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'आरक्षण बढ़ाओ' के बहाने मंडल पार्ट-2 की राजनीति आगे बढ़ा रहे तेजस्वी यादव !

'आरक्षण बढ़ाओ' के बहाने मंडल पार्ट-2 की राजनीति आगे बढ़ा रहे तेजस्वी यादव !

तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)

तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)

जातिगत आधार पर सियासी गणित की नई गोलबंदी तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं. 13 प्वाइंट रोस्टर का मुद्दा हो या फिर पिछड़े-दलित आरक्षण की सीमा 69 प्रतिशत किए जाने की वकालत हो, ये सब उसी की कवायद है.

    लालू यादव के छोटे बेटे और बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव 'आरक्षण बढ़ाओ- बेरोजगारी हटाओ' यात्रा के पहले चरण की शुरुआत कर चुके हैं. इसमें वे जातिगत जनगणना को सार्वजनिक करने, जिसकी जितनी भागीदारी-उसकी उतनी हिस्सेदारी, जैसी बातों  को जोर-शोर से उठा रहे हैं. जाहिर है उनकी इस यात्रा का उद्येश्य साफ है कि एक बार फिर आरक्षण के नाम पर आरजेडी की उसी राजनीतिक जमीन को फिर से मजबूत किया जाए जो लगातार 15 वर्षों तक बिहार में उनके शासन का आधार बनी थी.

    केन्द्र सरकार के गरीब सवर्णों  को आरक्षण के प्रावधान लागू किए जाने के फैसले का आरजेडी ने जिस तरह से विरोध किया, इससे साफ हो गया कि तेजस्वी यादव एक बार फिर 1990 के दशक की उसी राजनीति को हवा देना चाहती है जिसका प्रयोग लालू यादव ने सफलतापूर्वक किया है.

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    'भूरा बाल साफ करो'... 1990 के दशक में बिहार के कोने-कोने में फैला यही वो नारा था जो राष्ट्रीय जनता दल की ताकत बनी और वह लगातार बिहार की सत्ता पर 15 वर्षों तक काबिज रही थी. 'भूरा बाल'- यानि भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण और लाला (कायस्थ ), यानि सवर्ण जातियों के विरुद्ध यादवों, मुस्लिमों, पिछड़ों और दलितों को गोलबंद कर समाज में नफरत की आग लगाकर सत्ता का सुख भोगने का सबसे 'मारक' समीकरण.

    इसी दशक के राजनीतिक समीकरण पर गौर करें तो 'MY' यानि 'मुस्लिम-यादव' इक्वेशन की तूती बोलती थी. लेकिन बदले दौर में आरजेडी की कमान युवा तेजस्वी यादव के हाथों में है. वह जातिगत आधार पर सियासी गणित की नई गोलबंदी तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं. 13 प्वाइंट रोस्टर का मुद्दा हो या फिर पिछड़े-दलित आरक्षण की सीमा 69 प्रतिशत किए जाने की वकालत हो, ये सब उसी की कवायद है.

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    दरअसल आरजेडी को लग रहा है कि वह गरीब सवर्णों के आरक्षण का विरोध कर और पिछड़े दलितों की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग कर फिर से मंडल कमीशन के दौर की राजनीति वापस ला पाएगी. गौरतलब है कि इसी जातीय गोलबंदी का फायदा उठाकर लालू यादव ने अपनी राजनीतिक जमीन काफी मजबूत कर ली थी, जिसकी फसल वे आज तक काट रहे हैं.

    आरजेडी को लगता है कि उसने 2015 में जिस तरह आरक्षण पर मोहन भागवत के बयान को मुद्दा बनाया, और उसे भुनाकर बिहार में दोबारा सत्ता पर काबिज हो गई. आरजेडी शायद यही सोच रही है वैसा ही फिर दोहरा सकती है.

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    राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के उपेन्द्र कुशवाहा, हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के जीतनराम मांझी और विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी को साथ लाकर वह अपने आपको जातिगत आधार पर और मजबूत करने की कोशिश में है.



    बिहार के सभी वर्गों के लोग उनपर यकीन करते हैं. यही नहीं रामविलास पासवान जैसे बड़े दलित जनाधार वाले नेता भी आरजेडी के लिए चुनौती हैं जो एनडीए के साथ खड़े हैं. एक हकीकत ये भी है कि 1990 के बाद बीते 28 वर्षों में समाज ने बड़ी करवट ली है और एक पूरी पीढ़ी जवान हो गई है.


    इस पीढ़ी ने न तो मंडल राजनीति देखी है और न ही जातीय नफरत की आग का दौर नहीं देखा है. वह गैरबराबरी की पीड़ा से नहीं गुजर रहे हैं. ऐसे में आरजेडी का आरक्षण बढ़ाओ दांव कितना सफल होगा यह देखना दिलचस्प होगा.



    Tags: Bihar NDA, Bihar News, Nitish kumar, PATNA NEWS, Reservation, RJD, Tejaswi yadav, Upper Caste Reservation

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