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क्या बिहार बंद के बहाने तेजस्वी के नेतृत्व क्षमता की परख होगी?
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News18 Bihar
Updated: December 21, 2019, 9:39 AM IST
क्या बिहार बंद के बहाने तेजस्वी के नेतृत्व क्षमता की परख होगी?
बिहार की जनता को दो दिनों के भीतर ही दो बंद का सामना करना पड़ रहा है तो इसके पीछे तेजस्वी यादव की जिद को कारण माना जा रहा है.

आरजेडी के बिहार बंद को सत्तारूढ़ पार्टी पूरी तरह से नकारते हुए कह रही है कि तेजस्वी यादव की जिद की वजह से बंद का आयोजन किया जा रहा है क्योंकि वे महागठबंधन में शामिल दलों को दिखाना चाहते हैं कि उनकी पार्टी सबसे मजबूत है और वही नेतृत्व कर सकते हैं.

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पटना. ''हम लोग 21 को शांतिपूर्ण तरीके से प्रतिरोध करेंगे, बिहार बंद करेंगे. पार्टी की ओर से भी कार्यकर्ताओं को निर्देशित कर दिया गया है. फिर भी अगर पुलिस ने किसी पर बल प्रयोग किया, नीतीश कुमार ने कुछ चालाकी दिखाने की कोशिश की, तो अंजाम बुरा होगा."  शुक्रवार को अपने इस ट्वीट के माध्यम से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दो संदेश स्पष्ट तौर पर देने की कोशिश की. पहला तो वे लड़ाई तो केंद्र सरकार के CAA और NRC के मुद्दे पर लड़ रहे हैं, लेकिन उनके निशाने पर सीएम नीतीश कुमार हैं. वहीं दूसरा ये कि अपने कार्यकर्ताओं के आह्वान साथ अपने सहयोगी दलों को यह संदेश देने की कोशिश भी की कि विपक्ष में अगर कोई कद्दावर नेता है तो वह तेजस्वी यादव ही है.

वहीं, दूसरी ओर बिहार के राजनीतिक गलियारों में ये बात आम चर्चा का विषय है कि 19 दिसंबर को लेफ्ट के बंद से अलग रहकर आरजेडी ने अपनी ताकत का अहसास करवा दिया क्योंकि वह उतना सफल नहीं रहा. वहीं 21 दिसंबर के बंद से यह साबित करेंगे कि जमीन पर विपक्ष की ताकत तेजस्वी के साथ खड़ी है.

बिहार बन्द  या  तेजस्वी का 'शक्ति प्रदर्शन'



21 दिसंबर का बिहार बंद आरजेडी का विरोध या फिर तेजस्वी यादव का शक्ति प्रदर्शन है? इस बात को सिरे से इनकार करते कांग्रेस नेता प्रेम चन्द्र मिश्रा कहते हैं कि तेजस्वी यादव ने पहले बंद का ऐलान किया था. हर पार्टी का अपना अलग-अलग कार्यक्रम होता है. आरजेडी ने भी अपना कार्यक्रम रखा है. जिसमें कांग्रेस समर्थन कर रही है. हालांकि आरजेडी और कांग्रेस  हैं कि तेजस्वी यादव ने पहले बिहार बंद एलान किया था इसलिए  बिहार बंद है.


ये बन्द तेजस्वी का लिटमस टेस्ट होगा
जेडीयू और बीजेपी के नेता भी कहते हैं कि तेजस्वी यादव बिहार बंद के बहाने  अपने नेतृत्व की तलाश कर रहे हैं. 21 दिसम्बर के बिहार बंद तेजस्वी यादव के लिए लिटमस टेस्ट साबित होने वाला है. क्योंकि इससे पहले तेजस्वी यादव ने अपने नेतृत्व में इससे बड़ा आयोजन नहीं किया था. हालांकि तेजस्वी यादव ने इससे पहले अपने नेतृत्व में लोकसभा का चुनाव जरूर लड़ा था, लेकिन उस में असफल रहे थे.

'खुद को नेता मनवाना चाहते हैं तेजस्वी'
बिहार सरकार के मंत्री मदन सहनी कहते हैं कि तेजस्वी यादव को पूरी जनता नकार चुकी है. वह गंभीर नेता नहीं है. वो विधान सभा की कार्यवाही में शामिल तक नहीं होते है, महीनों गायब रहते है.  लेकिन गाहे-बगाहे इस तरह का आयोजन वह करते रहते हैं. वहीं बीजेपी प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल कहते हैं कि ये बंद तेजस्वी का शक्ति प्रदर्शन ही है. तेजस्वी यादव महागठबंधन के अंदर अपने नेतृत्व को साबित करना चाहते हैं. इसलिए इसका आयोजन किया गया है.




तेजस्वी ने बंद का एलान पहले किया था
हालांकि बीजेपी-जेडीयू के दावों से इतर यह भी एक तथ्य है कि जिस दिन बिल पेश हो रहा था आरजेडी उसी दिन से विरोध कर रही है और आरजेडी ने तुरंत ही बिहार बंद का ऐलान किया था. आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानन्द सिंह ने कहा कि लगातार अपने बंद को लेकर तैयारी कर रहे थे. नुक्कड़ सभा, मशाल जुलूस और बंद को लेकर आम लोगों से समर्थन ले रहे थे.




हर बड़े मसले महागठबंधन बंट जाता है
बहरहाल बड़ा सवाल ये है कि हर बड़े मसले पर महागठबंधन के दल आपस में बंट जाते हैं. लोकसभा चुनाव के बाद भी महागठबंधन के अंदर इस पर बड़ी बहस हुई थी, लेकिन इस बार नागरिक संशोधन कानून पर भी महागठबंधन टुकड़े-टुकड़े में बंट चुका है. महागठबंधन के कुछ दल वाम दल के बंद में गए. तो कुछ  दल आरजेडी के बन्द को समर्थन कर रहे हैं. लिहाजा इस बात से सत्तारूढ़ दल खुश है कि उन्हें बड़ा विरोध नहीं झेलना पड़ रहा है.


माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव अपने बल पर इसे सफल करना चाहते हैं. क्योंकि मसला राष्ट्रीय है. नागरिक संशोधन कानून के विरोध में यह बंद है. सारा विपक्ष एक मंच पर आने की बात कहता है. लेकिन 19 दिसंबर को वाम दलों ने बंद का आयोजन किया. जिसमें आरजेडी शामिल नहीं हुई. वहीं आरजेडी के आज के बंद में इसमें कांग्रेस छोड़ कोई भी विपक्षी पार्टी खुले तौर पर शामिल नहीं हो रही है.


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First published: December 21, 2019, 9:25 AM IST
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