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तेजस्वी यादव ने CM नीतीश को बताया 'कथावाचक' और 'प्रवचनकर्ता', जानें पूरा मामला

News18 Bihar
Updated: October 23, 2019, 11:52 AM IST
तेजस्वी यादव ने CM नीतीश को बताया 'कथावाचक' और 'प्रवचनकर्ता', जानें पूरा मामला
NCRB की रिपोर्ट के अनुसार बिहार दंगों के मामले में देश में सबसे टॉप पर है. इसको लेकर तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार पर तंज कसा है. (फाइल फोटो)

तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश पर तंज कसते हुए लिखा कि Nagpur School of Riots के होनहार आज्ञाकारी शिष्य नीतीश कुमार के रहमोकरम से बिहार देश का सबसे बड़ा दंगाई प्रदेश बन गया है.

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पटना. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Record Bureau) ने बिहार में दंगों (Riots) के आंकड़े को लेकर हैरान करने वाली जानकारी दी है. दरअसल, भारत में दंगे तो कम हो गए हैं, लेकिन बिहार देशभर में होने वाले दंगों की राजधानी की तरह बन चुका है. यहां सबसे ज्यादा दंगों के केस दर्ज किए गए हैं. साल 2017 में बिहार में दंगों के 11,698 मामले दर्ज हुए. इसके बाद उत्तर प्रदेश का नंबर आता है. यहां दंगों के 8,990 मामले दर्ज हुए. महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर रहा. यहां दंगों के 7,743 मामले दर्ज हुए. गौरतलब है कि एक साल पहले वर्ष 2016 में भी बिहार में सबसे ज्यादा दंगे हुए थे. इसी बात को लेकर बिहार में नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) ने बिहार सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है.

नेता प्रतिपक्ष ने ट्विटर पर लिखा, 'बिहार के कथावाचक CM को हार्दिक बधाई. उनके अथक पलटीमार प्रयासों से देशभर में बिहार को दंगों में प्रथम स्थान मिला है. हत्‍या में द्वितीय, हिंसक अपराध में द्वितीय और दलितों के विरुद्ध अपराध में भी बिहार अग्रणी रूप से द्वितीय स्थान पर है. 15 वर्ष से राज्‍य गृह विभाग उन्हीं (सीएम नीतीश कुमार) के ही ज़िम्मे है.'


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इसके पहले भी तेजस्वी यादव ने एक ट्वीट किया और इसमें भी उन्होंने सीएम नीतीश पर तंज कसते हुए लिखा, 'Nagpur School of Riots के होनहार आज्ञाकारी शिष्य नीतीश कुमार के रहमोकरम से बिहार देश का सबसे बड़ा दंगाई प्रदेश बन गया है. बिहार में एक वर्ष में दंगों के कुल 11,698 मामले दर्ज किए गए. अब कुर्सी कुमार जी प्रवचन देंगे कि मैं सांप्रदायिकता से समझौता नहीं करता.'

तेजस्वी यादव का ट्वीट.


बता दें कि भारत में दंगे तो कम हो गए हैं, लेकिन दंगा पीड़ितों की संख्या बढ़ गई है. एनसीआरबी (NCRB) ने इस बारे में साल 2017 के आंकड़े जारी किए हैं. दंगा पीड़ितों की संख्या एक साल पहले की तुलना में 22 फीसदी तक ज्यादा थी. इस दौरान दंगों की संख्या में कमी जरूर आई.

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First published: October 23, 2019, 11:33 AM IST
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