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बिहार विधानमंडल मॉनसून सत्र: ढूंढते रह गए मीडिया के कैमरे लेकिन नहीं पहुंचे तेजस्वी यादव

शुक्रवार को पूरी उम्मीद थी कि तेजस्वी विधानसभा आएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ
(तेजस्वी यादव की फाइल फोटो)
शुक्रवार को पूरी उम्मीद थी कि तेजस्वी विधानसभा आएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ (तेजस्वी यादव की फाइल फोटो)

सत्तारूढ़ दल के नेताओं के साथ ही उनकी पार्टी आरजेडी को भी यह उम्मीद थी कि तेजस्वी यादव विधान मंडल के सत्र में शामिल होने जरूर आएंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका.

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बिहार विधानमंडल के मॉनसून सत्र की शुरुआत शुक्रवार से हुई. सत्र में सभी की निगाहें नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की तरफ थी लेकिन वो नहीं पहुंच सके. सदन की कार्यवाही में भाग लेने सीएम नीतीश कुमार, पूर्व सीएम राबड़ी देवी भी पहुंची लेकिन तेजस्वी यादव नहीं पहुंच सके. इस दौरान जब राबड़ी देवी से तेजस्वी को लेकर सवाल पूछे गए तो वो झल्ला उठीं और उन्होंने यहां तक कह दिया कि वो आपके ही घर में है.

घरवालों तक को पता नहीं

दरअसल लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही तेजस्वी यादव लापता हैं और किसी को ये जानकारी नहीं है कि आखिर वो हैं कहां. विधानमंडल के सत्र में आने को लेकर ये तय माना जा रहा था कि तेजस्वी फिर से मोर्चा संभालेंगे लेकिन ऐसा हो नहीं सका. उनके अलावा लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को भी मीडिया के कैमरे सदन की कार्यवाही के दौरान खोजते रहे.



बीमार या फिर फरार हैं तेजस्वी ?
तेजस्वी की गैरमौजूदगी को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है. आरजेडी का कोई नेता तेजस्वी को बीमार बताता है तो कोई नेता कहता है कि वो विश्व कप का मैच इंज्वाय कर रहे होंगे. इसके साथ ही तेजस्वी के बीमार होने की भी खबरें मिल रही हैं लेकिन वो कहां हैं और कब पटना लौटेंगे इसको लेकर कोई जवाब न तो पार्टी स्तर से और ना ही परिवार स्तर से मिल सका है.

पार्टी को थी उम्मीद 

सत्तारूढ़ दल के नेताओं के साथ ही उनकी पार्टी आरजेडी को भी यह उम्मीद थी कि तेजस्वी यादव विधान मंडल के सत्र में शामिल होने जरूर आएंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका. लोगों का कहना था कि तेजस्वी सत्र  शुरू होने से पहले पटना आ जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका. सदन से तेजस्वी की गैरमौजूदगी और राबड़ी देवी के बयान ने भी सत्तारूढ़ दल के लोगों को राजद पर चुटकी लेने का मौका दे दिया है.

मुद्दों की भरमार, पर विपक्ष लाचार

मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से बच्चों की मौत का सिलसिला, सरकारी अस्पतालों का हाल, अपराधों की स्थिति, नियोजित शिक्षकों का समान काम के लिए समान वेतन का मुद्दा और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा जैसे कई मुद्दे हैं जिसपर सरकार को एकजुट विपक्ष घेर सकता है, लेकिन सवाल यही है कि क्या विपक्ष भी एकजुट रह पाएगा ?

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