दो से पांच फीसदी वोटर्स सोशल मीडिया से प्रभावित होकर बदल सकते हैं अपना रुख!

आज के मतदाता सोशल मीडिया का जमकर उपयोग करते हैं. एक अनुमान के मुताबिक, लगभग 50 प्रतिशत मतदाता सोशल मीडिया की सूचनाओं से प्रभावित हो सकते हैं.

Saad Omar | News18 Bihar
Updated: March 15, 2019, 9:42 PM IST
Saad Omar | News18 Bihar
Updated: March 15, 2019, 9:42 PM IST
लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही राजनीतिक दलों ने सोशल मीडिया जैसे वाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर हैंडल का सहारा लेना शुरू कर दिया है. खासकर राजनीतिक दल विपक्षी पार्टियों पर सोशल मीडिया के सहारे तेज हमला बोल रहे हैं. दरअसल, राजनीतिक दल भी जानते हैं कि इस बार के लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया का रोल अहम होगा. लेकिन सोशल मीडिया पर प्रचार करना इतना आसान नहीं होगा. सोशल मीडिया पर प्रचार में होने वाले खर्च से लेकर दुष्प्रचार पर चुनाव आयोग और पुलिस मुख्यालय तक की नजर है. पढ़ें चुवान में सोशल मीडिया के उपयोग पर विशेष रिपोर्ट-

इस बार के लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया का रोल अहम होने वाला है. प्रचार प्रसार के लिए राजनीतिक दल सोशल मीडिया का जमकर उपयोग कर रहे हैं. दरअसल, राजनीतिक दलों द्वारा सोशल मीडिया से प्रचार प्रसार करना बेजा नही है. जानकार भी मानते हैं कि लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया के कारण 3 से 5 प्रतिशत वोट इधर- उधर हो सकते हैं. वोटों का यह प्रतिशत देखने में भले ही मामूली दिखे लेकिन यह कई निर्वाचन क्षेत्रो में जीत हार का अहम कारक बन सकता है.

दरअसल, आज के मतदाता सोशल मीडिया का जमकर उपयोग करते हैं. एक अनुमान के मुताबिक, लगभग 50 प्रतिशत मतदाता सोशल मीडिया की सूचनाओं से प्रभावित हो सकते हैं. इसका कारण यह है कि सोशल मीडिया सूचनाओं के प्राथमिक श्रोत है. खसकर युवा वोटर चुनाव से जुड़ी जानकारी के लिए सोशल मीडिया का ही सहारा लेते हैं. बिहार के चालीस लोकसभा सीटों के लिए राजनितिक दलों द्वारा सोशल मीडिया पर किये जा रहे प्रचार प्रसार को नियंत्रण में रखना बड़ी चुनौती है. इस पर होने वाले दुष्प्रचार को रोकने के लिये राज्य निर्वाचन आयोग ने आठ सदस्यीय सेल का गठन किया है.



इस सेल को सोशल मीडिया सेल का नाम दिया गया है. सेल मुख्यालय स्तर पर सोशल मीडिया की गतिविधियों की मॉनिटरिंग करेगा. इसके लिये एक एप लॉच किया गया है, जिस पर अपलोड की गई शिकायतों पर सौ मिनट के अंदर कार्रवाई तय होगी. चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर प्रचार के लिये आयोग की अनुमति लेना भी अनिवार्य होगा. इसके लिए जिला मुख्यालय और सीईओ स्तर पर तीन कमेटियों का गठन किया गया है.

अनुमति के लिए निबंधित पर्टियों को तीन दिन पहले और निर्दलियों प्रत्याशियों को सात दिन पहले आवेदन देना होगा. सोशल मीडिया से संबंधित किसी भी तरह की शिकायत दर्ज काराने के लिये बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने यूनिवर्सल नंबर 1950 जारी किया है. मुख्यालय स्तर पर सोशल मीडिया का दुरुपयोग रोकने और अफवाहों पर लगाम लगाने के लिये विशेष इलेक्शन सोशल मिडिया मॉनिटरिंग सेल बनाया गया है. अगर कोई सोशल मीडिया का दुरुपयोग करता है तो उसेक खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जाएगी.साथ ही भद्दी, अश्लील औऱ सांप्रदायिक टिप्पणी करने वालों को किसी भी सुरत में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.

रिपोर्ट- संजय कुमार

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