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नीतीश फॉर्मूले के साथ नीतीश विरोध की राजनीति में कामयाब हो पाएंगे तेजस्वी !
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Vijay jha | News18 Bihar
Updated: February 8, 2019, 1:30 PM IST
नीतीश फॉर्मूले के साथ नीतीश विरोध की राजनीति में कामयाब हो पाएंगे तेजस्वी !
तेजस्वी यादव

तेजस्वी की इस पूरी यात्रा में केन्द्र सरकार के साथ नीतीश कुमार उनके निशाने पर रहेंगे ही. अपनी इस यात्रा के दौरान जनता तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश करेंगे. हालांकि यह संयोग ही है कि जनता तक संवाद पहुंचाने के जिस फॉर्मूले पर बीते 13 वर्षों से नीतीश कुमार चलते रहे हैं उसी पर तेजस्वी यादव भी आगे बढ़ रहे हैं.

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बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव गुरुवार से 'आरक्षण बढ़ाओ-बेरोजगारी बढ़ाओ' यात्रा के पहले चरण के दौरे पर निकल चुके हैं. आज इसी क्रम में वे आज सुपौल में हैं. गुरुवार को दरभंगा से इसकी शुरुआत करते हुए उन्होंने बेरोजगारी के मुद्दे पर जहां केन्द्र सरकार पर निशाना साधा वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी अपने टारगेट में लिया.

जाहिर है तेजस्वी यादव की इस पूरी यात्रा में मोदी सरकार के साथ नीतीश कुमार उनके निशाने पर रहेंगे ही. साथ ही अपनी इस यात्रा के दौरान जनता तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश करेंगे. हालांकि यह संयोग ही है कि जनता तक संवाद पहुंचाने के जिस फॉर्मूले पर बीते 13 वर्षों से नीतीश कुमार चलते रहे हैं उसी पर तेजस्वी यादव भी आगे बढ़ रहे हैं.

दरअसल यात्राओं के जरिये जनता से सीधा संवाद करने का फॉर्मूला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को खूब भाता है. मुख्यमंत्री साल भर काम करने के बाद अमूमन साल के आखिरी महीने में हर बार राज्य के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा पर निकलते हैं और जमीनी हकीकत जानने की कोशिश करते हैं. अब तक वे 12 यात्रा कर चुके हैं.

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नीतीश कुमार ने अपनी पहली यात्रा की शुरुआत 12 जुलाई, 2005 को शुरू की. जिसका नाम न्याय यात्रा था. फिर 9 जनवरी 2009 को विकास यात्रा, 17 जून, 2009 को उन्होंने धन्यवाद यात्रा, 25 दिसंबर, 2009 को प्रवास यात्रा, 28 अप्रैल, 2010 को विश्वास यात्रा की.

09 नवंबर, 2011 को सेवा यात्रा, 19 सितंबर, 2012 को अधिकार यात्रा, 05 मार्च, 2014 को संकल्प यात्रा, 13 नवंबर, 2014 को संपर्क यात्रा की. वर्ष 2016 में समीक्षा यात्रा और 2017 में निश्चय यात्रा भी कर चुके हैं. 5 दिसंबर 2018 में विकास कार्यों की समीक्षा यात्रा निकाल चुके हैं.

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नीतीश कुमार के साथ जब तेजस्वी यादव सत्ता में थे तो वे अक्सर उन्हें अपना राजनीतिक गुरु बताते थे. अब जब गुरु और शिष्य अलग हो गए हैं तब भी शिष्य अपने गुरु के गुर को फॉलो कर रहे हैं.

आपको याद होगा कि नीतीश कुमार की तर्ज पर ही फरवरी 2018 में कटिहार से संविधान बचाओ न्याय यात्रा की शुरुआत की थी. इसके बाद उन्होंने भी 27 जुलाई 2018 को बोधगया से साइकिल यात्रा निकाली.

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17 जनवरी को नीतीश कुमार के लोकसंवाद और जनता दरबार की तर्ज पर ही ट्विटर पर चौपाल लगाई और अब 'आरक्षण बढ़ाओ-बेरोजगारी हटाओ' यात्रा के पहले चरण पर निकल चुके हैं. दरभंगा से इसकी शुरुआत हो चुकी है और अब यह सुपौल और भागलपुर जाएगी.

बहरहाल ये साफ है कि तेजस्वी यादव इस मामले में वह नीतीश कुमार के फॉर्मूले को अपना कर जनता से जुड़ने और अपनी बात सीधा संवाद के जरिये पहुंचाने की कवायद में लगे हैं. देखना दिलचस्प होगा कि नीतीश के फॉर्मूले पर चलकर ही नीतीश विरोध की राजनीति कितनी कामयाब होगी?

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First published: February 8, 2019, 1:24 PM IST
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