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संगठन के विस्‍तार को लेकर 'चाचा-भतीजे' में ठनी, जानिए तेजस्‍वी यादव ने किसका दिया साथ
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News18 Bihar
Updated: February 26, 2020, 11:38 PM IST
संगठन के विस्‍तार को लेकर 'चाचा-भतीजे' में ठनी, जानिए तेजस्‍वी यादव ने किसका दिया साथ
तेजप्रताप यादव ने प्रदेश अध्‍यक्ष जगदानन्द सिंह पर साधा निशाना.

बिहार के पूर्व मुख्‍यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) अपनी पार्टी आरजेडी में हमेशा सभी पर हावी रहे हैं, लेकिन इस बार उन्‍हें प्रदेश अध्‍यक्ष जगदानन्द सिंह से जबरदस्त चुनौती मिल रही है.

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  • Last Updated: February 26, 2020, 11:38 PM IST
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पटना. बिहार के पूर्व मुख्‍यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) हमेशा से अपने आक्रामक तेवरों के कारण सब पर हावी होते रहे हैं, लेकिन शायद यह पहली बार है जब उनको आरजेडी प्रदेश अध्‍यक्ष जगदानन्द सिंह (Jagdanand Singh) से जबरदस्त चुनौती मिल रही है. सच कहा जाए तो दोनों नेताओं के बीच छात्र संगठन के विस्तार को लेकर ठन गई है और कोई भी अपने कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं है. यही नहीं, तेजस्‍वी यादव (Tejaswi Yadav) भी प्रदेश अध्‍यक्ष को कुछ कहने की हालत में नहीं है.

तेजप्रताप-जगदानन्द में जारी है शीतयुद्ध
तेजस्वी यादव की 'बेरोजगारी हटाओ रैली' के दौरान तेजप्रताप यादव ने खुले मंच से पार्टी के बड़े नेताओं को चुनौती देते हुए कहा था कि 2 दिन के भीतर वो छात्र संगठन का विस्तार कर लेंगे. साथ ही उन्‍होंने कहा था कि उन्हें पार्टी में किसी से कोई डर भी नहीं है. हालांकि तेजप्रताप जब यह बोल रहे थे तब किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर जेडीयू को ललकारते हुए उन्‍होंने छात्र संगठन के विस्तार के बारे में ऐसा बयान क्यों दिया. दरअसल, उस वक्‍त तेजप्रताप के निशाने पर प्रदेश अध्यक्ष जगदानन्द सिंह थे.

आरजेडी छात्र संगठन के संरक्षक हैं तेजप्रताप



तेजप्रताप यादव आरजेडी छात्र संगठन के संरक्षक हैं. ऐसे में वह चाहते हैं कि उनके मन मुताबिक संगठन में लोगों की नियुक्ति हो और मौजूदा छात्र संगठन के प्रदेश अध्यक्ष को हटाकर उनका पसंदीदा अध्यक्ष बनाया जाए, लेकिन जगदानन्द सिंह तेजप्रताप के इस फैसले को मानने को कतई तैयार नहीं हैं. इसी बात को लेकर सिंह और तेजप्रताप में अब ठन गई है और दोनों में से कोई भी एक कदम पीछे हटने को भी तैयार नहीं.

यही नहीं, तेजप्रताप यादव ने तेजस्वी की रैली से एक दिन पहले ही प्रदेश अध्यक्ष जगदानन्द सिंह से आरजेडी ऑफिस में करीब 1 घंटे तक बंद कमरे में मुलाकात की थी. सूत्रों के मुताबिक उन्‍होंने प्रदेश अध्यक्ष से यह गुजारिश भी की थी कि वो मौजूदा छात्र अध्यक्ष सृजन स्वराज को हटाकर उनके करीबी को प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत कर दें, लेकिन सिंह ने उनकी मांग को ठुकराते हुए मौजूदा अध्यक्ष को ही रैली की पूरी जिम्मेदारी सौंप दी. इसके बाद तेजप्रताप बौखला गए और उन्होंने मंच से ही जगदानन्द सिंह को खुली चुनौती दे दी कि अगले 2 दिनों के अंदर ही वो डंके की चोट पर छात्र संगठन का विस्तार कर देंगे. इस दौरान उन्‍होंने ये भी कहा कि वो सिर्फ अपने पिता लालू यादव से ही डरते हैं, जिस पर रैली में आए लोगों ने खूब तालियां बजाईं, लेकिन मंच पर बैठे सारे बड़े नेता उनके इस तेवर से नाराज हो गए. हालांकि नाराजगी को तुरत भांपकर तेजप्रताप ने झट से कहा कि हम लालू जी के अलावा जगदानन्द अंकल के अनुशासन से भी बहुत डरते हैं.

 

जगदानन्द ने कही ये बात
तेजप्रताप के इस तेवर को लेकर जगदानन्द बेहद नाराज हैं और सूत्रों के मुताबिक उन्‍होंने तेजस्वी से मिलकर अपना रुख भी साफ कर दिया है. जगदानन्द सिंह ने कहा है कि उम्र के इस आखिरी पड़ाव में मेरी अपनी कोई निजी इच्‍छा नहीं है लेकिन मैं चाहता हूं कि मेरी आंख बंद होने से पहले एक बार तेजस्वी आपको बिहार का मुख्यमंत्री बनते देखूं. यही मेरा और लालू का भी सपना है. इसके लिए पार्टी को अनुशासित रखना हमारे लिए बहुत जरूरी है, फिर इस अनुशासन के दायरे में सभी आते हैं. हालांकि तेजस्वी ने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा आप हमारे गार्जियन और पितातुल्य हैं. आप जो भी फैसला लेंगे हमें पूरा भरोसा है वह पार्टी की मजबूती के लिए ही होगा. तेजस्वी के समर्थन मिलने के बाद जगदानन्द सिंह और ज्यादा सशक्त हो गए हैं. उधर तेजप्रताप ने भी हाईकमान तक अपनी बात पहुंचा दी है.

तेजप्रताप को पहली बार मिली है ऐसी चुनौती
ये कोई पहला मौका नहीं जब तेजप्रताप यादव ने पार्टी और संगठन में अपनी धौंस दिखाई हो. याद कीजिए 2018 में कुछ इसी तरह से तेजप्रताप ने अपने एक चाहने वाले को प्रदेश का महासचिव बनाने के लिए तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष रामचन्द्र पूर्वे की कितनी फ़जीहत की थी. बाद में डंके की चोट पर तेजप्रताप ने राजेन्द्र पासवान को पार्टी का प्रदेश महासचिव भी बनवाया था. उस दौरान कई बार तो तेजप्रताप ने खुले तौर पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे रामचंद्र पूर्वे को भला-बुरा भी कहा था, लेकिन इस बार जगदानन्द पर तेजप्रताप की ना तो कोई धौंस चल रही है और ना ही उनका कोई तेवर ही काम आ रहा है. इसके पीछे एक बड़ी वजह ये भी है कि जगदानन्द सिंह लालू यादव और राबड़ी देवी के सबसे विश्वत और करीबियों में से एक हैं और वह शुरू से ही बहुत सख्त नेता रहे हैं. जानकार तो ये भी कहते हैं कि इनके खिलाफ खुद लालू यादव तक की भी बोलने की कभी हिम्मत नहीं होती थी. जाहिर है तेजप्रताप के लिए इस बार का दांव थोड़ा उल्टा पड़ने वाला है.

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First published: February 26, 2020, 11:37 PM IST
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