Lockdown: मालिक ने 6 मजदूरों को डेढ़ महीने तक खिलाया खाना, कोलकाता जाने के लिए नहीं मिला साधन तो गिफ्ट की नई साईकिल
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Lockdown: मालिक ने 6 मजदूरों को डेढ़ महीने तक खिलाया खाना, कोलकाता जाने के लिए नहीं मिला साधन तो गिफ्ट की नई साईकिल
छपरा से कोलकाता के लिए साइकिल से निकले मजदूर

कोलकाता (Kolkata) के सुदूर गांव के रहने वाले 6 मजदूर छपरा में टेंट हाउस के काम करते थे. शादी-ब्याह वाले लग्न के मौसम में मजदूरों को अच्छी आमदनी हो जाती थी लेकिन लॉकडाउन (Lockdown) ने सारी कमाई पर पानी फेर दिया

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पटना. लॉकडाउन (Lockdown) के डेढ़ महीने पूरे होने के बाद बाहर रह रहे मजदूरों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है. ना कंपनी में कोई काम, न ही कोई मजदूरी, जमा पूंजी भी खत्म होने के बाद वापस घर लौटना ही एकमात्र रास्ता दिखाई पड़ रहा है, ऐसे में लॉकडाउन की इस स्थिति में मजदूरों का पलायन लगातार (Migrant Labors) जारी है. बिहार के छपरा (Chapra) से भी पलायन की एक ऐसी ही तस्वीर आई जहां काम कर रहे कोलकाता (Kolkata)के 6 मजदूर साईकिल से ही वापस अपने घर यानी कोलकाता के लिए निकल पड़े.

छपरा से कोलकाता के लिए साईकिल से निकले मजदूर
कोलकाता के सुदूर गांव के रहने वाले 6 मजदूर छपरा में टेंट हाउस के काम करते थे. शादी-ब्याह वाले लग्न के मौसम में मजदूरों को अच्छी आमदनी हो जाती थी. टेंट दुकान के मालिक भी बंगाल के कारीगरों को इसलिए रखते हैं क्योंकि कोलकाता का टेंट का काम मशहूर होता है. लॉकडाउन कि स्थिति में डेढ़ महीने से काम बन्द होने के कारण कोई मजदूरी नहीं मिली. छपरा से वापस घर जा रहे मजदूर ज्योतिर हलधर ने बताया कि पिछले डेढ़ महीनों से सारा काम ठप हो गया था. मालिक ने रहम दिखाते हुए डेढ़ महीने हम सभी को खाना खिलाया पर अब उन्होंने भी कह दिया कि कब तक खिलाएंगे. घर वापस जाना ही एकमात्र उपाय बच गया.

घर जाने के लिए मालिक ने सबको खरीद कर दी नई साईकिल,
छपरा से कोलकाता वापस अपने घर लौट रहे संजय कर्मकार ने बताया कि छपरा से वापस घर जाने के लिए कोई साधन नहीं था. साधन की व्यवस्था और पास बनाने के लिए स्थानीय थाना से लेकर, SDO, DM तक दौड़ लगाई पर किसी ने नही सुनी. अंत मे टेंट हाउस के मालिक शशि सिंह ने सभी 6 मजदूरों को नई साईकिल खरीदकर दी और कहा कि इसी से अपने घर वापस लौट जाओ. मजदूर अशोक हलदर ने बताया कि मालिक ने कुछ पैसे भी दिए ताकि रास्ते में कोई दिक्कत नहीं हो. पटना पहुंचकर बेउर के पास सड़क किनारे पेड़ के नीचे आराम करते मजदूर संजय कर्मकार ने बताया कि कल छपरा से निकले थे अब चाहे जितने दिन लग जाये अपने घर कोलकाता पहुंच जाएंगे.



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