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स्‍नातक-PG में छात्राओं को नहीं मिल रहा 'मुफ्त शिक्षा' का फायदा, मगध विश्वविद्यालय के VC ने कही ये बात

arun chourasia | News18 Bihar
Updated: December 11, 2019, 5:11 PM IST
स्‍नातक-PG में छात्राओं को नहीं मिल रहा 'मुफ्त शिक्षा' का फायदा, मगध विश्वविद्यालय के VC ने कही ये बात
बिहार सरकार ने 2014 में की थी मास्‍टर डिग्री तक मुफ्त शिक्षा की घोषणा.

बिहार सरकार (Bihar Government) ने 2014 में लड़कियों के लिए प्राथमिक से लेकर मास्टर डिग्री (Master Degree) तक की शिक्षा मुफ्त करने की घोषणा की थी. हैरानी की बात ये है कि स्नातक और पीजी में छात्राआों को छात्रों के समान ही फीस भरनी पड़ रही है.

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पटना. बिहार सरकार (Bihar Government) ने लड़कियों के लिए प्राथमिक से लेकर मास्टर डिग्री (Master Degree) तक की शिक्षा मुफ्त करने की घोषणा 2104 में की थी. हैरानी की बात ये है कि यह आज तक कॉलेजों में लागू नहीं हो पायी है. हालांकि प्राथमिक, मिडिल एवं इंटर तक तो थोड़ा बहुत लाभ मिल भी जाता है, लेकिन स्नातक (Graduate) और पीजी में छात्राआों को छात्रों के समान ही फीस भरनी पड़ रही है. जबकि पीजी में नामांकन लेने वाली छात्राएं सरकार की मुफ्त शिक्षा की घोषणा को महज छलावा बता रही हैं.

न्‍यूज़ 18 से ये बोलीं छात्राएं
प्राथमिक से लेकर पीजी तक छात्राओं को मुफ्त शिक्षा को लेकर न्यूज़ 18 की टीम ने मगध विश्वविद्यालय के नंबर वन माने जाने वाले गया कॉलेज की छात्राओं से बात की. पीजी के फोर्थ समेस्टर की छात्रा अर्चना कुमारी ने बताया कि सरकारी की घोषणा का प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर असर देखा जा रहा है, जहां सरकारी की तरफ से मिली पोशाक और साइकिल स्कूल के बाहर भी नजर आती है, लेकिन स्नातक और स्नातकोत्तर में छात्राओं को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. इस साल पीजी में नामांकन शुल्क करीब 6 से 7 गुना बढ़ गया है और भी करीब 7000 रुपए लिए जा रहे हैं, जो कि छात्रों के बराबर है. हालांकि सरकार के आदेश के मुताबिक छात्राओं का नामांकन मुफ्त में होना चाहिए था.

वहीं पीजी की एक अन्‍य छात्रा निकिता राज ने बताया कि पहले एडमिशन एक हजार से बारह सौ रुपए में हो जाता था, जिससे छात्राओं को ज्यादा असर नहीं पड़ता था. इस साल 7 हजार नामांकन में लग रहा है जो गरीब छात्राओं के लिए परेशानी की बात है. यही वजह है कि लिस्ट में नाम आने के बावजूद अभी तक कई छात्राओं ने पीजी में नामांकन नहीं लिया है.

कई छात्र संगठन कर चुके हैं प्रदर्शन
छात्राओं से ली जा रही फीस, कॉलेज एवं विश्वविद्यालय कैंपस में सुरक्षा जैसे मुद्दे को लेकर एआईएसएफ एवं एवीबीपी समेत कई छात्र संगठन मगध विश्वविद्यालय के बोधगया स्थित मुख्यालय पर कई बार आन्दोलन कर चुकें हैं, लेकिन उन्‍हें हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला है. इस संबंध में गया कॉलेज के प्रचार्य दिनेश प्रसाद सिन्हा ने बताया कि छात्राओं से फीस लेना कॉलेज की मजबूरी है, क्योंकि सरकार ने 2014 में ही छात्राओं के लिए मुफ्त शिक्षा की घोषणा की थी, लेकिन इसके एवज में आज तक एक रुपया भी विश्वविद्यालय या सरकार के स्तर से कॉलेज को नहीं मिला है. उनके कॉलेज में पीजी में पढ़ाने के लिए स्थायी शिक्षक नहीं हैं और वे अतिथि शिक्षक के जरिये पठन-पाठन का काम करवा रहें हैं. ऐसे में इन शिक्षकों के भुगतान के लिए छात्र-छात्राओं से फीस लेना मजबूरी है.

Magadh University, Rajendra Prasad, मगध विश्वविद्यालय, राजेन्द्र प्रसाद
सरकार की गाइडलाइन को विश्वविद्यालय लागू कराने में लगा हुआ है. 
अगर सरकार या विश्वविद्यालय इस मद में उन्हें राशि उपलब्ध करवा दे तो वे छात्राओं से ली गयी फीस वापस कर देगें. जबकि इस मुद्दे पर मगध विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि सरकार की गाइडलाइन को विश्वविद्यालय लागू कराने में लगा हुआ है. अगर इसमें कहीं से भी नियम के विरूद्ध छात्राओं से राशि लेने की शिकायत आती है तो वे उसे वापस लौटाने की व्यवस्था कराएंगे.

इस वजह से सरकार ने की थी घोषणा
केन्द्र और राज्य सरकार कई लोक लुभावनी घोषणा करती रहती हैं, लेकिन विभिन्न वजहों से वह इसे लागू नहीं करा पाती हैं. अगर प्राथमिक से लेकर पीजी तक छात्राओं को मुफ्त शिक्षा देने की घोषणा को सरकार पूरा कराने में सफल हो जाती है, तो इंटर और स्नातक के बाद स्नातकोत्तर की पढाई के लिए छात्राएं ज्यादा प्रोत्साहित होंगी.

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First published: December 11, 2019, 4:35 PM IST
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