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स्टाफ को खल रही थी कैंटीन की कमी... रेलवे ने बेकार पड़े ट्रेन के डब्बे को बनाया Cafeteria
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News18 Bihar
Updated: February 5, 2020, 12:19 PM IST
स्टाफ को खल रही थी कैंटीन की कमी... रेलवे ने बेकार पड़े ट्रेन के डब्बे को बनाया Cafeteria
पटना से सटे दानापुर में बनाया गया रेलवे का कैफेटेरिया

पूर्व मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने बताया है कि पूर्व मध्य रेल में पहली बार इस प्रकार का कार्य किया गया है. जिसमें बेकार हो चुके रेलवे के कोच को स्टाफ कैफेटेरिया के रूप में विकसित किया गया

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पटना. पटना से सटे दानापुर (Danapur) रेलवे स्टेशन के पास खुला एक कैफेटेरिया (Cafeteria) इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है. पूर्व-मध्य रेल महिला कल्याण संगठन ने दानापुर कोचिंग डिपो में पड़े एक बेकार रेलवे कोच (Railway Coach) को कैफेटेरिया में बदला है. पूर्व मध्य रेल महिला कल्याण संगठन की अध्यक्षा कौमुदी त्रिवेदी ने रेलकर्मियों के लिए अनुपयोगी कोच का जीर्णोद्धार कर इसे स्टाफ कैंटीन (Canteen) का रूप दिया और इस अनोखे कैफिटेरिया का उद्घाटन किया.

पूर्व मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने बताया है कि पूर्व मध्य रेल में पहली बार इस प्रकार का कार्य किया गया है. जिसमें बेकार हो चुके रेलवे के कोच को स्टाफ कैफेटेरिया के रूप में विकसित किया गया. वर्ष 2019 के बाद रेलवे द्वारा इस डब्बे को बेकार घोषित कर दिया गया था. इसे दानापुर कोचिंग डिपो के अंदर वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट के पास स्थापित किया गया है.



25 साल पुराना है ये रेल डब्बाइस कैफेटेरिया का विकास दानापुर कोचिंग डिपो के ही कर्मचारियों द्वारा खाली समय में योगदान देते हुए अंदरूनी स्रोतों से किया गया है. बेकार पड़े रेल डब्बे को कैफेटेरिया बनाने में किसी प्रकार के सरकारी राजस्व का व्यय (खर्च) नहीं हुआ है. बता दें कि कोच संख्या ईसी जी 94504 को 1994 में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, पेरांबुर, चेन्नई द्वारा बनया गया था.

रेलवे द्वारा बनाए गए कैफेटेरिया में बैठीं महिलाएं
रेलवे द्वारा बनाए गए अनोखे कैफेटेरिया में बैठीं महिलाएं


18 साल से दानापुर रेलमंडल में हो रहा था इस्तेमाल

इस कोच के निर्माण के बाद इसे सेवा के लिए पूर्व रेलवे को दिया गया था. वर्ष 2002 से यह कोच दानापुर मंडल में सेवारत था. वर्ष 2007 में इस कोच को लिलुआ वर्कशॉप में भेजा गया था जहां इसे शौचालय रहित कोच के रूप में रूपांतरित कर दिया गया था. तब से यह कोच मोकामा-शटल में इस्तेमाल किया जा रहा था. सबसे अंत में यह दानापुर-तिलैया पैसेंजर ट्रेन में इस्तेमाल किया गया था और सितंबर, 2019 में इसका कार्यकाल समाप्त हो चुका था.

दो साल से कैंटीन की हो रही थी डिमांड

इस कैंटीन के बन जाने से न केवल दानापुर कोचिंग डिपो के सौंदर्यीकरण में वृद्धि हुई है बल्कि यहां कार्यरत 500 से ज्यादा रेलकर्मियों को अब अल्पाहार के लिए कहीं और नहीं जाना पड़ेगा. कोचिंग डिपो के अधिकारी अनिल कहते हैं कि कर्मचारी कैंटीन की अनुपस्थिति के बारे में पिछले दो साल से शिकायत कर रहे थे कि इस क्षेत्र में कोई होटल नहीं है, इसलिए हमने इस बारे में सोचा.

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First published: February 5, 2020, 11:01 AM IST
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