'कमबैक' के बाद तेजस्वी यादव ने बदली अपनी रणनीति! अब इस फॉर्मूले पर कर रहे काम

बीते दिनों में तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के वक्तव्यों, उनके ट्वीट्स और अन्य संबोधनों पर नजर डालें तो आप साफ समझ पाएंगे कि अब वे किसी बात को लेकर व्यक्तिगत नहीं होते.

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: September 10, 2019, 9:08 PM IST
'कमबैक' के बाद तेजस्वी यादव ने बदली अपनी रणनीति! अब इस फॉर्मूले पर कर रहे काम
तेजस्वी यादव ने जनमानस के मिजाज को पढ़ते हुए अपनी रणनीति में बदलाव के संकेत दिए हैं.,
Vijay jha | News18 Bihar
Updated: September 10, 2019, 9:08 PM IST
पटना. तेजस्वी यादव  (Tejaswi Yadav) ने जब से सक्रिय राजनीति (Active Politics) के लिए दोबारा वापसी की है तब से ही उनके तेवर बदले हुए हैं. वे अब न तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमलावर हैं और न ही आपत्तिजनक भाषा (Offensive language) का इस्तेमाल करते हैं. यही नहीं वे पीएम मोदी (PM Modi) मानस के बदलते मिजाज और बदल रही राजनीति के बीच उन्होंने अपनी रणनीति (Strategy) भी बदल ली है.

अब नहीं बोलते 'पलटू चाचा' और 'चाचा 420'
बीते 21 अगस्त को तेजस्वी यादव ने बिहार की राजनीति में दोबारा वापसी की है, तभी से एक बार भी उन्होंने सीएम नीतीश कुमार के लिए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग नहीं किया है. वरना लोकसभा चुनाव के दौरान उनकी कोई भी स्पीच उठाकर देख लें तो 'पलटू चाचा और चाचा 420' शब्द तो उनका तकिया कलाम हो गया था. हर सभा में सीएम नीतीश को आरजेडी से अलग होने के लिए कोसते रहते थे. अब तेजस्वी अगर सवाल भी करते हैं तो आदरणीय नीतीश जी, माननीय नीतीश जी, मुख्यमंत्री नीतीश जी जैसे शब्दों को अपने संबोधन में इस्तेमाल करते हैं. जाहिर है अब वे राजनीतिक संभावनाओं को देखते हुए ऐसी भाषा का प्रयोग करने से बच रहे हैं.

हर बात के लिए पीएम मोदी को जिम्मेदार नहीं ठहराते

तेजस्वी यादव ने अपनी रणनीति में अहम बदलाव ये भी किया है कि वे अब पीएम मोदी पर निशाना नहीं साधते हैं. वे मुद्दों को जरूर उठा रहे हैं, लेकिन बचते-बचाते. धारा 370 के मुद्दे पर भी उन्होंने कुछ खास नहीं कहा. हालांकि इसे खत्म करने की प्रक्रिया पर सवाल जरूर उठाए. उन्होंने ट्रिपल तलाक कानून बनने के मसले पर भी ज्यादा कुछ नहीं बोला. इसमें भी खास बात ये रही कि पीएम मोदी को एक बार भी टारगेट नहीं किया. जाहिर है, तेजस्वी को अपने वोट बैंक (मुस्लिम वोट) की फिक्र तो है, लेकिन वे जनमानस के मिजाज को भी ताड़ गए हैं.

अतिपिछड़ों को अपने साथ लाने की पुरजोर कवायद
बीते 3 सितंबर को पटना में जब अति पिछड़ा प्रकोष्ठ की बैठक हुई तो तय किया गया कि पंचायत से लेकर प्रदेश स्तर तक अतिपिछड़ों को 60 फीसदी भागीदारी दी जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि नया बिहार बनाना है तो सभी अतिपिछड़ों को एकजुट होकर राष्ट्रीय जनता दल के झंडे के नीचे काम करना होगा.
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बता दें कि पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कई बार ये बात कही थी कि तेजस्वी एक खास जाति (यादव जाति) से ही घिरे रहते हैं और दूसरे मुंह ताकते रहते हैं, लालू ऐसा नहीं करते थे. जाहिर है तेजस्वी यादव ने अपनी सियासी रणनीति भी बदल ली है.

tejaswi yadav
तेजस्वी यादव को लेकर आरजेडी में भी कई सवाल उठने लगे थे, इस कारण भी उन्होंने अपनी साख पुनर्स्थापित करने की रणनीति अपनाई है.


मुद्दों के आधार पर सरकार से करने लगे हैं सवाल
बीते दिनों में तेजस्वी यादव के वक्तव्यों, उनके ट्वीट्स और अन्य संबोधनों पर नजर डालें तो आप साफ समझ पाएंगे कि अब वे किसी बात को लेकर व्यक्तिगत नहीं होते. बीते दिनों मॉब लिंचिंग, बढ़ते अपराध और बिहार में बीजेपी-जेडीयू के बीच बढ़ रही तकरार पर भी उन्होंने मुद्दे तो उठाए हैं, लेकिन संयमित भाषा का इस्तेमाल किया है. जाहिर है वे अब ऐसी परिस्थिति कतई नहीं लाना चाहते हैं, जिससे उनकी निगेटिव छवि बन जाए.

जमीन पर उतर आए तेजस्वी यादव
21 अगस्त को पटना वापसी के बाद 23 अगस्त को तेजस्वी यादव ने अपने निर्वाचन क्षेत्र राघोपुर का दौरा किया. इस क्षेत्र के लिए उन्होंने सदस्यता अभियान की शुरुआत की और कहा कि 50 लाख लोगों को पार्टी का सदस्य बनाने का टारगेट है. उन्होंने यह भी बताया कि पर्ची से सदस्य बनाने के साथ ही पार्टी ऑनलाइन सदस्यता अभियान भी चला रही है और युवाओं को जोड़ने पर जोर दे रही है. जाहिर है तेजस्वी यादव अब अपनी उस रणनीति पर चल रहे हैं, जिसमें आरजेडी को एक बार फिर खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं, वह भी जमीनी स्तर पर.

Tejaswi Yadav
हाजीपुर के राघोपुर में आरजेडी के सदस्यता अभियान की शुरुआत करते हुए तेजस्वी यादव.


महागठबंधन को साथ करने की कवायद में जुटे
लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद पहली बार बिहार महागठबंधन की बैठक पटना में 27 अगस्त को हुई. पूर्व मुख्‍यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर आयोजित इस बैठक में बिहार महागठबंधन में शामिल सभी दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे. खास बात ये रही की तेजस्वी को अनुभवहीन बताने वाले जीतन राम मांझी भी साथ आ गए. इसमें कई ज्‍वलंत मुद्दों पर विमर्श हुआ और साथ-साथ चलने की बात हुई. जाहिर है तेजस्वी की वापसी के बाद महागठबंधन दलों का फिर एक मंच पर आना ही तेजस्वी की उपलब्धि मानी जा रही है.

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First published: September 10, 2019, 8:40 PM IST
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