लंबे समय से दूरी बना रखी है.


ऐसे में एक बार फिर से सवाल उठने लगा है कि लालू प्रसाद यादव की विरासत को आखिर कौन संभालेगा? अगर तेजस्वी यादव आरजेडी की कमान संभालते हैं तो लालू प्रसाद यादव की बड़ी बेटी और राजनीति में तेजस्वी और तेजप्रताप से पहले कदम रखने वाली मीसा भारती का रुख क्या होगा?
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तेजस्वी को लेकर पार्टी में क्यों है दरार
आरजेडी के एक सीनियर नेता न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, 'तेजस्वी यादव को लेकर पार्टी के भीतर ही दरार पैदा हो गई है. पार्टी के कुछ नेताओं का साफ कहना है कि जब तक लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी हैं, वह तेजस्वी या परिवार के किसी अन्य सदस्य को अध्यक्ष की कुर्सी पर नहीं देख सकते हैं. इन नेताओं का साफ कहना है कि लालू प्रसाद यादव हमारे नेता हैं और आगे भी रहेंगे. कुछ नेताओं का तो साफ कहना है कि वह 2020 बिहार विधानसभा चुनाव लालू प्रसाद यादव की अगुआई में ही लड़ना पसंद करेंगे. ऐसे में आप बताइए कैसे तेजस्वी यादव अध्यक्ष बनेंगे.?'

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तेजस्वी यादव को लेकर पार्टी के भीतर ही दरार पैदा हो गई है.


बिहार की राजनीति को करीब से समझने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार संजीव पांडेय न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, 'पिछले कुछ सालों से आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार में पार्टी की कमान को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं. एक बार फिर से राजनीतिक गलियारे में चर्चा हो रही है कि तेजस्वी यादव पार्टी में तेजप्रताप और मीसा भारती के हस्तक्षेप से परेशान हैं. इसी को लेकर तेजस्वी नाराज होकर पिछले दिनों अज्ञातवास पर चले गए थे. जब लालू और राबड़ी की मनाने की सारी कोशिशें खत्म हो गईं तो अंत में तेजस्वी यादव के कुछ खास लोगों ने उनको अखिलेश यादव के रास्ते पर चलने के लिए मना लिया है. इसी कारण तेजस्वी यादव पटना वापस आए हैं.'

परिवार में तेजस्वी को लेकर आम सहमति नहीं!
बिहार की राजनीति को करीब से समझने वाले कुछ और जानकारों का भी मानना है कि तेजस्वी यादव अपने दोनों भाई-बहन को अब पार्टी की मुख्यधारा से अलग करना चाहते हैं. तेजस्वी पार्टी को अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं. ऐसे में अगले कुछ दिनों में लालू प्रसाद यादव का हाल मुलायम सिंह यादव की तरह ही हो जाए तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी! बहुत जल्द ही तेजस्वी यादव बिहार में अखिलेश यादव वाली भूमिका में आ सकते हैं!

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तेजस्वी पार्टी को अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं


वहीं राज्यसभा सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता मनोज झा ने ऐसी किसी संभावना से साफ इनकार किया है. मनोज झा न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, 'यह एक कपोल कल्पना है. काल्पनिक बातों पर मैं कुछ भी नहीं कह सकता.'

बता दें कि तेजस्वी यादव पिछले दिनों ही अज्ञातवास से लौटे हैं. अज्ञातवास से लौटने के बाद उन्होंने पार्टी में अपनी सक्रियता पहले से ज्यादा कर ली है. रविवार को पहली बार उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव ने जेडीयू के राज्यसभा सांसद रामचंद्र प्रसाद (आरसीपी) पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए. लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद यह पहला मौका है जब तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके नीतीश कुमार के सबसे निकट सहयोगी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया. तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार और सुशील मोदी से पूछा कि भ्रष्टाचार पर कार्रवाई सिर्फ लालू परिवार तक ही सीमित क्यों है?

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तेजस्वी पार्टी को अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं


कुल मिलाकर तेजस्वी यादव के एक बार फिर से सक्रिय होने पर बिहार की राजनीति गर्मा गई है. साथ ही आरजेडी के अंदर भी राजनीति गर्म होने वाली है. जहां पार्टी के कुछ बड़े नेताओं का साफ मानना है कि हालिया लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के लिए तेजस्वी यादव और उनके सिपहसलाहकारों को जिम्मेवारी लेनी चाहिए. वहीं कुछ नेताओं का मानना है कि तेजस्वी को पार्टी की कमान पूरी तौर पर ले लेनी चाहिए.

यही कारण है कि पार्टी की पिछली कई बैठकों में तेजस्वी का आने का इंतजार होता रहा था, लेकिन वह नहीं आए. लगातार दो बैठकों में तेजस्वी यादव ने शिरकत नहीं की, लेकिन बीते रविवार को पार्टी के सभी विधायकों और नेताओं की मीटिंग में वह शामिल हुए. इस दौरान तेजस्वी यादव ने पार्टी की सदस्यता अभियान की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सदस्य बनाकर की. पार्टी ने 50 लाख सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा है और अब तक एक लाख से ज्यादा लोग सदस्य बन चुके हैं.

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First published: August 26, 2019, 7:43 PM IST
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