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जब टीएन शेषन ने कहा था- शहनाई बजाकर शांति नहीं लाई जा सकती

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: November 11, 2019, 11:31 AM IST
जब टीएन शेषन ने कहा था- शहनाई बजाकर शांति नहीं लाई जा सकती
टीएन शेषन ने भारतीय चुनाव प्रक्रिया में भारी बदलाव किए थे. (फाइल फोटो)

आज लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) चारा घोटाला (Fodder) मामले में रांची (Ranchi) के सेंट्रल जेल में हैं और टीएन शेषन (TN Seshan) दुनिया को अलविदा कह चुके हैं, लेकिन लोग दोनों के दो-ढाई दशक पुराने रिश्तों की चर्चा कर रहे हैं.

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  • Last Updated: November 11, 2019, 11:31 AM IST
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पटना.वर्ष 1990 से 1996 के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner- CEC) के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके भूतपूर्व चुनाव आयुक्त टीएन शेषन (TN Seshan) का 86 वर्ष की उम्र में रविवार की रात को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. देश में चुनाव राजनीति (Election Politics) को बदलने वाले शेषन पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे. तमिलनाडु (Tamil Nadu) कैडर के 1955 बैच के IAS ऑफिसर तिरुनेल्लई नारायण अय्यर शेषन (टीएन शेषन) ने देश के 10वें चुनाव आयुक्त के तौर पर अपनी सेवाएं दी थीं. उन्होंने अपने कार्यकाल में स्वच्छ एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन करवाया.

शेषन द्वारा की गई सख्ती के कारण उनका सरकार और कई नेताओं से विवाद भी हुआ था. यह भी एक वजह है कि टीएन शेषन को बिहारवासी भी बड़ी शिद्दत से याद करते हैं. खास तौर पर पर साल 1995 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से उनकी तनातनी की खबरें आज भी लोगों के जेहन में जिंदा हैं.

बिहार में बूथ कैप्चरिंग था बड़ा मुद्दा
दरअसल, शेषन ने चुनाव सुधार की शुरुआत 1995 में बिहार से की थी. तब प्रदेश में बूथ कैप्चरिंग का मुद्दा काफी बड़ा था. बूथ लूट रोकने और सुरक्षा के बंदोबस्त पुख्ता करने के लिए चुनाव आयोग ने पहली बार कई चरणों में चुनाव कराने का फैसला लिया. चार चरणों में कराए गए चुनाव के लिए कई बार चुनाव की तारीखों में बदलाव भी किया गया था.पारदर्शी चुनाव के लिए केंद्रीय पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया था, जिस कारण लालू यादव ने उनकी काफी आलोचना की थी.

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लालू यादव और टीएन शेषन के बीच टकराव की खबरें सुर्खियां बना करती थीं. (फाइल फोटो)


लालू ने परेशान करने का लगाया था आरोप
टीएन शेषन ही थे जिन्होंने चुनाव सुधार के लिए कहा था कि चुनाव में शहनाई बजाकर शांति नहीं लाई जा सकती है. जब वह चुनाव सुधार की पहल कर रहे थे तो लालू यादव ने संकेत की भाषा में स्पष्ट आरोप लगाया था कि वे पिछड़ी जाति के हैं और इसी वजह से उन्हें 'दो ब्राह्मण' परेशान कर रहे हैं. लालू यादव का इशारा तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन की ओर था.
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...तो शेषन की ही वजह से लालू 1995 में जीते थे!
साल 1995 में कई लोगों को तो ऐसा भी लग रहा था कि लालू यादव इस बार चुनाव हार जाएंगे. इस कारण लालू भी काफी चिढ़े हुए थे, लेकिन उस चुनाव में लालू ने दोबारा सत्ता हासिल की. राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह इसलिए हो पाया, क्योंकि दलितों और पिछड़ों का एक बहुत बड़ा तबका था, जिसने आजादी के बाद से उस चुनाव तक वोट डाला ही नहीं था, लेकिन टीएन शेषन के प्रयासों से पोलिंग बूथ तक पहुंचे और लालू यादव के पक्ष में जमकर वोटिंग की.

बड़ी संख्या में दलित-पिछड़े विधायक चुने गए
चुनाव प्रक्रिया पूरी हुई तो अखबारों में सुर्खियां यही थीं कि अमुक लोगों ने पहली बार वोट डाले. अमुक दलित मुहल्ले में आजादी के बाद पहली बार वोट डालने का अवसर मिला. जाहिर है दलितों और पिछड़ों के बीच एक अभूतपूर्व उत्साह देखा गया था. जब परिणाम आए तो लालू यादव की आशंका निर्मूल साबित हुई और वह दोबारा बिहार की सत्ता में वापस आए. उस चुनाव की खास बात यह थी कि इस चुनाव में आजादी के बाद दलित और पिछड़ी जाति के सबसे अधिक विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे थे.

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1990 से 1996 तक टीएन शेषन देश के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे. (फाइल फोटो)


लालू ने अपनी किताब में भी किया शेषन का जिक्र
कुछ महीनों पहले प्रकाशित अपनी किताब 'गोपालगंज टू रायसीना' में लालू यादव ने टीएन शेषन से अपनी तनातनी का जिक्र करते हुए लिखा, '90 के दशक में तत्कालीन मुख्य निर्वाचन आयुक्त टीएन शेषन शायद मेरे बारे में इस झूठे प्रचार के झांसे में आ गए और उन्होंने मान लिया कि मेरी पार्टी चुनावी हिंसा और बूथ कब्जे में शामिल रही होगी.'

लालू यादव ने वोटर ID बनाने का उड़ाया था मजाक
बिहार से टीएन शेषन की कई और भी यादें जुड़ी हैं. इनमें एक है वोटर आईडी कार्ड बनाने की पहल का लालू यादव द्वारा विरोध किया जाना. लालू ने तब दानापुर में एक जनसभा में इसका मजाक उड़ाते हुए कहा था कि जहां के लोग अपना कागज-पत्तर (दस्‍तावेज) खपरैल के बांस के फोफी में रखता है, बताओ तो वह मतदाता पहचान पत्र कहां से संभाल कर रखेगा? हालांकि, सच्चाई यह भी है कि यह वोटर आईकार्ड का ही कमाल है कि लोग अपना मतदान सही ढंग से कर पा रहे हैं.

टीएन शेषन ने लालू यादव को कहा था 'महान राष्ट्रभक्त'
वर्ष 1995 में एक इंटरव्यू में जब टीएन शेषन के कारण लालू यादव के 'टेंशन' को लेकर तत्कालीन चुनाव आयुक्त से सवाल पूछा गया था तो उन्होंने सपाट जवाब दिया था कि लालू प्रसाद यादव महान राष्ट्रभक्त हैं. टीएन शेषण ने एक बार बड़े जोरदार ढंग से यह भी कहा था कि चुनाव के समय न तो उनका बॉस प्रधानमंत्री है और न ही राष्ट्रपति, उनका बॉस सिर्फ और सिर्फ देश की जनता है.

 

 

 

इसलिए याद आ जाते हैं टीएन शेषन
भारतीय चुनाव व्यवस्था में शुचिता और पारदर्शिता लाने की पहल कर देश की चुनावी राजनीति की दिशा बदलने वाले शेषन को रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था. राजनीतिक दलों और नेताओं के विरोध, उनपर किए गए अपमानजनक टिप्पणियों के बावजूद उन्होंने चुनाव कार्यों में सुधार के कार्य को नहीं छोड़ा. यही कारण है कि देश में जब भी कभी चुनाव होते हैं तो टीएन शेषण की याद आ ही जाती है.

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First published: November 11, 2019, 11:02 AM IST
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