जब सीवान में शहाबुद्दीन की कोठी पर तेजाब से नहला दिए गए थे चंदा बाबू के दो बेटे

अपने बेटों की तस्वीर के साथ चंदा बाबू और उनकी पत्नी
अपने बेटों की तस्वीर के साथ चंदा बाबू और उनकी पत्नी

आरोप था कि दोनों भाईयों को शहाबुद्दीन के गांव प्रतापपुर ले जाकर उन्हें शहाबुद्दीन की ही कोठी में तेजाब से नहलाया गया जिससे उनकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई. मामले में नया मोड़ तब आया जब इसी कांड के चश्मदीद गवाह राजीव रौशन की भी 16 जून 14 को सीवान के डीएवी मोड़ पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

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सुप्रीम कोर्ट ने तेजाब से नहलाकर चंदा बाबू के दो बेटों की हत्या करने के मामले में सीवान के डॉन और चार बार सांसद रह चुके मोहम्मद शहाबुद्दीन और उसके तीन सहयोगियों को हाई कोर्ट से मिली उम्र कैद की सजा बरकरार रखी. एसिड अटैक के नाम से चर्चित इस हत्याकांड में शहाबुद्दीन ने रंगदारी नहीं देने पर चंदा बाबू के दो बेटों को एसिड से नहलाकर मार दिया था.

सोमवार को इस मामले की सुनवाई होते ही चीफ जस्टिस रंजग गोगोई की पीठ ने महज कुछ मिनटों में ही शहाबुद्दीन की याचिका खारिज कर दी.

साल 2004 में हुई हत्या की दोहरी वारदात ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया था. यही वो साल था जब सीवान में साहेब यानि डॉन शहाबुद्दीन की कोठी पर हैवानियत का नंगा नाच हुआ था.16 अगस्त 2004 को सीवान के ही व्यवसायी चंदा बाबू के दो बेटों गिरीश कुमार और सतीश कुमार का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई थी.



आरोप था कि दोनों को शहाबुद्दीन के गांव प्रतापपुर ले जाकर उन्हें शहाबुद्दीन की ही कोठी में तेजाब से नहलाया गया जिससे उनकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई. मामले में नया मोड़ तब आया जब इसी कांड के चश्मदीद गवाह राजीव रौशन की भी 16 जून 14 को सीवान के डीएवी मोड़ पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
अपने तीनों बेटे की मां और व्यवसायी चन्दकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू की पत्नी कलावती देवी ने इस मामले में मुफस्सिल थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी. इस घटना पांच साल बाद 2009 में सीवान के तत्कालीन एसपी अमित कुमार जैन के निर्देश पर केस के आइओ ने शहाबुद्दीन, असलम, आरिफ व राज कुमार साह को अप्राथमिकी अभियुक्त बनाया था. केस की सुनवाई आगे हुई और इस मामले में पहले लोकल कोर्ट, फिर हाईकोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट.
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