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वशिष्ठ नारायण सिंह के 'अपमान' पर लालू यादव का ट्वीट- नीतीश को नहीं मिली हाल पूछने की फुर्सत

News18 Bihar
Updated: November 15, 2019, 7:50 PM IST
वशिष्ठ नारायण सिंह के 'अपमान' पर लालू यादव का ट्वीट- नीतीश को नहीं मिली हाल पूछने की फुर्सत
वशिष्ठ नारायण सिंह के शव को को एंबुलेंस नहीं दिए जाने पर लालू यादव ने नीतीश सरकार को घेरा. (फाइल फोटो)

वशिष्ठ नारायण सिंह ने महान वैज्ञानिक आंइस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती दी थी. गुरुवार को उनके निधन के बाद परिजनों ने बताया कि पीएमसीएच प्रशासन और सरकार की ओर से उन्‍हें कोई मदद नहीं दी गई.

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पटना. गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह (Vashistha Narayan Singh) का अंतिम संस्कार शुक्रवार को  भोजपुर (Bhojpur) जिले के उनके पैतृक गांव बसंतपुर में राजकीय सम्मान के साथ कर दिया गया. इस मौके पर भारी संख्या में श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़ उमड़ी और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी गई. वो पिछले 40 सालों से सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia) बीमारी से पीड़ित थे और गुरुवार को पटना में उनका निधन हो गया था. पीएमसीएच (PMCH) में उनके निधन के बाद ऐसा वाकया हुआ जो बिहार सरकार के लिए फजीहत का सबब बन गया. दरअसल आरोप है कि उनका शव पीएमसीएच परिसर में घंटों तक पड़ा रहा, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उन्हें एंबुलेंस तक मुहैया नहीं करवाई. जब मीडिया में सुर्खियां बनीं तो पीएमसीएच के अधीक्षक ने इसे एक गलती माना. अब इसी मसले को लेकर आरजेडी चीफ लालू यादव (Lalu Yadav) ने सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) पर निशाना साधा है.

उन्होंने एक के बाद एक तीन ट्वीट किए हैं. उन्होंने पहले ट्वीट में लिखा, कल बिहार गौरव और हमारी साझी धरोहर महान गणितज्ञ आदरणीय डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह जी के निधन की ख़बर सुनकर बहुत दुख हुआ. मौत सबको एक ना एक दिन आनी ही है लेकिन मरणोपरांत जिस प्रकार उनके पार्थिव शरीर के साथ असंवेदनशील नीतीश सरकार द्वारा जो अमर्यादित सलूक किया गया वह अतिनिंदनीय है.



इसके बाद उन्होंने अगला ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने लिखा, क्या बड़बोली डबल इंजन सरकार उस महान विभूति को एक ambulance तक प्रदान नहीं कर सकती थी? मीडिया में बदनामी होने के बाद क्या किसी के पार्थिव शरीर को सड़क पर बीच में रोककर उसे श्रद्धांजलि देना एक मुख्यमंत्री को शोभा देता है? क्या अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान CM उन्हें कभी देखने गए?
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इसके बाद लालू यादव ने एक और ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा कि अपने कार्यकाल में मैंने उनका अच्छे से अच्छे अस्पताल में इलाज करवाया. उनकी सेवा करने वाले पारिवारिक सदस्यों को सरकारी नौकरी दी, ताकि वो पटना में उनकी अच्छे से देखभाल कर सकें.

बता दें कि वशिष्ठ नारायण सिंह ने महान वैज्ञानिक आंइस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती दी थी. गुरुवार को उनके निधन के बाद परिजनों ने बताया कि पीएमसीएच प्रशासन और सरकार की ओर से उन्‍हें कोई मदद नहीं दी गई. देश की महान विभूति का अपमान किया गया है.

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First published: November 15, 2019, 2:49 PM IST
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